एयरपोर्ट पर नौकरी करते हुए रांची के इश्तियाक ने UPSC में पाई 354वीं रैंक, 8 भाई बहनों में हैं सबसे छोटे
रांची के मो. इश्तियाक रहमान ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 354वीं रैंक लाकर शहर का मान बढ़ाया है। उन्हें यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली। वे वर्तमान में हैदराबाद एयरपोर्ट के इमीग्रेशन विभाग में कार्यरत हैं

रांची के डोरंडा में मणिटोला के फिरदौस नगर निवासी मो. इश्तियाक रहमान ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 354वीं रैंक लाकर शहर का मान बढ़ाया है। उन्हें यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली। वे वर्तमान में हैदराबाद एयरपोर्ट के इमीग्रेशन विभाग में कार्यरत हैं और नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी जारी रखी। अपनी सफलता के मंत्र साझा करते हुए इस्तियाक ने बताया कि सिविल सेवा हमेशा से उनके करियर का पहला विकल्प था। दूसरे प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन न होने पर उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में लक्ष्य हासिल कर लिया। उन्होंने नए अभ्यर्थियों को सलाह दी कि इस यात्रा को शुरू करने से पहले अपनी समय सीमा और आर्थिक स्थिति का सही आकलन कर लेना चाहिए, इसके बाद ही सिलेबस और विषयों की गहरी समझ पर काम करना चाहिए।
इस्तियाक की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार का अटूट सहयोग रहा है। आठ भाई-बहनों में सबसे छोटे इस्तियाक के पिता रफीक अंसारी का निधन वर्ष 2021 में हो गया था, जिसके बाद उनकी मां राब्या खातून और सभी नौकरीपेशा भाई-बहनों ने उन्हें निरंतर प्रेरित किया। इस्तियाक ने अपनी स्कूली शिक्षा लोयला कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की और मारवाड़ी कॉलेज से स्नातक (बीबीए) की डिग्री प्राप्त की।
एसीपी अपूर्वा बनीं आईएएस अफसर
एआईआर 42 हासिल करने वाली कक्षा 7 से 12वीं तक डीपीएस बोकारो के चेनाब हाउस की होनहार छात्रा रही अपूर्वा वर्मा वर्तमान में दिल्ली पुलिस में एसीपी (सहायक पुलिस आयुक्त) के पद पर कार्यरत हैं। सेवा में रहते हुए बेहतरी का प्रयास जारी रखा और तीसरे प्रयास में आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा कर ही लिया। बोकारो इस्पात संयंत्र के यातायात विभाग के सेवानिवृत्त कर्मी अजीत प्रसाद वर्मा और गृहिणी आभा वर्मा की पुत्री अपूर्वा शुरू से सिविल सर्विसेज में जाने की थी, जिसे पूरा करने में माता-पिता सहित पूरे परिवार का योगदान रहा। 2014 में डीपीएस बोकारो से निकलने के बाद उन्होंने एनआईटी मणिपुर से बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बना लिया था। उन्होंने तैयारी शुरू की और साल 2020 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। उनका नाम यूपीएससी की रिजर्व लिस्ट में शामिल हुआ था।




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