UPSC Success Story: रोज 9-12 घंटे की पढ़ाई, सेल्फ स्टडी, तीसरे अटेंम्प्ट में UPSC किया फतह
upsc success story: तीन साल तक दिल्ली में रहकर कठिन तैयारी, दो बार असफलता और तीसरे प्रयास में मिली शानदार सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मुकाम दूर नहीं होता है।

जब यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट आया था, तब मध्य प्रदेश के सतना जिले में खुशी का माहौल था। क्योंकि यहां की रहने वाली भूमिका जैन ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 331 हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार और पूरे रिश्तेदारी में पहली बार यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पास करने का गौरव प्राप्त किया। हालांकि भूमिका जैन के लिए यह सफर आसान नहीं था। बल्किन यह उनकी कड़ी मेहनत, निरंतर प्रयास और मजबूत संकल्प का परिणाम है।
दिल्ली में रहकर की तैयारी
तीन साल तक दिल्ली में रहकर कठिन तैयारी, दो बार असफलता और तीसरे प्रयास में मिली शानदार सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मुकाम दूर नहीं होता है। भूमिका जैन शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सतना से पूरी की और 12वीं की आईएससी परीक्षा में जिला टॉपर बनीं।
गोल्ड मेडलिस्ट
इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीए की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने लगातार तीन वर्षों तक गोल्ड मेडल हासिल किए।
पिता का है कपड़ों का व्यापार
भूमिका के पिता कपड़ों का व्यवसाय करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार ने हमेशा उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
कोविड से मिली प्रेरणा
यूपीएससी की तैयारी करने का विचार उन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान आया। उस समय उन्होंने देखा कि किस तरह प्रशासनिक अधिकारी लोगों की मदद कर रहे थे और नीतियों को जमीन पर लागू कर रहे थे। इससे उन्हें महसूस हुआ कि सिविल सेवा के माध्यम से समाज और देश के लिए सार्थक योगदान दिया जा सकता है। यही सोच उन्हें इस क्षेत्र की ओर ले गई।
हालांकि उनका सफर आसान नहीं रहा। पहले दो प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) भी पास नहीं कर सकीं। दोनों बार वह बहुत कम अंतर से कटऑफ से पीछे रह गईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। असफलताओं से सीख लेकर उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और तैयारी की रणनीति में सुधार किया। यही अनुभव उनके तीसरे प्रयास में सफलता की मजबूत नींव बना।
सेल्फ स्टडी से की तैयारी
भूमिका ने केवल पहले प्रयास में बेस मजबूत करने के लिए कोचिंग का सहारा लिया था। इसके बाद उन्होंने कोचिंग छोड़ दी और पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया। उनका मानना है कि अगर रणनीति सही हो और पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे तो घर बैठकर भी यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी की जा सकती है।
रोज 9 से 12 घंटे पढ़ाई और छोटे-छोटे टारगेट
भूमिका रोजाना औसतन 9 घंटे पढ़ाई करती थीं, जो परीक्षा के करीब आने पर 12 घंटे तक पहुंच जाती थी। सुबह जल्दी उठकर वह पहले पिछले दिन पढ़े हुए विषयों का रिवीजन करती थीं। इसके बाद पूरे दिन को छोटे-छोटे टारगेट्स में बांटकर पढ़ाई करती थीं। उनकी तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करना था।
पढ़ाई के अलावा भूमिका को कविता पढ़ना और लिखना, कहानियां पढ़ना और अखबारों का अध्ययन करना पसंद है। वह मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रही हैं और एक मेंटल हेल्थ वॉलंटियर के रूप में काम कर चुकी हैं।
सोशल मीडिया का किया इस्तेमाल
अक्सर सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी सोशल मीडिया से दूरी बना लेते हैं, लेकिन भूमिका ने इसका स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल किया। वह टेलीग्राम ग्रुप्स से जुड़ी रहीं, जहां से उन्हें करंट अफेयर्स और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों की जानकारी मिलती थी। इससे उन्हें अपनी तैयारी को अपडेट रखने में मदद मिली।




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