UPSC 2025: मुजफ्फरपुर के राघव झुनझुनवाला ने किया कमाल, हासिल की चौथी रैंक, बने बिहार टॉपर भी
Raghav Jhunjhunwala UPSC 2025 AIR 4: यूपीएससी 2025 में मुजफ्फरपुर के राघव झुनझुनवाला ने ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल कर इतिहास रच दिया है, उनकी यह कामयाबी और तीसरे प्रयास की कहानी हर एस्पिरेंट के लिए एक बड़ी मिसाल है।

Raghav Jhunjhunwala UPSC 2025 AIR 4: "मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" यह कहावत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजों में बिल्कुल सच साबित हुई है। इस साल के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर इंसान के अंदर सच्ची लगन और लगातार मेहनत करने का जज्बा हो, तो दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले 25 साल के राघव झुनझुनवाला ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 4 (AIR 4) हासिल कर पूरे देश में अपना और अपने परिवार का नाम रोशन किया है। उनकी यह कामयाबी महज एक दिन का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत, सही दिशा में की गई तैयारी और कभी हार ना मानने वाली सोच छिपी है।
कामयाबी का सफर और टॉपर्स की लिस्ट
यूपीएससी 2025 का रिजल्ट आते ही पूरे देश में जश्न का माहौल बन गया। इस परीक्षा को देश की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस साल अनुज अग्निहोत्री ने पहली रैंक हासिल कर टॉप किया है, वहीं राजेश्वरी सुवे एम को दूसरी और अकांश ढुल को तीसरी रैंक मिली है। लेकिन इन सबके बीच चौथी रैंक हासिल करने वाले राघव झुनझुनवाला की कहानी युवाओं के दिलों को छू रही है। राघव ने रोल नंबर 0834732 के साथ इस कठिन परीक्षा के आखिरी पड़ाव को पार किया। इस लिस्ट में इशान भटनागर (5वीं रैंक), जिन्निया अरोड़ा (छठी रैंक), ए आर राजाह मोहिदीन (7वीं रैंक), पाक्षल सेक्रेटरी (8वीं रैंक), आस्था जैन (9वीं रैंक) और उज्जवल प्रियंक (10वीं रैंक) जैसे शानदार उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हैं।
मुजफ्फरपुर से दिल्ली तक का तालीमी सफर
राघव का जन्म और पालन-पोषण बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ। वह एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां तालीम (शिक्षा) और अनुशासन को हमेशा सबसे ऊपर रखा गया। उनके इस शानदार सफर में उनके परिवार का बहुत बड़ा हाथ रहा है। उनके पिता, स्वर्गीय नवीन झुनझुनवाला ने बचपन से ही राघव के विचारों को एक मजबूत आकार दिया था। वहीं उनकी मां, अंजू देवी झुनझुनवाला ने हर कदम पर अपने बेटे का साथ दिया और उसके हौसले को कभी टूटने नहीं दिया।
राघव शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार थे। उन्होंने अपनी 10वीं कक्षा की पढ़ाई साल 2017 में मुजफ्फरपुर के 'डी पी एस आई गरहन हथौड़ी सनाथी' (CBSE) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने 2019 में 'जी.डी. मदर इंटरनेशनल स्कूल', मुजफ्फरपुर से ही 12वीं की परीक्षा पास की। स्कूली पढ़ाई के बाद राघव ने दिल्ली का रुख किया और देश के सबसे बेहतरीन कॉलेजों में शुमार दिल्ली यूनिवर्सिटी के 'श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स' (SRCC) में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने 2022 में अर्थशास्त्र (Economics) में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की। आपको जानकर हैरानी होगी कि राघव कॉलेज में भी टॉपर रहे और उन्हें पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन के लिए 'चरत राम गोल्ड मेडल' से नवाजा गया। इसके अलावा, उन्होंने भारत में 'NPA संकट' पर एक अहम रिसर्च पेपर भी लिखा था, जो उनकी गहरी समझ और शानदार एनालिटिकल स्किल्स को दिखाता है।
नाकामी से मिली सीख और तीसरे प्रयास में मारी बाजी
यूपीएससी का रास्ता कभी आसान नहीं होता और राघव के लिए भी यह सफर चुनौतियों से भरा था। उन्होंने कामयाबी का स्वाद चखने से पहले नाकामियों का सामना भी किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। राघव ने कुल तीन बार इस परीक्षा में अपनी किस्मत आजमाई।
साल 2023 में अपने पहले प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स (Preliminary) परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन मेन्स (Mains) परीक्षा में उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद 2024 में अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और प्रीलिम्स के साथ-साथ मेन्स परीक्षा भी पास कर ली। वह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं आ सका। यह वह पल था जब कोई भी इंसान निराश हो सकता है, लेकिन राघव ने अपने हौसले को बरकरार रखा। साल 2025 में अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू तीनों में शानदार प्रदर्शन करते हुए सीधे ऑल इंडिया रैंक 4 पर अपना कब्जा जमा लिया। यह सफर साबित करता है कि लगातार कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
रणनीति, ऑप्शनल सब्जेक्ट और सही मार्गदर्शन
एक सही रणनीति किसी भी परीक्षा की जान होती है। राघव ने यूपीएससी मेन्स परीक्षा के लिए 'अर्थशास्त्र' (Economics) को ही अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना था। चूंकि उन्होंने SRCC से अर्थशास्त्र में ही ग्रेजुएशन किया था, इसलिए इस विषय पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी। इस फैसले ने उनकी कामयाबी में एक बड़ा रोल अदा किया।




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