जहर नहीं शहद देकर मारो... भारत का सुपर स्पाई जिसने पाकिस्तान को दिया सबसे गहरा जख्म
भारत के लेजंडरी स्पाई आर एन काव जिन्होंने पाकिस्तान को काफी गहरा जख्म दिया था। उन्होंने रॉ का गठन ही नहीं दिया बल्कि 250 से ज्यादा जासूसों को ट्रेनिंग भी दी। जानिए उनकी कहानी।

धुरंधर 2 ने इतिहास के पन्नों में दबे कई महान भारतीय जासूसों की यादें ताजा कर दी हैं। इन सबके बीच आर एन काव का जिक्र किए बिना नहीं रहा जा सकता। आर.एन. काव केवल भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रॉ (R&AW) के संस्थापक ही नहीं थे बल्कि इंडिया की मॉडर्न जासूसी के आर्किटेक्ट थे। आर एन काव काफी हैंडसम थे, हॉलिवुड एक्टर की तरह स्टाइल में रहते थे लेकिन उनके ऑपरेशंस बहुत घातक होते हैं। माना जाता है कि आर एन काव भारत के वो स्पाई थे जिसने पाकिस्तान को सबसे बड़ा जख्म दिया था।
किसी से मिलते नहीं थे आर एन काव
रामेश्वर नाथ काव ही वह लेजंडरी स्पाई थे जिन्होंने रॉ का गठन किया। आवारा मुसाफिर पॉडकास्ट में नेशनल सिक्योरिटी एक्सपर्ट जर्नलिस्ट अनिरुद्ध मित्रा ने उनसे जुड़ी कुछ इंट्रेस्टिंग चीजें बताईं। उन्होंने बताया, 'रामेश्वर नाथ काव की पर्सनैलिटी और चेहरा ऐसा था जैसे कि हॉलीवुड स्टाइल स्पाई हों। ब्लैक सूट, टाई पहनते थे, ब्लैक गॉगल्स लगाते थे। किसी से मिलते नहीं थे। दिल्ली में रहते थे और उनके घर के बाहर की दीवार बहुत ऊंची थी, करीब 15 फीट की रही होगी।'
ऐसे बना रॉ का ब्लूप्रिंट
अनिरुद्ध ने आगे बताया, 'आरएन काव रॉ बनाने से पहले आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) में काम करते थे। तब तक पाकिस्तान के साथ वॉर हो चुका था। चाइना का वॉर हो गया था। सरकार को लगा कि हमारे पास एक्सटर्नल इंटेलिजेंस की कमी है। खासतौर पर ये चीन से युद्ध के बाद हुआ। इंदिरा गांधी के कैबिनेट के समय ये विचार आया। इसके बाद रामेश्वर नाथ काव ने एक ब्लू प्रिंट बनाकर इंदिरा गांधी को दिया था।'
पाकिस्तान के दो टुकड़े
अनिरुद्ध ने बताया कि पाकिस्तान से युद्ध होने के बाद पता चल गया था कि पाकिस्तान से चीन का क्या रिश्ता है तो अब साफ था कि गोल क्या है। वह बताते हैं, 'बांग्लादेश तब पाकिस्तान का ही हिस्सा था। यह तय था कि अगर ऐसा रहा तो भारत में खून बहता रहेगा। इसलिए रॉ की पहली प्लानिंग थी कि पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए जाएं तो ये रुक सकता है।'
भारत ने ऐसे किया था प्लान
अनिरुद्ध ने बताया कि ईस्ट और वेस्ट पाकिस्तान में उनकी भाषाओं, संस्कृति को लेकर पहले से ही तनाव था तो रॉ का पहला टारगेट था कि ईस्ट पाकिस्तान जो कि अब बांग्लादेश है, के साथ मिलकर काम करना है। ये बात वेस्ट पाकिस्तान के खिलाफ थी। वह बोले, 'ये तय था कि मामला धीरे-धीरे वॉर तक पहुंच जाएगा तो फिर भारत मिलिट्री के साथ दखल देगा। अनिरुद्ध बोले, ‘जब वॉर हो गया पाकिस्तान को संरडर करना पड़ा। हम सब लोग को क्या दिखता है कि पाकिस्तानी जनरल नियाजी वह सरेंडर पेपर में दस्तखत कर रहे हैं। इंडियन आर्मी सेलिब्रेट कर रहा है। मुक्ति योद्धा सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत शायद पहला देश था जिसने बांग्लादेश को इंडिपेंडेंट नेशन के तौर पर पहचाना, लेकिन इसकी शुरुआत कहां से हुई इसकी बात कोई नहीं करता। यह एक इंटेलिजेंस एजेंसी की सफलता थी।’

पाकिस्तान के मन में भरी दहशत
बता दें कि भारत ने ईस्ट और वेस्ट पाकिस्तान के आपसी कलह का फायदा उठाकर सीधे युद्ध में उतरने के बजाय वहां के स्थानीय विद्रोहियों (मुक्ति वाहिनी) को गुप्त रूप से ट्रेनिंग और हथियार देना शुरू किया। भारतीय सीमा के भीतर ट्रेनिंग कैंप बनाए गए। इससे पाकिस्तानी सेना अपने ही घर में घिर गई और उसे लगने लगा कि वह किसी बाहरी सेना से नहीं, बल्कि अपने ही नागरिकों से लड़ रही है। जनरल सैम मानेकशॉ और आर.एन. काव ने रेडियो और पर्चों के जरिए पाकिस्तानी सैनिकों के मन में खौफ पैदा किया। आर.एन. काव ने दुश्मन को अंदर से खोखला किया और जनरल मानेकशॉ ने बाहर से ताबूत में कील ठोंकने का काम किया।
जहर से नहीं शहद से मारो
अनिरुद्ध ने बताया कि वह बहुत मीठा बोलते थे लेकिन सब कुछ बहुत परफेक्शन के साथ करते थे। काव किसी जर्नलिस्ट को इंटरव्यू नहीं देते थे और बहुत कम बात करते थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉ के पूर्व डायरेक्टर भी बता चुके हैं कि आर एन काव बहुत सोफिस्टिकेटेड थे। वह बोलते थे, 'देखो जब कोई विरोध करे तो उसको जहर देकर क्यों मारना, क्यों ना खूब शहद देकर मारा जाए?' आर एन काव की टीम को काव बॉयज कहा जाता था। कहा जाता है कि उन्होंने रॉ की दो जेनरेशंस को जासूसी की ट्रेनिंग दी और दांव-पेंच सिखाए थे। 20 जनवरी 2002 में काव का निधन हो गया।
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