UP PET 2026: यूपी पीईटी परीक्षा आज, हाईकोर्ट ने 174 छात्रों को दी बड़ी राहत; परीक्षा में बैठ सकेंगे अभ्यर्थी
UP PET 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) की वैधता को लेकर चल रहे विवाद के बीच 174 अभ्यर्थियों को बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। अब ये अभ्यर्थी आज 3 मई 2026 को आयोजित होने वाली मुख्य भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

UP PET 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक राहत भरी खबर आई है। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) की वैधता को लेकर चल रहे विवाद के बीच 174 अभ्यर्थियों को बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय के इस आदेश के बाद, अब ये अभ्यर्थी आज 3 मई 2026 को आयोजित होने वाली मुख्य भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
यह मामला उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली विभिन्न भर्तियों से जुड़ा है। सत्येंद्र यादव और 173 अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चयन आयोग को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
इस विवाद की जड़ पीईटी (PET) सर्टिफिकेट की वैधता अवधि है। याचियों का पक्ष रखते हुए वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इन 174 अभ्यर्थियों ने वर्ष 2021 और 2022 में पीईटी परीक्षा पास की थी। विवाद तब शुरू हुआ जब आयोग ने नई भर्तियों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया। उस समय तक इन अभ्यर्थियों के पीईटी सर्टिफिकेट की वैधता समाप्त हो चुकी थी। 20 नवंबर 2020 को जारी तत्कालीन शासनादेश के अनुसार, पीईटी सर्टिफिकेट की वैधता केवल एक वर्ष के लिए निर्धारित की गई थी। भर्ती का नोटिफिकेशन देरी से आने के कारण, जिन छात्रों ने पहले मेहनत करके परीक्षा पास की थी, वे केवल तकनीकी कारणों (वैधता खत्म होने) से आवेदन करने से वंचित हो रहे थे।
हाईकोर्ट का आदेश और शर्तें
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उदार रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि याचियों को 3 मई को होने वाली लिखित परीक्षा में बैठने से न रोका जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस राहत के साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी जुड़ी हैं। इन 174 अभ्यर्थियों का परीक्षा में शामिल होना पूरी तरह प्रोविजनल होगा। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चयन आयोग इन अभ्यर्थियों का परिणाम न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना घोषित नहीं करेगा। इनका चयन होगा या नहीं, यह याचिका पर आने वाले हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
अभ्यर्थियों में खुशी की लहर
हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप से उन हजारों छात्रों को उम्मीद जगी है जो भर्ती प्रक्रिया में देरी और नियमों के फेर में फंसकर ओवरएज हो रहे हैं या जिनके सर्टिफिकेट बेकार हो रहे हैं। अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि सरकार समय पर नोटिफिकेशन नहीं निकालती, तो इसमें छात्रों की कोई गलती नहीं है और उन्हें परीक्षा में बैठने का मौका मिलना चाहिए।




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