आंखों में नहीं थी रोशनी, लेकिन विजन था क्लीयर; रवि राज ने UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, अब बनेंगे IAS
नवादा के महुली गांव के रहने वाले दृष्टिबाधित रवि राज ने अपनी तमाम शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए यूपीएससी परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल कर एक अद्भुत और प्रेरणादायक मिसाल कायम की है।

कहा जाता है कि अगर आपके इरादे लोहे जैसे मजबूत हों और दिल में कुछ कर गुजरने की सच्ची आग हो, तो रास्ते की कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती। हमारी जिंदगी में अक्सर छोटी-छोटी परेशानियां आती हैं और हम हार मानकर बैठ जाते हैं। लेकिन जरा सोचिए उस शख्स के बारे में जिसकी आंखों में दुनिया देखने की रोशनी तो नहीं थी, लेकिन उसके 'विजन' (दृष्टिकोण) में इतनी चमक थी कि उसने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहरा दिया। हम बात कर रहे हैं बिहार के नवादा जिले के रहने वाले दृष्टिबाधित (Visually Impaired) रवि राज की।
रवि राज ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया 20वीं रैंक हासिल कर एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जो न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के युवाओं और खासकर दिव्यांगों के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल बन गया है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में जान हो, तो इंसान अपनी तकदीर खुद लिख सकता है।
मां-बाप ने दिया पूरा साथ
रवि राज की इस शानदार कामयाबी के पीछे उनके परिवार का एक बहुत बड़ा संघर्ष और त्याग छिपा है। वह मूल रूप से नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के एक छोटे से गांव महुली के रहने वाले हैं। एक आम किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रवि के पिता रंजन कुमार सिन्हा खेती-किसानी करते हैं, जबकि उनकी मां विभा सिन्हा एक कुशल गृहिणी हैं।
भले ही रवि के पिता एक साधारण किसान हैं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों के बीच कभी पैसों या गांव की दूरियों को आड़े नहीं आने दिया। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और बेहतर भविष्य के लिए यह परिवार फिलहाल नवादा शहर के नवीन नगर मोहल्ले में एक किराए के मकान में रहता है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद रवि ने जब आईएएस (IAS) बनने का एक बड़ा सपना देखा, तो उनके माता-पिता ने उन्हें कमजोर महसूस कराने के बजाय उनके कंधों को और मजबूत किया। परिवार के इसी अटूट विश्वास और सपोर्ट ने रवि को हर मुश्किल से लड़ने की ताकत दी।
पांचवें प्रयास में मिली सबसे बड़ी कामयाबी
यूपीएससी का सफर कभी भी आसान नहीं होता। अच्छे-अच्छे मेधावी छात्र भी इस परीक्षा की गहराई नापते-नापते थक जाते हैं। रवि के लिए भी यह सफर आसान नहीं था। यह उनका यूपीएससी में पांचवां प्रयास था। जरा सोचिए, लगातार चार बार खुद को तैयार करना, परीक्षा देना, अपनी शारीरिक चुनौतियों का सामना करना और फिर से नई ऊर्जा के साथ उठ खड़े होना, यह अपने आप में एक बहुत बड़ी तपस्या है।
अपनी इसी जिद और मेहनत के दम पर उन्होंने सामान्य वर्ग (General Category) में 20वीं रैंक हासिल कर अपनी जगह पक्की की है। ऐसा नहीं है कि रवि को सफलता पहली बार मिली है। इससे ठीक पहले 2024 की यूपीएससी परीक्षा में भी उन्होंने अपना परचम लहराया था और 182वीं रैंक हासिल की थी।
पहले से ही हैं अफसर
रवि राज की मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे सफलता की सीढ़ियां लगातार चढ़ते रहे हैं। अपनी पिछली यूपीएससी सफलता (182वीं रैंक) के आधार पर उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ था। फिलहाल वह 9 दिसंबर से महाराष्ट्र के नागपुर में आईआरएस अधिकारी के तौर पर अपनी ट्रेनिंग ले रहे हैं। इसके अलावा, यूपीएससी की तैयारी के दौरान ही उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 69वीं परीक्षा भी पास की थी, जिसमें उनका चयन राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के पद पर हुआ था। लेकिन रवि को तो आसमान छूना था, उनका असली लक्ष्य आईएएस बनना था। नागपुर में ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार अपनी मंजिल को पा ही लिया।




साइन इन