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ऐशो-आराम वाली नौकरी छोड़, बंद कमरे से की तैयारी, पहले बने IPS, फिर UPSC में लाई AIR 1

आदित्य श्रीवास्तव ने लाखों की नौकरी छोड़कर यूपीएससी 2023 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की, उनका संघर्ष और स्मार्ट वर्क की बेहतरीन रणनीति आज हर युवा के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

Mon, 20 April 2026 07:24 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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ऐशो-आराम वाली नौकरी छोड़, बंद कमरे से की तैयारी, पहले बने IPS, फिर UPSC में लाई AIR 1

यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा भी देश के युवाओं के लिए किसी ऊंचे और दुर्गम पहाड़ से कम नहीं है। हर साल लाखों नौजवान इस पहाड़ को फतह करने का सपना आंखों में सजाए मैदान में उतरते हैं। लेकिन इसकी चोटी पर पहुंचकर अपना झंडा गाड़ने का मौका चंद खुशनसीबों और जुनूनी लोगों को ही मिलता है। आज हम एक ऐसी ही बेमिसाल कामयाबी की कहानी लेकर आए हैं। ये कहानी है आदित्य श्रीवास्तव की है जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) हासिल करके पूरे देश में अपनी सफलता का डंका बजाया। उनकी यह कामयाबी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि अगर हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क का सही तड़का लगाया जाए, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

लाखों की नौकरी छोड़ी

जरा सोचिए, एक लड़का जो भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी (IIT) कानपुर से पढ़ा हो। जिसके पास बी.टेक और एम.टेक दोनों की डिग्रियां हों। पढ़ाई पूरी करते ही जिसे बेंगलुरु में गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) जैसी दिग्गज मल्टीनेशनल कंपनी में हर महीने लगभग ढाई लाख रुपये की शानदार सैलरी वाली नौकरी मिल गई हो। क्या ऐसा इंसान अपना ये आरामदेह और ऐशो-आराम वाला करियर छोड़कर सिविल सर्विस की अनिश्चितताओं भरी दुनिया में कदम रखेगा? ज्यादातर लोगों का जवाब शायद ना हो। लेकिन लखनऊ के रहने वाले आदित्य की सोच बिल्कुल अलग थी।

उन्होंने अपनी इस हाई-प्रोफाइल जॉब में करीब 15 महीने काम किया। पैसे तो बहुत थे पर दिल में एक टीस थी। वो देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे, एक ऐसा काम जिसका सीधा असर जमीनी स्तर पर समाज पर पड़े। बस फिर क्या था, उन्होंने वो मोटी सैलरी वाली नौकरी को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया और वापस अपने शहर लौटकर कमरा बंद करके यूपीएससी की जी-तोड़ तैयारी में जुट गए।

हार से नहीं मानी हार

आदित्य का सफर कोई रातों-रात मिली सफलता की जादुई कहानी नहीं है। इसमें लंबा संघर्ष है, हार है और फिर बाउंस बैक करने का गजब का जज्बा भी छिपा है। साल 2021 में जब उन्होंने पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया, तो उनका प्रीलिम्स ही क्लीयर नहीं हुआ। कोई और होता तो शायद टूट जाता, सोचता कि यार अच्छी-भली नौकरी छोड़ दी और यहां तो पहली सीढ़ी ही पार नहीं हो रही। पर आदित्य ने हार नहीं मानी।

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उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और रणनीति में बदलाव किया। अगले साल 2022 में उन्होंने फिर से परीक्षा दी और इस बार न सिर्फ परीक्षा पास की बल्कि 236वीं रैंक के साथ आईपीएस (IPS) के लिए चुने गए। ये उनके लिए यकीनन एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उनकी असली मंजिल अभी बाकी थी। आदित्य का सपना तो आईएएस अफसर बनने का था। इसलिए आईपीएस की ट्रेनिंग करते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और फिर आया साल 2023। अपनी तीसरे प्रयास में उन्होंने वो कर दिखाया जिसका सपना हर एस्पिरेंट देखता है। उन्होंने कुल 2025 अंकों में से शानदार 1099 अंक हासिल करते हुए रैंक 1 लाई।

क्या थी आदित्य की सीक्रेट रणनीति?

अगर आप सोच रहे हैं कि वो दिन-रात बस किताबों में ही घुसे रहते थे, तो आप गलत हैं। आदित्य का साफ मानना है कि इस परीक्षा में सिर्फ रट्टा मारने से काम नहीं चलता। यहां स्मार्ट वर्क ही आपको भीड़ से अलग बनाता है। उन्होंने अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट के तौर पर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को चुना, क्योंकि वो उसमें पहले से ही मास्टर्स कर चुके थे। इससे उन्हें एक गजब का कॉन्फिडेंस मिला। अपनी तैयारी के दौरान वो हर दिन 8 से 10 घंटे पढ़ते थे। लेकिन उनका सबसे ज्यादा जोर आंसर राइटिंग पर था। प्रीलिम्स और मेन्स के बीच के समय में वो रोजाना टाइमर लगाकर 10 से 15 सवालों के जवाब लिखते थे। उनका मानना है कि एग्जाम हॉल में सोचने का ज़्यादा वक्त नहीं मिलता, इसलिए आपके हाथ और दिमाग का तालमेल एकदम परफेक्ट होना चाहिए।

एक और दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कंटेंट इकट्ठा करने के लिए पुराने टॉपर्स (जैसे श्रुति शर्मा) के नोट्स का खूब इस्तेमाल किया। वहां से उन्होंने वो जरूरी पॉइंट निकाले जो उनके जवाबों को खास और दूसरों से अलग बना सकें। उन्होंने इंटरनेट और एआई टूल्स का भी स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल किया। जहां दूसरे बच्चे बहुत सारे मॉक इंटरव्यू देने के पीछे भागते हैं, वहीं अपने आखिरी अटेंप्ट में आदित्य ने सिर्फ एक मॉक इंटरव्यू दिया। क्योंकि वो चाहते थे कि इंटरव्यू पैनल के सामने उनके जवाब रटे-रटाए न लगें, बल्कि बिल्कुल नैचुरल और स्वाभाविक रहें।

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