5 बार फेल होकर भी नहीं मानी हार, किसान के बेटे विकास ने आखिरी कोशिश में किया कमाल; हासिल की AIR 27
UPSC success story Vikas Kundu: हरियाणा के गिल्लू खेड़ा के एक साधारण किसान के बेटे विकास ने पांच नाकामियों के बाद अपने छठे प्रयास में यूपीएससी 2025 में 27वीं रैंक हासिल कर कमाल कर दिया है।

UPSC success story Vikas Kundu: जिंदगी कभी-कभी ऐसे इम्तिहान लेती है कि इंसान अंदर से टूट जाता है। आप एक बार फेल होते हैं, दुख होता है। दूसरी बार गिरते हैं, तो निराशा घेरने लगती है। लेकिन जरा सोचिए उस शख्स के बारे में जिसने देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में एक-दो बार नहीं बल्कि पूरे पांच बार नाकामी का स्वाद चखा हो। आम इंसान शायद हार मानकर कोई और रास्ता चुन लेता लेकिन हरियाणा के जींद जिले के एक छोटे से गांव गिल्लू खेड़ा के रहने वाले विकास किसी और ही मिट्टी के बने थे। उनके इरादे बुलंद थे। विकास ने अपने छठे प्रयास में यूपीएससी 2025 की परीक्षा में ऑल इंडिया 27वीं रैंक (AIR 27) हासिल की है। इतनी नाकामियों के बाद विकास ने कैसे किया यह कमाल... आइए जानते हैं।
शुरुआत से ही नहीं था बड़ा सपना
विकास का गांव गिल्लू खेड़ा एक ऐसा गांव था जहां जिंदगी सुबह खेतों की पगडंडियों से शुरू होती है और शाम को चौपालों पर सिमट जाती है। ऐसे माहौल में सिविल सर्विस का सपना देखना भी किसी अजूबे से कम नहीं है। विकास के पिता एक साधारण किसान हैं। घर में किसी के पास कोई बड़ी डिग्रियां नहीं थीं और ना ही कोई ऐसा था जो यूपीएससी के इस पेचीदा चक्रव्यूह को भेदने के गुर सिखा सके। डीएवी पब्लिक स्कूल जींद से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद विकास आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए। दिलचस्प बात ये है कि आईएएस बनने का कीड़ा उनके दिमाग में बचपन से नहीं था। ये ख्याल कॉलेज के दिनों में धीरे-धीरे उनके जहन में पनपा। माता-पिता भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों को सींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका यही खामोश सपोर्ट विकास के सफर की सबसे मजबूत नींव बन गया।
5 प्रयासों में मिली असफलता
दिल्ली आने के बाद पढ़ाई तो शुरू हो गई, लेकिन यूपीएससी का सफर इतना आसान कहां होता है! विकास के पहले दो प्रयास तो ऐसे गुज़रे कि वो प्रीलिम्स (Prelims) का दरवाज़ा तक नहीं खटखटा पाए। जब आप लगातार दो बार शुरुआती चरण में ही बाहर हो जाएं, तो खुद पर शक होना लाज़मी है। मन में सवाल उठने लगते हैं कि क्या मैं वाकई इस काबिल हूं? लेकिन विकास के लिए 2021 का साल एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने अपनी हार पर रोने के बजाय अपनी कमियों को खोजना शुरू किया। उन्होंने महसूस किया कि सिर्फ किताबें रट लेने से यूपीएससी क्लियर नहीं होता, बल्कि रणनीति बदलनी पड़ती है।
छठे प्रयास के लिए की खामोश तैयारी
चार बार फेल होने के बाद जब पांचवां प्रयास भी हाथ से निकल गया, तो अच्छे-अच्छों के हौसले पस्त हो जाते हैं। लेकिन विकास का एक सीधा सा उसूल था- "जब तनाव बढ़ता है, तो मेरा लक्ष्य और भी ऊंचा हो जाता है।" अपनी पुरानी गलतियों से सीखते हुए उन्होंने टेस्ट सीरीज और खुद के मूल्यांकन पर जोर दिया। जहां जो तरीका काम नहीं कर रहा था विकास ने उसे बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत बदल दिया। लेकिन इस कहानी का सबसे रोमांचक मोड़ उनका छठा और आखिरी प्रयास था। आपको जानकर हैरानी होगी कि विकास ने अपने परिवार वालों को भनक तक नहीं लगने दी कि वो फिर से परीक्षा दे रहे हैं। उन्होंने घर पर यही कहा था कि वो अगले साल फिर से कोशिश करेंगे। ऐसा उन्होंने शायद इसलिए किया ताकि परिवार की उम्मीदों का एक्स्ट्रा प्रेशर उन पर हावी न हो। वो बस खामोशी से अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते रहे। उनका मानना है कि "मूल रूप से बात सिर्फ इतनी सी है कि आप असल में चाहते क्या हैं। मुझे ये चाहिए था इसलिए मैंने इसके लिए जी-तोड़ मेहनत की।"
आखिरकार मिल ही गई मंजिल
और फिर वो ऐतिहासिक दिन आया जब यूपीएससी 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ। लिस्ट में 27वें नंबर पर विकास का नाम चमक रहा था। जब ये खबर गिल्लू खेड़ा पहुंची, तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ। माता-पिता की आंखों में खुशी के वो आंसू थे जो कई सालों की तपस्या के बाद छलकते हैं। जिस बेटे को वो अगले साल के लिए तैयार समझ रहे थे वो तो बिना बताए देश के टॉप 30 अफसरों में अपनी जगह पक्की कर चुका था।




साइन इन