23 साल चितवन जैन ने UPSC 2025 में किया नाम, हासिल की 17वीं रैंक; बनेंगे IAS
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजे घोषित हो गए हैं। मध्य प्रदेश के अशोकनगर के 23 वर्षीय चितवन जैन ने अपने तीसरे प्रयास में 17वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया। पढ़ें उनकी सफलता की पूरी कहानी।

सफलता की कोई एक तय उम्र नहीं होती, लेकिन जब महज 23 साल की उम्र में कोई नौजवान देश के सबसे कड़े इम्तिहान को पास कर ले, तो वह कहानी हर किसी के लिए एक मिसाल बन जाती है। हर साल लाखों नौजवान अपनी आंखों में कलेक्टर बनने का सपना सजाते हैं, लेकिन यह मुकाम हासिल करने का सौभाग्य चंद लोगों को ही नसीब होता है। यूपीएससी (UPSC) यानी संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। जैसे ही नतीजों का ऐलान हुआ, देश के अलग अलग हिस्सों में खुशी और जश्न का माहौल छा गया। इसी जश्न के बीच मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर अशोकनगर से एक बेहद ही शानदार और प्रेरणा देने वाली खबर सामने आई है। यहां के रहने वाले 23 साल के चितवन जैन ने यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया 17वीं रैंक हासिल कर आईएएस (IAS) अफसर बनने का अपना और अपने परिवार का ख्वाब पूरा कर लिया है। यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि चितवन ने यह मुकाम अपने तीसरे प्रयास में हासिल किया है, जो उनकी कभी न हार मानने वाली जिद को सलाम करता है।
एक फोन कॉल और घर में छा गई दिवाली जैसी खुशी
जैसे ही यूपीएससी का रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड हुआ और चितवन ने पीडीएफ लिस्ट में अपना नाम देखा, उन्होंने बिना वक्त गंवाए खुद अपने परिवार वालों को फोन मिलाया। फोन पर जब उन्होंने बताया कि उनका सेलेक्शन हो गया है और उन्हें 17वीं रैंक मिली है, तो घर वालों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। एक पल के लिए तो ऐसा लगा जैसे घर में वक्त से पहले ही दिवाली आ गई हो। इस शानदार कामयाबी की खबर मिलते ही सोनी कॉलोनी स्थित चितवन के घर पर बधाइयां देने वालों का तांता लग गया। परिवार के लोगों ने एक दूसरे का मुंह मीठा कराया और जमकर जश्न मनाया। हर कोई इस होनहार बेटे की तारीफ करता नहीं थक रहा है और पूरे शहर में बस इसी बात के चर्चे हैं।
कैसी रही तैयारी और क्या था चितवन का सीक्रेट प्लान?
जब भी कोई यूपीएससी क्रैक करता है, तो हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर उसने पढ़ाई कैसे की होगी। चितवन जैन ने अपनी इस शानदार कामयाबी के बाद अपना तजुर्बा साझा किया। उन्होंने बताया कि यह उनका तीसरा अटेंप्ट था। उनकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र था कि दिमाग पर गैर जरूरी दबाव (Unnecessary Pressure) न डालना। अक्सर यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र पढ़ाई के बोझ तले दब जाते हैं, खुद को कमरों में कैद कर लेते हैं, लेकिन चितवन का नजरिया एकदम अलग था। उन्होंने हर दिन जरूरत के हिसाब से पढ़ाई की। न तो उन्होंने किताबों का हौव्वा अपने ऊपर हावी होने दिया और न ही अपनी जिंदगी को बोझिल बनाया। उनका मानना है कि पढ़ाई के घंटों से ज्यादा अहम यह है कि आप पूरे फोकस के साथ पढ़ें। इसके साथ ही, चितवन ने अपनी इस जीत का पूरा श्रेय अपने परिवार को दिया है। उनके मुताबिक, अगर परिवार का पूरा सपोर्ट और हौसला न होता, तो इस मुश्किल सफर को तय करना लगभग नामुमकिन था।
अशोकनगर से लेकर दिल्ली तक का सफर
चितवन जैन की जड़ें अशोकनगर से ही जुड़ी हुई हैं। वे शहर की सोनी कॉलोनी के रहने वाले मशहूर व्यापारी मनीष जैन के बड़े बेटे हैं। उनका परिवार एक जॉइंट फैमिली (संयुक्त परिवार) है, जहां सभी लोग मिल जुलकर प्यार से रहते हैं। चितवन की शुरुआती पढ़ाई अशोकनगर से ही हुई। उन्होंने अपनी 10वीं तक की तालीम शहर के ही एक प्राइवेट स्कूल से पूरी की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने राजधानी भोपाल का रुख किया, जहां से उन्होंने 12वीं का इम्तिहान पास किया। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद चितवन ने देश की राजधानी दिल्ली की तरफ कदम बढ़ाया और वहां से बीकॉम (B.Com) में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। ग्रेजुएशन के फौरन बाद ही उन्होंने बिना वक्त बर्बाद किए अपने बचपन के सपने यानी यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी।
बचपन से ही था कलेक्टर बनने का जुनून
चितवन के पिता मनीष जैन ने अपने बेटे की कामयाबी पर फख्र जताते हुए बताया कि चितवन के दिल में बचपन से ही कलेक्टर बनने का एक जुनून सवार था। वह अक्सर इसी बारे में बात किया करता था। परिजनों की मानें तो चितवन ने अपनी ग्रेजुएशन के ठीक बाद अपना पहला अटेंप्ट बिना किसी खास तैयारी के दिया था, ताकि वह परीक्षा के पैटर्न और माहौल को असल में समझ सके। इसके बाद उसने अपनी कमर कसी और लगातार दो साल तक दिन रात एक कर दिया। इस दौरान, उसने एक साल तक दिल्ली में रहकर ऑनलाइन क्लासेज के जरिए पढ़ाई की और फिर एक साल तक कोचिंग सेंटर में जाकर बारीकियां सीखीं। उसकी यही मेहनत और लगन आज रंग लाई है और उसने 17वीं रैंक लाकर न सिर्फ अशोकनगर का, बल्कि पूरे सूबे का नाम रोशन कर दिया है।




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