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छत्तीसगढ़ में सीनियर लीडर विकास समेत 15 माओवादियों ने किया सरेंडर, भारी हथियार बरामद

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य के महासमुंद जिले में माओवादियों के बालांगीर-बरगढ़-महासमुंद डिवीजन से जुड़े 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया।

Sun, 1 March 2026 04:55 PMRatan Gupta महासमुंद, पीटीआई
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छत्तीसगढ़ में सीनियर लीडर विकास समेत 15 माओवादियों ने किया सरेंडर, भारी हथियार बरामद

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य के महासमुंद जिले में माओवादियों के बालांगीर-बरगढ़-महासमुंद डिवीजन से जुड़े 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वालों में स्पेशल जोनल कमेटी स्तर का सदस्य ‘विकास’ भी शामिल है, जो संगठन के वेस्ट सब-जोनल विंग का सचिव था।

सरेंडर पर क्या बोले उपमुख्यमंत्री

उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने रविवार को रायपुर में पत्रकारों को बताया कि यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा, “आज का पुनर्वास बेहद अहम है। इस डिवीजन में केवल 15 सदस्य बचे थे और अब सभी ने हथियार डाल दिए हैं।”

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सरेंडर करने वालों में कौन

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में 6 पुरुष और 9 महिलाएं शामिल हैं। ये सभी छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय थे। सुरक्षाबलों को इनके पास से तीन एके-47 राइफल, दो एसएलआर, दो इंसास राइफल और तीन .303 राइफल समेत भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं।

2 सालों में 532 माओवादी ढेर

सूत्रों के मुताबिक, इस समूह ने औपचारिक सरेंडर से पहले बुधवार रात सुरक्षा बलों से संपर्क स्थापित किया था। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में बीते दो वर्षों में 532 माओवादी मारे गए। 2700 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया और करीब 2000 को गिरफ्तार किया गया है।

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31 मार्च तक माओवादियों का करना है सफाया

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद को 31 मार्च तक पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया है। ऐसे में वरिष्ठ कैडर स्तर के नेता का आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार चल रहे ऑपरेशन और पुनर्वास नीति के कारण माओवादी संगठन कमजोर पड़ रहा है और कैडर मुख्यधारा में लौटने को तैयार हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा क्षेत्र लंबे समय से माओवादियों का गढ़ रहा है। ऐसे में पूरे डिवीजन के एक साथ सरेंडर से इलाके में शांति और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

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