TET : टीईटी अनिवार्य करने के खिलाफ शिक्षक संघ की आज अहम बैठक, क्या होगा फैसला, अलग परीक्षा का भी सुझाव
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी TET अनिवार्य किए जाने के बाद देशभर के लाखों नॉन-TET शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। लखनऊ में शिक्षक महासंघ की बैठक में कानूनी विकल्पों और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा होगी।

अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ आज गुरुवार को लखनऊ में आयोजित बैठक में आगामी आन्दोलनात्मक पहलुओं पर चर्चा करेगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर विधिक व प्रशासनिक मुद्दे पर वार्ता करेगा। महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता के आदेश से देश के करीब 25 लाख एवं प्रदेश के करीब 1.86 लाख शिक्षक परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक एवं सेवा सुरक्षा का संकट गहरा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में वर्ष 2010 से पहले के कार्यरत शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में कार्यरत नॉन टीईटी शिक्षकों हड़कंप मच गया है। विशेषकर उन वरिष्ठ शिक्षकों में जिन्होंने अब तक टेट परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
शिक्षकों का कहना है कि करियर के इस पड़ाव पर उनके लिए दोबारा पढ़ाई करना और इस उम्र में प्रतियोगी परीक्षा में बैठना बेहद कठिन है।
शिक्षक संघों की मांग
शिक्षक संघों ने केंद्र सरकार से आगामी संसद के मानसून सत्र में अध्यादेश या आवश्यक विधायी संशोधन लाकर प्रभावित शिक्षकों को राहत देने की मांग की है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहे।
कई शिक्षक संघ और राज्य शिक्षा विभागों में अलग से परीक्षा कराने की भी मांग चल रही है।
कई राज्यों में कार्यरत टीचरों के लिए मिनिमम मार्क्स कम करने पर बात चल रही है।
शिक्षक संगठनों की चिंताएं
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि इतने वर्षों के अनुभव को दरकिनार कर केवल एक परीक्षा के आधार पर उनकी योग्यता को आंकना न्यायसंगत नहीं है। फिलहाल इस फैसले ने हजारों शिक्षकों को असमंजस और मानसिक तनाव में डाल दिया है कि वह इस उम्र में परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे। हालांकि 2010 के पहले की नियुक्ति पाने वाले बिना टेट परीक्षा पास किए शिक्षक पढ़ाई में जुट गए हैं लेकिन उन्हें अंदर से भय है कि इतने तनाव के बीच परीक्षा कैसे पास कर पाएंगे उनका यह भी तर्क है कि किसी भी नौकरी में इतने वर्ष नौकरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षा में बैठने का नियम नहीं है तो शिक्षक के लिए ही ऐसा क्यों हो रहा है।
देश भर से करीब 25 लाख पर असर
यूपी में 1.80 लाख पर अगर होगा।
राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से राजस्थान के तृतीय श्रेणी शिक्षक लेवल-1 और लेवल-2 के करीब 80 हजार शिक्षक प्रभावित होंगे।
- छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां करीब 85 हजार शिक्षकों पर इस फैसले का असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है
एमपी में 1.5 लाख शिक्षक इससे प्रभावित होंगे।
झारखंड में ऐसे करीब 40 हजार शिक्षक हैं,
कौन क्या बोला
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष तारकेश्वर शाही ने टीईटी संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर गहरी असहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लाखों शिक्षकों के मन में अनेक प्रश्न और पीड़ा छोड़ गया है। उनका तर्क है कि आरटीई एक्ट की धारा के तहत शिक्षक की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का अधिकार एनसीटीई को प्राप्त है तथा एनसीटीई की वर्ष 2010 की अधिसूचना में आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य नहीं बताया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संबंधित प्रावधान को न तो हटाया गया, न संशोधित किया गया और न ही किसी सक्षम न्यायालय ने अवैध घोषित किया, तो पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता किस आधार पर लागू की जा रही है। शाही ने सभी शिक्षक संगठनों से मतभेद भुलाकर एकजुट होने और शिक्षकों के अधिकारों व सेवा सुरक्षा के लिए साझा संघर्ष करने का आह्वान किया।
- टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा हम इस मामले में हार नहीं मानेंगे और अधिवक्ताओं से राय लेकर इसमें क्यूरेटिव पिटीशन डालेंगे। उन्होंने कहा कि सड़क पर भी आंदोलन दोबारा शुरू करेंगे।




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