suraj tiwari upsc success story train accident struggle wheelchair first attempt iis officer ट्रेन हादसे ने छीना सब कुछ, गंवाए हाथ-पैर; 3 उंगलियों के सहारे सूरज तिवारी ने कैसे किया UPSC क्रैक, Career Hindi News - Hindustan
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ट्रेन हादसे ने छीना सब कुछ, गंवाए हाथ-पैर; 3 उंगलियों के सहारे सूरज तिवारी ने कैसे किया UPSC क्रैक

suraj tiwari upsc success story : सूरज तिवारी ने 2017 के भीषण ट्रेन हादसे के बाद भी हार नहीं मानी और 2023 में UPSC परीक्षा पास कर IIS अधिकारी बने। जानिए सूरज तिवारी के संघर्ष, आत्मविश्वास और सफलता की प्रेरणादायक कहानी।

Sun, 26 April 2026 09:10 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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ट्रेन हादसे ने छीना सब कुछ, गंवाए हाथ-पैर; 3 उंगलियों के सहारे सूरज तिवारी ने कैसे किया UPSC क्रैक

suraj tiwari upsc success story : कभी कभी जिंदगी इंसान को ऐसी परीक्षा में डाल देती है जहां हर रास्ता बंद नजर आता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अंधेरे में भी उम्मीद की रोशनी ढूंढ लेते हैं। सूरज तिवारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक भयानक ट्रेन हादसे में अपने दोनों पैर, एक हाथ और उंगलियां खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। व्हीलचेयर पर बैठकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC को पहले ही प्रयास में पास कर दिखाया।

हादसे ने बदल दी जिंदगी

साल 2017 में सूरज तिवारी के जीवन में ऐसा तूफान आया, जिसने सब कुछ बदल दिया। नोएडा में एक निजी कंपनी में काम करने वाले सूरज अपने घर मैनपुरी जा रहे थे, तभी एक भयानक ट्रेन हादसे का शिकार हो गए। इस दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों पैर घुटनों के नीचे से खो दिए, दाहिना हाथ चला गया और बाएं हाथ की दो उंगलियां भी नहीं रहीं। यह हादसा किसी भी इंसान को तोड़ सकता था, लेकिन सूरज ने इसे अपनी जिंदगी का अंत नहीं बनने दिया। उनके भीतर कहीं न कहीं एक जिद थी कि वह इस मुश्किल को हराकर दिखाएंगे।

अस्पताल के बिस्तर से लिया बड़ा फैसला

जब सूरज का इलाज चल रहा था, तब वह दिल्ली के एम्स अस्पताल में थे। उसी दौरान उनके मन में एक विचार आया जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। उन्होंने सोचा कि यह हादसा उनकी कहानी का अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत हो सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने UPSC की तैयारी करने का फैसला लिया। उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए जेएनयू में रूसी भाषा में एमए में दाखिला लिया।

तीन उंगलियों के साहारे शुरू की तैयारी

शारीरिक स्थिति के कारण सूरज किसी कोचिंग संस्थान में जाकर पढ़ाई नहीं कर सकते थे। लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने घर पर रहकर खुद ही पढ़ाई शुरू की। केवल तीन उंगलियों के सहारे नोट्स बनाना, पढ़ना और लगातार मेहनत करना आसान नहीं था। लेकिन सूरज ने हर मुश्किल को चुनौती की तरह लिया। उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और बिना किसी कोचिंग के UPSC की तैयारी पूरी की।

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पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता

सूरज की मेहनत और लगन का नतीजा तब सामने आया जब उन्होंने 2023 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 917वीं रैंक हासिल की। यह उपलब्धि इसलिए और भी खास बन जाती है क्योंकि उन्होंने यह सफलता इतनी कठिन परिस्थितियों में हासिल की। आज वह भारतीय सूचना सेवा में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

परिवार ने झेला मुश्किलों का दौर

सूरज की जिंदगी का यह संघर्ष केवल उनका अकेले का नहीं था, बल्कि पूरे परिवार ने इसे जिया। उनके इलाज का पूरा खर्च उनके पिता राजेश तिवारी ने उठाया जो पेशे से एक दर्जी हैं। इसी दौरान उनके परिवार पर एक और बड़ा दुख आया, जब उनके भाई की 2017 में मृत्यु हो गई। उनकी मां आशा देवी ने उस समय को परिवार के जीवन का सबसे अंधेरा दौर बताया। इतनी परेशानियों के बावजूद परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और सूरज के साथ खड़ा रहा।

आज बन चुके हैं हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा

आज सूरज तिवारी एक सरकारी अधिकारी हैं और उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो कोई भी मुश्किल उसे रोक नहीं सकती।

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