ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह ने UPSC में झंडा गाड़ा, रैंक भी शानदार है
आरा की बेटी और रणवीर सेना सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह ने यूपीएससी 2025 में 301वीं रैंक हासिल कर यूपीएससी सिविल सेवा में अपनी जगह पक्की की है।

बिहार की मिट्टी में हमेशा से एक अलग बात रही है। यहां के युवाओं के हौसले और उनकी मेहनत ने बार-बार यह साबित किया है कि अगर दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। इसी बात को सच कर दिखाया है भोजपुर जिले के आरा की रहने वाली होनहार बेटी आकांक्षा सिंह ने। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 के हाल ही में घोषित हुए नतीजों में आकांक्षा ने 301वीं रैंक हासिल कर पूरे जिले और अपने परिवार का सीना फख्र से चौड़ा कर दिया है। उनकी यह कामयाबी सिर्फ उनकी अपनी नहीं है, बल्कि यह एक परिवार के उस पुराने ख्वाब के पूरे होने की कहानी है, जिसे उनके दादा ने कभी खुली आंखों से देखा था।
सियासी परिवार से ताल्लुक
आकांक्षा सिंह का ताल्लुक एक ऐसे परिवार से है, जिसका नाम बिहार की सियासत और सामाजिक हलचलों में काफी चर्चित रहा है। वह रणवीर सेना के संस्थापक और सुप्रीमो रहे स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं। उनके पिता इंदु भूषण सिंह और मां रिंकू सिंह आज अपनी बेटी की इस शानदार कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं। आकांक्षा बताती हैं कि उनके दादा स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर मुखिया हमेशा से यह ख्वाहिश रखते थे कि उनके घर से कोई न कोई बच्चा देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा पास करे और एक बड़ा अफसर बनकर देश की सेवा करे। आज अपनी कड़ी मेहनत और अटूट लगन के दम पर आकांक्षा ने अपने दादा के उस अधूरे सपने को हकीकत में तब्दील कर दिया है।
आरा की गलियों से शुरू हुआ तालीम का सफर
अगर आकांक्षा की तालीम की बात करें, तो उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई आरा में ही हुई है। उन्होंने शहर के कैथोलिक मिशन स्कूल से अपनी स्कूलिंग पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने आरा के ही मशहूर एचडी जैन कॉलेज का रुख किया, जहां से उन्होंने अंग्रेजी साहित्य (English Literature) में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली आकांक्षा के मन में शुरू से ही यूपीएससी क्रैक करने का एक साफ विजन था। इसी विजन को लेकर उन्होंने अपनी तैयारियां शुरू कीं और हर कदम पर खुद को साबित किया।
8 से 10 घंटे की तपस्या और आगे का लक्ष्य
आकांक्षा की यह सफलता उन हजारों-लाखों नौजवानों के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो छोटे शहरों या कस्बों से आते हैं। अक्सर यह माना जाता है कि बड़े महानगरों में जाकर ही यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी की जा सकती है, लेकिन आकांक्षा ने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके भीतर खुद पर भरोसा है और आप ईमानदारी से मेहनत करते हैं, तो जगह कोई मायने नहीं रखती। इस मुश्किल सफर के बारे में बात करते हुए आकांक्षा बताती हैं कि उन्होंने रोजाना करीब आठ से दस घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई की। जब उन्होंने इस बार परीक्षा दी थी, तो उन्हें अंदर से यह यकीन था कि वह इस बार जरूर कामयाब होंगी। 301वीं रैंक के साथ फिलहाल उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ है। हालांकि, आकांक्षा के सपनों की उड़ान यहीं तक सीमित नहीं है; उनका अगला लक्ष्य भारतीय विदेश सेवा (IFS) में जाने का है, जिसके लिए वह आगे भी अपनी कोशिशें जारी रखना चाहती हैं।
इंटरव्यू में भोजपुर की माटी और 'पद्मश्री' का जिक्र
यूपीएससी का सफर सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होता; इसमें उम्मीदवार की शख्सियत और अपने आस-पास की दुनिया को लेकर उसकी समझ को भी बारीकी से परखा जाता है। आकांक्षा ने बताया कि उनका इंटरव्यू काफी अच्छा और दिलचस्प रहा। इंटरव्यू बोर्ड ने उनसे उनके गृह जिले भोजपुर से जुड़े कई अहम सवाल पूछे। सबसे खास सवाल हाल ही में घोषित हुए 'पद्मश्री' पुरस्कारों को लेकर था। बोर्ड ने उनसे भोजपुर के जाने-माने भोजपुरी लोकगायक भरत सिंह भारती के बारे में सवाल किया, जिन्हें इसी साल 78 साल की उम्र में कला और लोक-संगीत के क्षेत्र में उनके 7 दशक लंबे योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा गया है। आरा के नोनउर गांव के रहने वाले भरत सिंह भारती से जुड़े इस सवाल का आकांक्षा ने पूरी सहजता और आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, जिसने इंटरव्यू बोर्ड पर एक गहरी छाप छोड़ी।




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