UPSC Success Story: पिता के गुजर जाने के बाद मां ने बेटी का बचाया सपना, बिना कोचिंग दूसरे अटेंम्प्ट में बनीं UPSC टॉपर
यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जब भी आता है, तो उसमें से कई सफल उम्मीदवारों की कहानी काफी प्रेरणा दायक होती है। इन्हीं में एक कहानी है बिहार की एक जाबांज लड़की की, जिसका नाम गरिमा लोहिया है।

यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जब भी आता है, तो उसमें से कई सफल उम्मीदवारों की कहानी काफी प्रेरणा दायक होती है। इन्हीं में एक कहानी है बिहार की एक जाबांज लड़की की, जिसका नाम गरिमा लोहिया है। उसके सिर से पिता का साया 8 साल पहले उठ गया था, लेकिन उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी। मां के सपनों को साकार करने के लिए उसने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा दी और न केवल यह परीक्षा पास की, बल्कि पूरे देश में दूसरी रैंक भी हासिल की। चलिए इनके संघर्ष की कहानी जानते हैं।
पढ़ाई-लिखाई
गरिमा लोहिया बिहार के बक्सर की रहने वाली है। पढ़ाई के लिए उसने बक्सर से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक सफर तय किया। स्कूलिंग बक्सर के वुट स्टॉक स्कूल से हुई। बाद में सनबीम भगवानपुर से 12वीं क्लास पास की। इसके बाद हायर एजुकेशन के लिए दिल्ली आ गईं। उन्होंने डीयू के किरोडीमल कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
पिता का सपना था बेटी IAS बने
गरिमा लोहिया के पिता बक्सर जिले में कपड़ों के थोक व्यापारी थे। उनका सपना था कि बेटी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करके एक आईएएस अधिकारी बने। बेटी ने पिता का सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की। लेकिन जब वे आईएएस बनीं तब वो सपना पूरा होता देखने के लिए पिता नहीं थे। दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी।
मां ने टूटने से बचाया सपना
पिता के अचानक निधन से परिवार को बड़ा झटका लगा था। उस कठिन समय में पूरा परिवार परेशान था, लेकिन गरिमा की मां ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने खुद को संभालने के साथ-साथ बच्चों का भी मनोबल बढ़ाया। पिता के जाने के बाद गरिमा का आईएएस बनने का सपना अधूरा रह सकता था, लेकिन उनकी मां ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। तैयारी के दौरान मां ने गरिमा का हर कदम पर साथ दिया। वह उनकी पढ़ाई, खान-पान और अन्य जरूरतों का पूरा ध्यान रखती थीं। कई बार जब गरिमा देर रात तक पढ़ाई करती थीं, तब उनकी मां भी उनके साथ जागती रहती थीं। मां के इसी सहयोग और प्रोत्साहन ने गरिमा को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की।
बिना कोचिंग घर पर की पढ़ाई
जब सभी दरवाजे बंद हो रहे थे तब ऑनलाइन माध्यमों ने आगे की तैयारी के नए रास्ते खोल दिए। ऑनलाइन एजुकेशन ने शिक्षा व्यवस्था को बचाने की काम किया। गरिमा ने बिना कोचिंग घर पर यूट्यूब और बाकी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए यूपीएससी एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि स्टडी मटेरियल की कमी थी।
दूसरे अटेंप्ट में बनीं UPSC Topper
पहले प्रयास में गरिमा असफल रहीं। लेकिन गरिमा ने अपनी रणनीति बदली और पढ़ाई के घंटे बढ़ा दिए. उन्होंने हर दिन लगभग 12 घंटे पढ़ाई करना शुरू किया। वे रात 9 बजे से सुबह 9 बजे तक पढ़ाई करती थीं। 2022 में जब उन्होंने दूसरी बार यूपीएससी की परीक्षा दी, तो उन्होंने पूरे देश में दूसरी रैंक हासिल की और आईएएस बन गईं।
उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर मां हौसला नहीं बढ़ाती तो यह कभी मुमकिन नहीं होता। गरिमा की जर्नी हौसले, दृढ़ निश्चय और मां के साथ की कहानी है।




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