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21 साल की उम्र, पहला प्रयास और 61वीं रैंक; बिना कोचिंग आस्था ने कैसे फोड़ा UPSC एग्जाम

aastha singh upsc success story : आस्था सिंह ने महज 21 साल की उम्र में बिना किसी कोचिंग के अपने पहले प्रयास में यूपीएससी 2024 की परीक्षा पास करके ऑल इंडिया 61वीं रैंक हासिल की है।

Sun, 19 April 2026 08:29 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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21 साल की उम्र, पहला प्रयास और 61वीं रैंक; बिना कोचिंग आस्था ने कैसे फोड़ा UPSC एग्जाम

aastha singh upsc success story : हर साल लाखों नौजवान अपनी आंखों में एक बड़ा सा ख्वाब लेकर दिल्ली के मुखर्जी नगर, करोल बाग या राजेंद्र नगर पहुंचते हैं। वो ख्वाब है देश का सबसे प्रतिष्ठित अफसर यानी आईएएस (IAS) बनने का रहता है। भारी-भरकम फीस, किराए के छोटे-छोटे कमरे और दिन-रात किताबों के अंबार में सिर खपाने के बावजूद कई बार मंजिल दूर ही रह जाती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी लड़की का किस्सा सुनाने जा रहे हैं, जिसने इस पूरी रवायत को ही पलट कर रख दिया है। उनका नाम है आस्था सिंह। उम्र महज 21 साल। और कारनामा ऐसा कि बड़े-बड़े धुरंधर भी दांतों तले उंगलियां दबा लें। आस्था ने बिना किसी महंगे कोचिंग सेंटर के चक्कर काटे, अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी (UPSC) 2024 की परीक्षा में ऑल इंडिया 61वीं रैंक हासिल कर ली है। आस्था ने कैसे हासिल किया ये मुकाम? आइए जानते हैं...

दिल्ली के शोर से किया किनारा

अमूमन होता ये है कि जैसे ही कोई छात्र यूपीएससी की तैयारी का मन बनाता है, उसका पहला कदम दिल्ली की तरफ ही उठता है। आस्था ने भी दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से साल 2023 में इकोनॉमिक्स ऑनर्स से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था। वो चाहतीं तो वहीं दिल्ली में रुककर किसी भी नामी कोचिंग संस्थान में लाखों की फीस देकर दाखिला ले सकती थीं। मगर उन्होंने कुछ और ही तय कर रखा था। उन्होंने उस अंधी दौड़ का हिस्सा बनने से साफ इंकार कर दिया। अपनी डिग्री पूरी करने के बाद वो सीधा अपने घर पंचकूला (हरियाणा) लौट आईं।

मूल रूप से उनका पैतृक गांव वैसे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले (डोभी तहसील) में है, लेकिन उनकी परवरिश पंचकूला में ही हुई है। उनके पिता बृजेश सिंह एक फार्मा कंपनी में क्वालिटी हेड के पद पर काम करते हैं। परिवार के सपोर्ट और घर के शांत माहौल में आस्था ने बिना किसी दबाव के अपनी रणनीति खुद तैयार की।

कम किताबों का किया ज्यादा रिवीजन

यूपीएससी की तैयारी को लेकर आस्था का फलसफा बेहद सीधा और एकदम साफ था। एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने बिना कोचिंग के ये मुकाम इतनी कम उम्र में कैसे हासिल कर लिया, तो उनका जवाब बेहद सुलझा हुआ था। उन्होंने कहा, "सबसे जरूरी था खुद के साथ बैठना और शांति से ये समझना कि मेरी असली ताकत क्या है।"

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आस्था ने अपनी स्टडी टेबल पर किताबों का फालतू ढेर नहीं लगाया। इसके बजाय, चुनिंदा और जरूरी किताबों पर ही अपना पूरा फोकस रखा। शुरुआत में 8 से 10 घंटे की पढ़ाई, पिछले सालों के प्रश्न पत्रों का गहरा एनालिसिस और बार-बार एक ही चीज का रिवीजन... यही उनका अचूक मूल मंत्र था। आस्था को इस बात का पूरा भरोसा था कि अगर सही दिशा में ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो महंगे कोचिंग सेंटर्स की कोई खास जरूरत नहीं है। उन्होंने सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा और एक पक्के टाइम-टेबल के साथ उसे वक्त पर खत्म किया। तैयारी के दौरान होने वाले फोमो से भी उन्होंने खुद को कोसों दूर रखा।

HPSC में भी गाड़ चुकी हैं कामयाबी के झंडे

शायद आपको जानकर हैरानी हो कि यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट आने से पहले ही आस्था अपनी काबिलियत का लोहा दुनिया को मनवा चुकी थीं। साल 2024 में ही उन्होंने हरियाणा सिविल सर्विस (HPSC) की कठिन परीक्षा भी पास कर ली थी। वहां उन्हें 31वीं रैंक हासिल हुई थी और वो फिलहाल हरियाणा सरकार में 'एडिशनल एक्साइज और टैक्सेशन ऑफिसर' (AETO) के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।

सबसे दिलचस्प बात ये है कि जब वो यूपीएससी की मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रही थीं, तब उनकी नौकरी की ट्रेनिंग भी चल रही थी। एक तरफ ट्रेनिंग की थकान और दूसरी तरफ देश की सबसे कठिन परीक्षा का पहाड़ जैसा सिलेबस। मगर आस्था ने हार नहीं मानी। थका देने वाले रूटीन के बावजूद वो अपनी पढ़ाई के लिए 5 से 6 घंटे का वक्त रोज निकाल ही लेती थीं। मतलब साफ है, उनकी कामयाबी कोई इत्तेफाक या तुक्का नहीं थी, बल्कि उनके लोहे जैसे अनुशासन का ही नतीजा थी।

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