विश्वविद्यालयों में अब 2 तरह का PG कोर्स, 1 साल में पीजी कौन कर सकेगा, UGC का नियम क्या है, NET दे सकेंगे या नहीं
विद्यार्थी एक वर्ष और दो वर्ष के दो तरह के पीजी कोर्स में दाखिला लेंगे । 2023 में ही बिहार में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई थी। चार वर्षीय स्नातक में 7.5 सीजीपीए वालों के लिए एक साल की पीजी रहेगी।

अगले वर्ष से बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में दो तरह के पीजी कोर्स चलेंगे। स्नातक के चार वर्षीय कोर्स में जिन विद्यार्थियों को 7.5 सीजीपीए (कम्युलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज) आएंगे, उनके लिए एक वर्ष की पीजी कोर्स होगा। इससे कम सीजीपीए वालों को दो वर्ष के पीजी कोर्स में नामांकन कराना होगा। बीआरएबीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार का कहना है कि स्नातक के आठवें सेमेस्टर में विद्यार्थियों का सीजीपीए तय होगा। आठवें सेमेस्टर में जिन्हें जितना सीजीपीए आयेगा, उसी अनुसार पीजी में दाखिला ले सकेंगे। वर्ष 2023-27 के स्नातक के विद्यार्थियों की पढ़ाई अगले वर्ष पूरी होगी। वर्ष 2023 से ही बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई थी।
UGC नियामानुसार चार वर्षीय स्नातक PhD के लिए भी योग्य
यूजीसी के नये नियम के मुताबिक स्नातक में 7.5 सीजीपीए लाने वाले पीएचडी के भी योग्य हो जाएंगे। वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की तरफ से आयोजित होने वाले यूजीसी नेट पीएचडी की परीक्षा दे सकेंगे। अंतिम सेमेस्टर में स्नातक के छात्रों को शोध भी कराया जायेगा। सीबीसीएस के पाठ्यक्रम में शोध को स्नातक में डाला गया है।
दो तरह की पीजी पर सीट के लिए मारामारी
अगले वर्ष से विश्वविद्यालयों में दो तरह की पीजी की पढ़ाई होगी, लेकिन सीट के लिए मारामारी है। बीआरएबीयू में ही पीजी की सिर्फ 11 हजार सीटें हैं। इस वर्ष काफी दवाब के बाद 100 सीटें कुछ विषयों में बढ़ाई गईं थीं। इसके बाद भी काफी विद्यार्थियों का दबाव नामांकन के लिए रहा। दो वर्षीय पीजी के लिए शिक्षकों की संख्या भी कम है। दो पीजी कोर्स के लिए अब तक विश्वविद्यालयों में कोई तैयारी शुरू नहीं की गई है। हालांकि बीआरएबीयू प्रशासन अगले सत्र से पीजी के लिए प्रवेश परीक्षा लेने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालयों में नए सत्र से पीजी की पढ़ाई किस तरह से होगी, इसका सिलेबस भी तैयार नहीं हुआ है।
आधारभूत संरचना की कमी
बीआरएबीयू और अन्य विश्वविद्यालयों में एक साथ दो पीजी कोर्स चलाने के लिए आधारभूत संरचना की कमी है। बीआरएबीयू के ही शिक्षकों का कहना है कि अगर स्नताक में ही सारे विद्यार्थी एक साथ कक्षा करने पहुंच जाएं तो उन्हें कक्षा में बैठाना संभव नहीं है। ऐसे में पीजी के दो कोर्स में छात्रों की पढ़ाई कराने के लिए पहले से ही तैयारी करनी होगी।




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