चाहता हूं वैभव सूर्यवंशी टेस्ट क्रिकेट खेले, लेकिन थोप नहीं सकते.., रविचंद्रन अश्विन ने क्यों कहा ऐसा?
आर अश्विन ने क्रिकइन्फो के एक समारोह में बोलते हुए वैभव सूर्यवंशी के बारे में कहा कि मैं चाहता हूं कि वह टेस्ट क्रिकेट खेले, लेकिन आज के लड़कों पर इस तरह के निर्णय थोप नहीं सकते। उन्होंने भारत के टेस्ट क्रिकेट खेलने के अंदाज, सुधार आदि तमाम विषयों पर भी बात की। पढ़िए क्या कहा-

पूर्व भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन को क्रिकइन्फो ऑनर्स अवार्ड्स 2026 में 21वीं सदी के 25 महानतम पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों में शामिल किया गया। समारोह में बोलते हुए, अश्विन ने टी20 क्रिकेट में गेंदबाजों खुद को कैसे अडाप्ट कर सकते हैं, क्रिकेट की वर्तमान स्थिति और क्या 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। क्रिकइन्फो ऑनर्स अवार्ड्स 2026 के दौरान बोलते हुए रविचंद्रन अश्विन ने इस बात पर भी चर्चा की कि क्या गेंदबाजों ने आधुनिक बल्लेबाजों की बदलती खेल शैली के अनुरूप खुद को ढाल लिया है।
वैभव को टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए लेकिन थोप नहीं सकते
वैभव सूर्यवंशी को टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए या नहीं, इस सवाल का जवाब देते हुए अश्विन ने कहा "व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए। अगर आप खेल के व्यापक हित के बारे में सोच रहे हैं, तो मेरा मानना है कि उन्हें खेलना चाहिए। लेकिन फिर भी क्या आप अपने बच्चों को वह सिखा सकते हैं जो वे सीखना नहीं चाहते? आप ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते। मुझे लगता है कि खेल का पूरा माहौल ही इन चीजों को प्रभावित कर रहा है और कभी-कभी जब खेल आपको बताता है कि क्या करने की जरूरत है, तो बेहतर है कि आप उसी का पालन करें। आप खेल के किसी विशेष पहलू को थोप नहीं सकते। हां, टेस्ट क्रिकेट सर्वोच्च स्तर है, लेकिन मैं लंबे समय से जमीनी स्तर पर कोचिंग दे रहा हूं और मैंने युवा क्रिकेटरों को रेड बॉल क्रिकेट खेलने की इच्छा से आते नहीं देखा है। वे कुछ गेंदों का बचाव करते हैं और तुरंत उन शॉट्स को सीखना चाहते हैं जो उन्हें मुश्किल से बाहर निकाल सकें।"
रिलेवेंट बने रहना है तो टेस्ट क्रिकेट को विकसित करें
टेस्ट क्रिकेट के विकास और सिलेक्शन के लिए क्या स्टैंडर्ड होने चाहिए इस पर बात करते हुए अश्विन ने कहा "मैं इसे अंतिम रूप से तय नहीं करना चाहता और यह नहीं कहना चाहता कि यह बिल्कुल ऐसा ही रहेगा, लेकिन टेस्ट क्रिकेटरों को प्रथम श्रेणी क्रिकेट के दम पर अपनी जगह बनानी चाहिए। एक समय था जब तीनों प्रारूपों में खेलना बहुत रोमांचक होता था, लेकिन आज भी ऐसे क्रिकेटर हैं जो प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते हैं और टेस्ट प्रारूप में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने की आकांक्षा रखते हैं। दुर्भाग्य से विभिन्न परिस्थितियों और भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की प्रचुरता के कारण उनमें से कुछ टेस्ट क्रिकेट में जगह बनाने से चूक जाते हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो खर्च ना चलने के कारण और पर्याप्त पैसा ना मिलने की वजह से प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए 15 से 20 साल समर्पित करने के लिए कैसे प्रोत्साहित करेंगे? प्रासंगिक बने रहने के लिए टेस्ट क्रिकेट को थोड़ा विकसित होने की आवश्यकता है क्योंकि, इस प्रारूप के एक गंभीर प्रशंसक के रूप में मेरा मानना है कि यह अपने चरम पर है और कुछ बहुत ही तत्काल करने की आवश्यकता है।"
टेस्ट क्रिकेट को लेकर गंभीर हैं तो पुराने ख्याल के कोच रखें
टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से टीम इंडिया में सुधार की जरूरत के बारे में बात करते हुए अश्विन ने कहा "फर्स्ट-क्लास क्रिकेट इतना आकर्षक होना चाहिए कि खिलाड़ी इसे अपनाएं। बीसीसीआई ने वेतन स्ट्रक्चर में बदलाव करके एक प्रयास किया है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ भारत की समस्या है, यह एक वैश्विक समस्या है। क्या खिलाड़ियों को टेस्ट क्रिकेट अपनाने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन मिल रहा है? इसमें बहुत मेहनत, लगातार यात्रा, चार दिवसीय मैच और बीच में तीन दिन का ब्रेक, शरीर पर काफी दबाव और लगातार आराम की जरूरत होती है। यह एक मुश्किल स्थिति है जब खिलाड़ी कुछ महीनों तक खेलकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट खेलने और अपना सब कुछ दांव पर लगाने के अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि कड़ी टक्कर वाले टेस्ट मैच के अंत में मिलने वाली खुशी का कोई मुकाबला नहीं है। उसकी जगह कोई और चीज नहीं ले सकती। और अगर आप टेस्ट क्रिकेट को लेकर गंभीर हैं, तो युवा क्रिकेटरों को थोड़े पुराने ख्यालों वाले कोचों द्वारा प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।"
गेंदबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण है क्रिकेट, ऐसे खेलें
आज गेंदबाजों को बहुत तेज गति से खुद को ढालना पड़ रहा है। टेस्ट क्रिकेट विकसित हो चुका है, पिचें बदल चुकी हैं और परिस्थितियां भी बदल चुकी हैं, लेकिन टी20 क्रिकेट खेल के आर्थिक मॉडल के कारण, एक हाईस्कोरिंग गेम बना रहेगा। इसका परिणाम यह है कि गेंदबाजों को यह समझना होगा कि व्यक्तिगत विकेट लेना कभी-कभी पीछे छूट सकता है और उन्हें एक टीम के रूप में मिलकर खेलना होगा। क्रिकेट, एक खेल के रूप में पारंपरिक रूप से धीमी गति से विकसित हुआ है। मैं छक्का नहीं मार पाता था, लेकिन मैंने बेसबॉल शिविरों में भाग लिया और लगातार प्रतिक्रिया से सीखा। क्रिकेट अब एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुका है जहां गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों को हर सीजन या हर मैच में नहीं बल्कि हर गेंद पर समस्या का समाधान करने वाला बनना होगा। जब हम इस मानसिकता को अपनाएंगे तो हम बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों के प्रदर्शन में एक अलग ही स्तर देखेंगे।





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