भारत का स्पाई जिसके आगे सारे धुरंधर फेल, पाक सेना में की नौकरी, जानें पकड़े जाने पर क्या बोली थी बीवी
धुरंधर 2 देखने के बाद रविंद्र कौशिक का नाम सुर्खियों में है। उन्होंने भारत के लिए जो किया वो करना शायद ही कोई कर पाए। कैसे एक हैंडसम लड़का पाकिस्तान पहुंचा, वहां आर्मी की ऊंची पोस्ट पर पहुंचा और शादी भी की... जानें।

धुरंधर 2 रिलीज के बाद दर्शक उन सभी स्पाई या एजेंट्स के बारे में जानना चाहते हैं जिन्होंने देश के जान जोखिम में डाली। यह भी सर्च किया जा रहा है कि क्या हमजा की कहानी किसी असली स्पाई, हैंडलर या एजेंट पर बेस्ड है। इन सबके साथ देश के लिए जान देने वाले स्पाई रविंद्र कौशिक की कहानी भी चर्चा में आ गई है। जिन्हें ब्लैक टाइगर के नाम से भी जाना जाता था। जर्नलिस्ट अनिरुद्ध मित्रा ने उनकी इमोशनल कहानी एक पॉडकास्ट में बताई। उसे वो असली हमजा मानते हैं।
रियल हीरो की ट्रैजिक कहानी
धुरंधर 2 भारतीय दर्शकों को काफी पसंद आ रही है। इसमें दिखाई गई कहानी और किरदारों से लोग हकीकत से कनेक्ट करके देख रहे हैं। इस बीच कई विशेषज्ञ भी फिल्म पर अपनी राय दे रहे हैं। अनिरुद्ध मित्रा आईएसआई, रीजनल अंडरवर्ल्ड, रीजनल जियोपॉलिटिक्स पर काफी रिसर्च कर चुके हैं। उन्होंने किताबें भी लिखी हैं। भानु पाठक के पॉडकास्ट पर उनसे पूछा गया कि रविंद्र कौशिक की कहानी क्यों अहम है। इस पर अनिरुद्ध ने जवाब दिया, 'यह बहुत इमोशनल कहानी है। ये एक ट्रैजिक हीरो की कहानी है। वह वहां जाकर पाकिस्तान की आर्मी में मेजर बन जाते हैं।'
थिएटर के शौक से मिशन तक
अनिरुद्ध आगे बताते हैं, 'वह कोई मिलिट्री ट्रेनिंग से नहीं आया था। वो एक कॉलेज स्टूडेंट था, जिसको थिएटर का शौक था। उसे एक्टर बनने का शौक था। रॉ के किसी आदमी ने उसे एक दिन पकड़ा और बोला कि तुम अपने जो प्ले होता है उसमें तुम बहुत नेशनलिस्ट फीलिंग को लेके आते हो। देश के लिए बहुत सारी बातें करते हो। देश को बचाना कितना जरूरी है? नेशनल इंट्रेस्ट की बात करते हो। कैसा रहेगा अगर तुम असल जिंदगी में ऐसा करो? उन्हें वहां से लगा कि शायद ट्राई करके देखना चाहिए।'
विनोद खन्ना जैसे दिखते थे रविंद्र
अनिरुद्ध ने बताया कि रविंद्र कौशिक श्रीगंगानगर के थे और बहुत हैंडसम थे। एकदम विनोद खन्ना जैसे दिखते थे। अनिरुद्ध बोलते हैं, 'लगा होगा कि इसको एक्टिंग आती है, इतना खूबसूरत है हम पेनिट्रेट कर पाएंगे कुछ एरियाज में उनको। शायद रॉ की तभी से प्लानिंग थी इसको पाकिस्तान में डिप्लॉय करने की।'

