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हालात थे मुश्किल, हौसला था बुलंद, मनोज ने ऐसे किया UPSC में कमाल

manoj patil upsc success story: महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित जलिहाल गांव के मनोज पाटिल ने UPSC 2025 में AIR 493 हासिल कर कामयाबी की इबारत लिख दी है। जानिए उनकी संघर्ष भरी प्रेरणादायक कहानी।

Sat, 25 April 2026 05:58 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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हालात थे मुश्किल, हौसला था बुलंद, मनोज ने ऐसे किया UPSC में कमाल

manoj patil upsc success story: कभी पानी के लिए तरसने वाला गांव, जहां जिंदगी रोज की जद्दोजहद में उलझी रहती है… वहीं से निकला एक सपना, जो पूरे देश के सबसे कठिन इम्तिहान में चमक उठा। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के छोटे से गांव जलिहाल में उस दिन जश्न का माहौल था, जब मनोज रामचंद्र पाटिल ने UPSC 2025 में 493वीं रैंक हासिल कर गांव का नाम रोशन कर दिया। यह सिर्फ एक लड़के की जीत नहीं थी बल्कि पूरे गांव के हौसले की जीत थी। दरअसल जलिहाल कोई आम गांव नहीं है। यहां हर साल सूखा लोगों की जिंदगी को तय करता है। खेती के लिए पानी नहीं, रोजगार के मौके नहीं, इसलिए हर साल कई परिवार गन्ना काटने के लिए दूसरे इलाकों में पलायन करते हैं। गांव में पढ़ाई की सुविधा सिर्फ चौथी क्लास तक है। इसके बाद बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। ऐसे माहौल में जहां जिंदगी की बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो, वहां से UPSC जैसी परीक्षा पास करना किसी चमत्कार से कम नहीं। और यह काम मनोज कर दिखाया है।

मनोज एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता रिटायर्ड शिक्षक हैं और मां गृहिणी। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के जिला परिषद स्कूल से की। बचपन से ही मनोज पढ़ाई में तेज थे। चौथी और सातवीं की स्कॉलरशिप परीक्षा में उन्होंने जिला मेरिट लिस्ट में जगह बनाई। दसवीं में भी उन्होंने टॉप किया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने सोलापुर और फिर संभाजीनगर का रुख किया, जहां से उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

पिता का सपना बना बेटे का लक्ष्य

मनोज बताते हैं कि UPSC का सपना सबसे पहले उनके पिता ने देखा था। वे कहते हैं, “पापा हमेशा कहते थे कि अगर अच्छे नंबर आते हैं तो UPSC की तैयारी करनी चाहिए।” यही बात धीरे-धीरे मनोज के मन में बैठ गई और एक दिन यही सपना उनका लक्ष्य बन गया।

इंजीनियरिंग के दौरान आया टर्निंग पॉइंट

इंजीनियरिंग के तीसरे साल में एक IAS अधिकारी का लेक्चर सुनना मनोज की ज़िंदगी का बड़ा मोड़ साबित हुआ। उन्होंने बताया कि उस दिन पहली बार उन्हें लगा कि वे भी इस मुकाम तक पहुंच सकते हैं। दोस्तों के साथ हुई बातचीत ने भी इस फैसले को मजबूत किया। कुछ समय नौकरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह UPSC की तैयारी में खुद को झोंक दिया।

6 प्रयास, तब मिली सफलता

मनोज की कहानी आसान नहीं रही। उन्होंने 6 बार UPSC का एग्जाम दिया। 5 बार मेंस लिखा, 3 बार इंटरव्यू दिया। हर असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। आखिरकार 2025 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने AIR 493 हासिल की।

दिल्ली-पुणे में तैयारी

मनोज ने अपनी तैयारी पुणे और दिल्ली में की। उन्होंने सिर्फ ऑप्शनल विषय के लिए कोचिंग ली, बाकी सब सेल्फ स्टडी से किया। हर दिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई उनकी दिनचर्या का हिस्सा थी। दिल्ली का माहौल, खाना और मौसम उनके लिए चुनौती था, लेकिन उन्होंने खुद को ढाल लिया।

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रणनीति ने बदली किस्मत

पहले मेंस में कम नंबर आने के बाद मनोज को समझ आया कि UPSC सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि सही रणनीति का खेल है। उन्होंने अपनी तैयारी में बड़े बदलाव किए जैसे आंसर राइटिंग पर फोकस, ग्रुप डिस्कशन, कॉन्सेप्ट क्लियर करना और टॉपर्स से सीखना शामिल हैं। यही बदलाव उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बने।

इंटरव्यू में दिखाया आत्मविश्वास

इंटरव्यू के दौरान उनसे स्किल डेवलपमेंट, सड़क निर्माण, पानी संरक्षण जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे गए। करीब आधे घंटे चले इस इंटरव्यू में उन्होंने अपने अनुभव और समझ से बोर्ड को प्रभावित किया।

इमोशनल नहीं, स्मार्ट स्टडी जरूरी

मनोज की सलाह साफ है। वे कहते हैं कि UPSC की तैयारी भावनाओं से नहीं, रणनीति से करनी चाहिए। उनके मुताबिक आज के समय में सबसे बड़ा खतरा ‘इन्फोडेमिक’ है यानी जरूरत से ज्यादा जानकारी। इसलिए जरूरी है कि सही चीज़ पढ़ी जाए, न कि सब कुछ। वे मानसिक स्वास्थ्य पर भी ज़ोर देते हैं और कहते हैं कि असफलता को खुद की कमी नहीं समझना चाहिए।

गांव के लिए बना प्रेरणा स्रोत

मनोज की सफलता ने जलिहाल के युवाओं के लिए नई राह खोल दी है। अब वहां के बच्चे भी बड़े सपने देखने लगे हैं। जहां कभी सिर्फ पलायन की बात होती थी, अब वहां UPSC की चर्चा हो रही है।

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