Supreme Court restrains exhumation of tribal Christians bodies in Chhattisgarh villages छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शव कब्र से निकालने पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब, Chhattisgarh Hindi News - Hindustan
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छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शव कब्र से निकालने पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

याचिका में राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को हर गांव में सभी समुदायों के लोगों को दफनाने के लिए खास जगहें तय करने और सभी परिवारों को अपने मृतकों को उसी गांव में दफनाने की इजाजत देने का निर्देश देने की मांग की गई है जहां वे रहते हैं।

Wed, 18 Feb 2026 05:48 PMSourabh Jain पीटीआई, नई दिल्ली
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छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शव कब्र से निकालने पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ में ईसाई आदिवासियों के शवों को कब्रों से जबरन निकालने और उन्हें गांव के बाहर दफनाने के आरोपों पर सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक किसी भी शव को कब्र से निकालने पर तत्काल प्रभाव से रोक भी लगा दी है। इस बारे में दायर याचिका में इस तरह शव दफनाने से रोकने को संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन बताया गया है।

कहीं और दफनाने के लिए मजबूर किया जा रहा

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ CAJE (छत्तीसगढ़ एसोसिएशन फॉर जस्टिस एंड इक्वालिटी) व अन्य लोगों की तरफ से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न गांवों में ईसाई आदिवासियों को उनके परिजनों के शव गांव के कब्रिस्तान में दफनाने से रोका जा रहा है, साथ ही दफनाए गए शवों को निकालकर गांव से बाहर दफनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐसा करना संविधान के आर्टिकल 21 के तहत ईसाई आदिवासियों के मौलिक अधिकार का हनन है।

वकील ने अदालत को बताई घटनाएं

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने कोर्ट को इन घटनाओं की जानकारी दी और बताया कि एक याचिकाकर्ता की मां का शव उनकी जानकारी के बिना कब्र से निकालकर कहीं और दफना दिया गया था। वहीं एक अन्य मामले की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि एक महिला जो कि याचिकाकर्ता भी है, उसके पति का शव भी बहुसंख्यक समुदाय के ग्रामीणों द्वारा जबरदस्ती कब्र से निकालकर दूर किसी जगह पर दफना दिया गया था।

अनुच्छेद 14 और 21 का बताया उल्लंघन

याचिका में कहा गया है कि, ‘शवों को खोदकर बाहर निकालना और कभी-कभी उन्हें 50 किलोमीटर से भी अधिक दूर दोबारा दफनाने के लिए मजबूर करना, मृतक और उनके परिवारों के साथ क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक बर्ताव है, जो आर्टिकल 14 और 21 के तहत गलत है।’

सुनवाई के बाद बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया, और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक दफन किए गए किसी भी शव को बाहर नहीं निकाला जाएगा। साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।

दखल देने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग

याचिका में बताया गया है कि यह रिट याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है और उन आदिवासी ईसाइयों के बारे में है, जिन्हें अपने गांवों की सीमाओं के अंदर कब्रगाहों में अपने मृतकों को दफनाने से जबरन रोका जा रहा है।' इसमें दफनाने में दखल देने से रोकने के लिए राज्य सरकार और लोगों को निर्देश देने की मांग की गई थी।

'पुलिस कर रही SC के फैसले का गलत इस्तेमाल'

याचिका में जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट के दिए एक फैसले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस इस फैसले का गलत इस्तेमाल करते हुए आदिवासी ईसाईयों को अपने गांवों में शव दफनाने से रोक रही है, यहां तक कि उन जगहों पर भी जहां कोई स्थानीय विवाद नहीं है। याचिका में जिस फैसले के बारे में बताया गया है, उसमें सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के एक मुर्दाघर में रखे एक पादरी को दफनाने पर बंटा हुआ फैसला सुनाया था, और उसका अंतिम संस्कार पास के गांव में ईसाइयों को दफनाने के लिए बनी जगह पर करने का निर्देश दिया था।

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याचिका में इस बात का आदेश देने की मांग की गई है कि नागरिकों को चाहे उनकी जाति, धर्म या SC/ST/OBC स्टेटस कुछ भी हो, उन्हें अपने रिश्तेदारों के शवों को उसी गांव में दफनाने की इजाज़त मिले जहां पर वे रहते हैं। याचिका में कहा गया है कि गांव के सार्वजनिक कब्रिस्तान में दफनाने से मना करना, संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत याचिकाकर्ताओं के धर्म की आजादी के अधिकार का उल्लंघन है।

याचिका में राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को हर गांव में सभी समुदायों के लोगों को दफनाने के लिए खास जगहें तय करने और सभी परिवारों को अपने मृतकों को उसी गांव में दफनाने की इजाजत देने का निर्देश देने की मांग की गई है जहां वे रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है वह राज्य को यह निर्देश दे कि वह एक गांव में सभी कम्युनिटी के लिए जितना हो सके कॉमन कब्रिस्तान बनाकर धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे को बढ़ावा दे।

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