ऐसे मिला पहला असाइनमेंट
अनिरुद्ध बोले, 'पहले श्रीगंगानगर में ट्रेनिंग हुई। वो बॉर्डर का इलाका है तो रविंद्र से कहा गया कि पहले एक गांव में छोड़ा जाएगा। लोगों से बातचीत करके कुछ जानकारी जुटाकर लाना है। यह तुम्हारा पहला असाइनमेंट है। उन्हें जीप में लेकर एक गांव में छोड़ दिया। थोड़ी देर में रविंद्र कौशिक को पता चला कि ये पाकिस्तान है। उन्हें बताया नहीं गया था। इन्फॉर्मेशन लेकर वह बॉर्डर पार कर रहे थे तो बीएसएफ की नजर में आ गए। उन्होंने भागने की कोशिश की तो वह रुके नहीं। बीएसएफ ने गोली मार दी जो पैर में लगी। वह गिर गए तो बीएसएफ वाले हॉस्पिटल ले गए। बाद में बीएसएफ वालों को पता चल गया कि वह भारत के लिए काम कर रहे हैं। रॉ वाले फिर उनको छुड़ाकर ले गए लेकिन रविंद्र ने कहा कि उन्हें यह काम नहीं करना है।'
पाकिस्तान में जीता लोगों का दिल
अनिरुद्ध ने बताया कि रॉ को लग गया कि ये काम का आदमी है। इसके बाद उनको पाकिस्तान भेजने की तैयारी की। इसके बाद उनको ट्रेनिंग देकर पाकिस्तान भेजा गया। पाकिस्तान जाकर वहां लॉ कॉलेज में एडमिशन लिया। अनिरुद्ध बताते हैं, 'लॉ कॉलेज में एडमिशन इसलिए किया क्योंकि वहां आर्मी अफसरों के बच्चे पढ़ते हैं। वहां उसने प्ले करना शुरू किया। आर्मी अफसरों के बच्चों के घर आना-जाना शुरू हुआ। फिर एग्जाम देकर आर्मी में भर्ती हो गया।'
ऐसे हुई पाकिस्तानी लड़की से शादी
अनिरुद्ध आगे बताते हैं, 'पाकिस्तान आर्मी में ये अकाउंट्स डिपार्टमेंट में था तो इसको बहुत सारी जगह जाना पड़ता था ऑडिटिंग के लिए। यह एक खास जगह ऑडिटिंग पर गया जहां वो पाकिस्तान आर्मी को यूनिफार्म सप्लाई करते थे। उसको पता चला कि यहां से यूनिफार्म जो है एकदम सीनियर आर्मी मतलब कि जनरल लेवल के आर्मी ऑफिशियल्स के पास भी जाता है। उसके जो ओनर थे, उनके साथ इसका बहुत अच्छा एक रिश्ता बना। वह भी इसे पसंद करने लगे। इसको पता था कि उनके घर में शादी के लिए बेटी है।' उन्होंने बताया कि रविंद्र का घर पर आना-जाना बढ़ा और बेटी से इश्क हुआ। इसने शादी के लिए कहा तो घरवाले खुशी-खुशी मान गए। उनके जरिए ऐसे पार्टी या गैदरिंग डिनर वगैरह में ये इसका भी आना जाना इसका शुरू हुआ जहां पे बहुत सारे पाकिस्तानी आर्मी के सीनियर्स आते रहते थे। वहां से उन्होंने जान-पहचान के बल पर आर्मी में सीनियर रैंक हासिल की।
किसी और की गलती से पकड़े गए रविंद्र
रविंद्र कौशिक अपने देश के लिए काम कर रहे थे। वह अपनी गलती से पकड़े भी नहीं गए लेकिन एक जूनियर स्पाई इनायत मसीह को 1983 में रॉ ने रविंद्र से मिलने भेजा। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक आईएसआई ने इनायत को तुरंत पकड़ लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान उसने सच उगल दिया और वह आईएसआई को मुल्तान के उस पार्क में ले गया जहां रविंद्र से मुलाकात होनी थी।
जब पकड़े गए तो क्या बोले...
अनिरुद्ध मित्रा ने पॉडकास्ट में बताया कि रविंद्र को अपनी बीवी, बच्चे और पाकिस्तान के परिवार से अटैचमेंट था। उनकी बीवी को भी रविंद्र से बहुत प्यार था। रविंद्र जानते थे कि उस परिवार की गलती नहीं है और जब वह पकड़े जाएंगे इन सबको सजा मिलेगी। अनिरुद्ध बताते हैं, 'जब वह पकड़े गए तो कहा था कि हां मैं रॉ का एजेंट हूं। मैं हिंदू हूं। मेरा नाम रविंद्र कौशिक है। मैंने अपना काम किया, आपने भी मुझको पकड़कर अपना काम किया। अगर आपको लगता है कि मैं अपना मुंह खोल दूंगा तो ऐसा नहीं होगा। आप चाहे जो कर लो।'

पाकिस्तानी बीवी ने किया सपोर्ट
अनिरुद्ध आगे बोलते हैं, 'दूसरी तरफ उनकी बीवी ने कोर्ट में जाकर कहा, मैंने तो एक पाकिस्तानी से शादी की जो आर्मी में अफसर था। मैंने एक मुसलमान से शादी की जो हर तरफ से मुसलमान है। मैंने पाकिस्तानी नागरिक से शादी की जिसका जन्म फलां गांव में फलां डेट को हुआ। मेरी यहां गलती नहीं है, शायद वह भी गलत नहीं हैं। मैं किसी के खिलाफ कोई गवाही नहीं दे सकती, मेरी नजर में वो मेरा पति है। मैं उसके देश का दुश्मन मानने को तैयार नहीं हूं।'
प्रताड़ना के बाद भी नहीं खोला मुंह
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविंद्र कौशिक को सितंबर 1983 में गिरफ्तार करके फांसी की सजा सुनाई गई जिसे बाद में उम्र कैद में बदला गया। रविंद्र को पूछताछ में बहुत प्रताड़ित किया गया लेकिन उन्होंने मुंह नहीं खोला। रविंद्र कौशिक का निधन 21 नवंबर 2001 को मियांवाली जेल में टीबी और हार्ट की बीमारी की वजह से हुआ।
डिसक्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई इन्फॉर्मेशन पॉडकास्ट में अनिरुद्ध मित्रा की दी गई जानकारी पर आधारित है। लाइव हिंदुस्तान इनके सच होने की पुष्टि नहीं करता।
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