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UGC NET JRF पास विद्यार्थी ढाई साल से गाइड के लिए भटक रहे, अब जेआरएफ अवधि समाप्त होने का डर

शोधार्थियों का आरोप है कि जहां एक ओर आरयू के छात्र मार्गदर्शक के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि से उत्तीर्ण नेट-जेआरएफ छात्रों को यहां प्राथमिकता के साथ शोध निर्देशक उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

Fri, 8 May 2026 08:32 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान
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UGC NET JRF पास विद्यार्थी ढाई साल से गाइड के लिए भटक रहे, अब जेआरएफ अवधि समाप्त होने का डर

रांची विवि के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (टीआरएल) विभाग के विद्यार्थियों ने रांची विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि विवि में नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण शोधार्थी उपेक्षित हैं। सबसे बड़ी समस्या शोध निर्देशक (गाइड) के आवंटन को लेकर है। शोधार्थियों का आरोप है कि जहां एक ओर आरयू के छात्र मार्गदर्शक के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि से उत्तीर्ण नेट-जेआरएफ छात्रों को यहां प्राथमिकता के साथ शोध निर्देशक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस दोहरी नीति ने विवि की पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

समाप्त हो रही है जेआरएफ की अवधि

शोधार्थी तन्नु कुमारी, प्रिया ठाकुर, दीपिका कुमारी, प्रीति मुंडा और शिल्पा कच्छप ने बताया कि वे पिछले ढाई वर्षों से विभाग-विवि के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। इस देरी के कारण कई छात्रों की जेआरएफ की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, कई अन्य की समाप्ति के कगार पर है। कहा, समाधान के लिए कुलसचिव और डीएसडब्ल्यू को कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। विवि प्रशासन की इस उदासीनता से शोधार्थियों को न केवल शैक्षणिक बल्कि मानसिक और आर्थिक क्षति भी झेलनी पड़ रही है।

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इधर, डीएसपीएमयू में जनजातीय भाषाओं के शिक्षकों की मांग

इधर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के आदिवासी छात्र संघ ने गुरुवार को शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति के लिए कुलपति डॉ. राजीव मनोहर को ज्ञापन सौंपा। संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की ने कहा कि कुड़ुख, नागपुरी और मुंडारी भाषाओं की पढ़ाई यहां 1985 से हो रही है, लेकिन वर्षों बाद भी शिक्षकों के पर्याप्त पद सृजित नहीं हैं। उन्होंने कुड़ुख और नागपुरी विभाग में यूजीसी गाइडलाइन के तहत पद सृजन की मांग करते हुए जनजातीय भाषाओं की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की। विवेक ने कुलपति को बताया कि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के बावजूद विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। कुलपति ने जल्द उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।

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