upsc success story irfan ahmad lone overcame blindness and secured air 957 jammu kashmir UPSC Success Story: 8 साल की उम्र में खोई दोनों आंखें, झेलीं 18 सर्जरियां; 30 में UPSC किया क्रैक, Career Hindi News - Hindustan
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UPSC Success Story: 8 साल की उम्र में खोई दोनों आंखें, झेलीं 18 सर्जरियां; 30 में UPSC किया क्रैक

इरफान ने महज 8 साल की उम्र में अपनी दोनों आंखों की रोशनी खो दी थी और बचपन में 18 सर्जरियों का दर्द भी झेला। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा और 30 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास कर ऑल इंडिया रैंक 957 हासिल की।

Thu, 11 June 2026 11:14 AMDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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UPSC Success Story: 8 साल की उम्र में खोई दोनों आंखें, झेलीं 18 सर्जरियां; 30 में UPSC किया क्रैक

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस-आईपीएस बनने का सपना लाखों युवा देखते हैं। इस सपने को पूरा करने के लिए वे वर्षों तक कड़ी मेहनत और संघर्ष करते हैं। हर साल जब यूपीएससी का अंतिम परिणाम आता है, तो उसमें कुछ ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो लोगों को प्रेरित करने के साथ-साथ जीवन की चुनौतियों से लड़ने का हौसला भी देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है जम्मू-कश्मीर के इरफान अहमद लोन की।

हासिल की ऑल इंडिया रैंक 957

इरफान ने महज 8 साल की उम्र में अपनी दोनों आंखों की रोशनी खो दी थी और बचपन में 18 सर्जरियों का दर्द भी झेला। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। तमाम कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा और 30 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास कर ऑल इंडिया रैंक 957 हासिल की। उनकी सफलता आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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एक्सीडेंट में खो दीं इरफान की आखें

बचपन में ही स्कूल के दौरान एक दुर्घटना में इरफान ने अपनी दोनों आंखें खो दी थी। लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी दिव्यांगता को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। इरफान उत्तर कश्मीर के नैदखाई क्षेत्र के मंजपोरा के रहने वाले हैं। जब इरफान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 957 हासिल की, तब उनकी इस सफलता से पूरे बांदीपोरा जिले में खुशी और गर्व का माहौल छा गया था।

पिता हैं मजदूर

इरफान के पिता बशीर अहमद सिंचाई विभाग में एक दिहाड़ी मजदूर हैं। बशीर अहमद बताते हैं कि इरफान बचपन में बिल्कुल स्वस्थ पैदा हुए थे। उनकी आंखों में कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन जब वह महज चार साल के थे, तब पड़ोस के एक बच्चे ने गलती से उनकी दाहिनी आंख में एक सिरिंज (Syringe) घुसा दी। इस हादसे ने उनकी एक आंख को बुरी तरह डैमेज कर दिया। हालांकि तब तक दूसरी आंख सलामत थी। लेकिन जब उनका दाखिला स्कूल में हआ, तो किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। स्कूल में एक दिन एक दूसरे छात्र ने इरफान को धक्का दे दिया और एक पेंसिल सीधे उनकी दूसरी सही आंख में जा घुसी।

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18 सर्जरी से गुजरना पड़ा

इस दूसरे हादसे ने परिवार को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया। इलाज के लिए उनके पिता दिल्ली एम्स में पहुंचे। 14 महीने तक दिल्ली के एम्स में इस उम्मीद से रहे कि शायद बेटे की आंखों की रोशनी वापस आ जाए। इसके बाद कई वर्षों तक इरफान का इलाज चलता रहा और उन्हें करीब 18 सर्जरियों से गुजरना पड़ा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

इरफान की पढ़ाई-लिखाई

इरफान लोन ने अपनी स्कूली शिक्षा देहरादून स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद विजुअल डिसएबिलिटीज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रवेश लिया, जहां से उन्होंने राजनीति विज्ञान (पॉलिटिकल साइंस) में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

नौकरी के साथ तैयारी

इरफान ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) परीक्षा भी पास की थी। इतना ही नहीं यूपीएससी सीएसई 2025 के समय वह भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में सहायक प्रशासनिक अधिकारी (Assistant Administrative Officer) के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन इरफान की मंजिल सिविल सर्विसेज थी। उन्होंने नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी जारी रखी।

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तीसरे अटेंम्प्ट में क्लियर की यूपीएससी

इरफान अपने पहले प्रयास में ही प्रीलिम्स (Prelims) परीक्षा पास कर ली, लेकिन आगे नहीं बढ़ सके। पनी गलतियों से सीखते हुए दूसरे प्रयास में उन्होंने मेन्स (Mains) परीक्षा भी पास कर ली, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना पाए। आखिरकार तीसरे प्रयास में इरफान ने हर बाधा को पार करते हुए मेरिट लिस्ट में अपनी जगह पक्की कर ली और अपना व अपने परिवार का सपना सच कर दिया।

इरफान के मित्रों, परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों का कहना है कि यह सफलता उनकी वर्षों की मेहनत, लगन, धैर्य और अथक संघर्ष का परिणाम है।

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