औरंगाबाद की बेटी ने लहराया परचम, मोनिका श्रीवास्तव ने UPSC 2025 में हासिल की 16वीं रैंक; बनेंगी IAS
औरंगाबाद की होनहार बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने अपनी कड़ी मेहनत और कभी हार न मानने वाली जिद से यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया 16वां रैंक हासिल कर पूरे बिहार का मान बढ़ाया है।

कहा जाता है कि अगर इंसान के हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने की सच्ची लगन हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। बिहार के छोटे से शहरों और कस्बों से निकलकर जब कोई युवा कामयाबी के आसमान में अपनी उड़ान भरता है, तो वह सिर्फ अपना या अपने परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सूबे का सिर फख्र से ऊंचा कर देता है। औरंगाबाद की एक ऐसी ही होनहार और होनहार बेटी, मोनिका श्रीवास्तव ने अपनी असाधारण प्रतिभा और अटूट मेहनत के दम पर एक ऐसी ही ऐतिहासिक मिसाल कायम की है। देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में मोनिका ने पूरे भारत में 16वां स्थान (All India Rank 16) हासिल किया है। उनकी इस शानदार सफलता से औरंगाबाद जिले के साथ-साथ पूरे बिहार राज्य में जश्न का माहौल है।
परिवार का मिला भरपूर साथ
सफलता की यह कहानी औरंगाबाद जिला मुख्यालय के सत्येन्द्र नगर से शुरू होती है। मोनिका श्रीवास्तव, जिला परिषद में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत ई. बी. के. श्रीवास्तव और उनकी पत्नी भारती श्रीवास्तव की सुपुत्री हैं। उनके मामा कमल किशोर और श्रीराम अम्बष्ट भी अपनी भांजी की इस अभूतपूर्व सफलता पर फूले नहीं समा रहे हैं। एक मध्यमवर्गीय और शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखने वाली मोनिका को बचपन से ही घर में पढ़ाई-लिखाई का एक बेहतरीन और सकारात्मक माहौल मिला। माता-पिता ने हमेशा अपनी बेटी के सपनों को पंख देने का काम किया और हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया, जिसका परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।
मजबूत बुनियाद और शानदार शुरुआती शिक्षा
किसी भी बड़ी इमारत की मजबूती उसकी बुनियाद पर निर्भर करती है। मोनिका की सफलता में भी उनकी शुरुआती शिक्षा का बहुत बड़ा हाथ रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई औरंगाबाद के ही सरस्वती शिशु मंदिर और डीएवी पब्लिक स्कूल से पूरी की। अक्सर लोगों को लगता है कि बड़े शहरों के महंगे स्कूलों में पढ़कर ही बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन मोनिका ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहने वाली मोनिका ने स्कूल के दिनों से ही यह साबित कर दिया था कि वह आने वाले समय में कुछ बहुत बड़ा करने वाली हैं।
IIT से लेकर सिविल सेवा तक का सफर
मोनिका का सफर सिर्फ यूपीएससी तक सीमित नहीं है; उनकी पूरी शैक्षणिक यात्रा ही प्रेरणा से भरी हुई है। स्कूल के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की राह चुनी और देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक, आईआईटी (IIT) एंट्रेंस एग्जाम में सफलता का झंडा गाड़ते हुए 'बिहार टॉपर' बनने का गौरव हासिल किया। लेकिन उनका असली सपना तो समाज और देश की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव लाना था।
इसी सपने का पीछा करते हुए साल 2022 में उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा दी और उसमें छठा (6th) स्थान प्राप्त कर प्रशासनिक सेवा में कदम रखा। कोई भी आम इंसान इतने बड़े मुकाम पर पहुंचकर संतुष्ट हो जाता, लेकिन मोनिका की मंजिल तो अभी और आगे थी। उन्होंने अपनी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी। साल 2024 में अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने 455वां रैंक हासिल किया। इस रैंक के आधार पर उनका चयन भारतीय रेलवे सेवा (Indian Railway Service) में हुआ और वर्तमान में वह एक अंडर-ट्रेनिंग अधिकारी के रूप में अपना प्रशिक्षण ले रही हैं।
दूसरी बार में लगाई लंबी छलांग
रेलवे में अधिकारी बनने के बावजूद मोनिका के भीतर का आईएएस (IAS) बनने का सपना जगा रहा। ट्रेनिंग के साथ-साथ पढ़ाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन उन्होंने अपने समय का शानदार प्रबंधन किया और अपनी मेहनत में कोई कमी नहीं आने दी। इसी अथक परिश्रम का नतीजा है कि उन्होंने यूपीएससी में अपने दूसरे प्रयास में सीधे 16वां रैंक हासिल कर लिया।




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