3 बार UPSC इंटरव्यू में फेल, असिस्टेंट कमांडेंट बनने के बाद क्रैक किया यूपीएससी, यूपी के सुयश को 94वीं रैंक
बाराबंकी के रहने वाले और कानपुर के दामाद सुयश द्विवेदी को यूपीएससी में 94वां स्थान मिला। वहीं कानपुर शहर के बेटे गौरव ओझा को 204वीं रैंक और अनूप कुमार गुप्ता को 716वीं रैंक मिली है।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का परिणाम शुक्रवार को जारी हुआ, जिसमें शहर की मेधाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कानपुर के दामाद सुयश द्विवेदी को जहां 94वां स्थान मिला, वहीं शहर के बेटे गौरव ओझा को 204वीं रैंक और अनूप कुमार गुप्ता को 716वीं रैंक मिली है। शहर के दामाद और बाराबंकी के बेटे असिस्टेंट कमांडेंट सुयश द्विवेदी ने खुद को अंतिम चांस दिया और आखिर वे आईएएस बन गए। सुयश ने यह सफलता अपने पांचवें प्रयास में हासिल की है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के आए परिणाम में सुयश की 94वीं रैंक आई है। सुयश असम में स्थित रिफाइनरी में तैनात सीआईएसएफ के सुरक्षा अधिकारी हैं। नवाबगंज निवासी व वीएसएसडी कॉलेज के प्रो. राकेश शुक्ला और अलका शुक्ला की बेटी अभिप्शा शुक्ला की शादी सुयश के साथ हुई है। अभिप्शा पीपीएन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनूप कुमार सिंह की देखरेख में पीएचडी कर रही है।
अभिप्शा ने बताया कि सुयश ने लखनऊ से बीटेक की पढ़ाई की है। यूपीएससी में तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचने के बावजूद सफलता न मिलने से सुयश दुखी थे। लेकिन, डेढ़ साल पहले असिस्टेंट कमांडेंड बनने से वे संतुष्ट हो गए। मगर परिवार के आग्रह पर खुद को अंतिम मौके के रूप में यूपीएससी की परीक्षा दी और आखिर सफलता मिल गई। सुयश ने बताया कि उनके बचपन का सपना पूरा हुआ है।
फ्रैक्चर का दर्द भूल झूमे पिता
यूपीएससी में 716 रैंक प्राप्त करने वाले अनूप कुमार गुप्ता के पिता सतेंद्र कुमार गुप्ता अपना फ्रैक्चर का दर्द भूल झूम उठे। दो दिन पहले सतेंद्र को ऑटो ने टक्कर मार दी थी। हालांकि अनूप इस सफलता से संतुष्ट नहीं हैं और अगले प्रयास में अच्छी रैंक का दम भर रहे हैं। गंगापुर कॉलोनी, गोपाल नगर निवासी अनूप कुमार गुप्ता के पिता सतेंद्र कुमार गुप्ता रिटायर्ड इंस्पेक्टर और मां अनीता गुप्ता गृहिणी हैं। मूलतः नर्वल के अनूप ने प्रयागराज से इंटर किया। फिर बीएनडी से बीएससी किया। यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है। चाचा व नर्वल के ग्राम प्रधान सुदीप कुमार शिवहरे ने बताया कि अनूप का चयन आईबी में भी हुआ है।
अंतिम प्रयास में पूरा हुआ बचपन का सपना
यूपीएससी के अपने अंतिम प्रयास में गौरव ओझा ने सफलता प्राप्त कर बचपन का सपना पूरा किया। गौरव की यूपीएससी में 204 रैंक आई है। रतनलाल नगर निवासी गौरव ओझा के पिता सुरेश ओझा बिजनेसमैन और मां सरिता ओझा गृहिणी हैं। गौरव के भाई सौरभ ओझा ने आईआईटी बीएचयू से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है। वह कई साल तक अमेरिका में रहने के बाद वर्तमान में बेंगलुरु स्थित मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत हैं। भाभी कृतिका भी साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। चिंटल्स से 12वीं के बाद आईआईटी बीएचयू से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की है।




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