मुझे पीने का शौक नहीं…इस गाने के लिए चाहिए थी मोहम्मद रफी जैसी आवाज, ढूंढ निकाला ये सिंगर
मोहम्मद रफी के इंतकाल के बाद इस सिंगर का हुआ था इंडस्ट्री में जन्म। उनके ही जैसी आवाज की वजह से मिला पहला बड़ा ब्रेक और फिर चमक गई किस्मत। इस सिंगर ने गाए कई शानदार गाने। आज भी सुने जाते हैं सिंगर के गाने।

अमिताभ बच्चन के करियर में फिल्म कुली की अलग जगह है। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें चोट लगी थी और वो महीनों तक हॉस्पिटल में एडमिट रहे। लेकिन जब ये फिल्म रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर कमाल हो गया। फिल्म की कहानी ऑडियंस के बीच हिट हो गई और गानों को भी खूब प्यार मिला। इस फिल्म के बनने से पहले ही मोहम्मद रफी दुनिया को अलविदा कह चुके थे। ऐसे में उनकी कमी को पूरा करने के लिए एक ऐसे सिंगर को ढूंढ निकाला गया जो उनके ही अंदाज में गाना गाता हो। और ऐसे इंडस्ट्री को एक कमाल का सिंगर मिला।
अमिताभ बच्चन की फिल्म के लिए चाहिए थे मोहम्मद रफी जैसी आवाज
1983 में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की फिल्म कुली रिलीज हुई थी। इस एक्शन ड्रामा फिल्म में अमिताभ बच्चन ने इकबाल खान का किरदार निभाया था और ऋषि कपूर थे सनी खान। फिल्म की कहानी ऑडियंस को पसंद आई। एक्शन जबरदस्त था। लेकिन गानों की अपनी एक अलग जगह थी। फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने दिया था। फिल्म के डायरेक्टर मनमोहन देसाई चाहते थे कोई ऐसा सिंगर हो जिसकी आवाज में मोहम्मद रफी जैसी खासियत हो। सिंगर के नाम पर विचार चल रहा था तभी ऊषा खन्ना ने म्यूजिक कंपोजर की जोड़ी को सिंगर शब्बीर कुमार के नाम का सुझाव दिया।
शब्बीर कुमार को किया फोन
शब्बीर कुमार ने एक शो में बताया था कि 1980 में मोहम्मद रफी के इंतकाल के बाद मुंबई में एक शो बनाया गया था जिसका नाम था ‘एक शाम रफी के नाम’। इस शो में गाना गाने के लिए वो हर हफ्ते गुजरात से मुंबई आते थे। एक दिन उन्हें लक्ष्मीकांत ने फोन किया। उन्हें हैरानी हुई कि इतना बड़ा म्यूजिक कंपोजर उन्हें फोन कर बुला रहा है। वो मुंबई पहुंचे और उन्होंने एक गाने की लाइन दी। शब्बीर कुमार ने वो लाइन गाकर सुनाई और म्यूजिक कंपोजर को खुश कर दिया। वो गाना था ‘मुझे पीने का शौक नहीं पीता हूं गम भुलाने को’। शब्बीर इस ऑडिशन में पास हुए और फिल्मों में उनका करियर शुरू हो गया।
मोहम्मद रफी के इंतकाल के बाद चमक गई किस्मत
शब्बीर कुमार ने कुली फिल्म के सभी गाने अपनी आवाज में रिकॉर्ड किए। उन्होंने ‘पीने का शौक नहीं, पीता हूं गम भुलाने को', 'जवानी के रेल कहीं','लंबू जी टिंगू जी', 'सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं', 'हम का इश्क हुआ है', 'एक्सीडेंट हो गया', 'मुबारक हो तुमको हज का महीना' और 'ये गए वो गए'। इस फिल्म के बाद शब्बीर ने कई हिट गाने गाए। उनके नाम गाने 'अपने दिल से बड़ी दुश्मनी', 'जब हम जवां होंगे', 'प्यार किया नहीं जाता', ‘तुमसे मिलकर ना जाने क्यों’।
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