IIT टॉपर, UPSC रैंक 1 , IAS के 34 साल में 32 तबादले, श्रीधर वेम्बू ने सुनाई क्लासमेट की दिलचस्प कहानी
जोहो कंपनी के फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू ने IIT में राजू नारायण स्वामी के साथ पढ़ाई करने के दिनों को याद किया है। राजू एक प्रतिभाशाली छात्र थे जो आगे चलकर IAS अधिकारी बने।

जोहो कंपनी के फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू ने हाल ही में अपने एक पोस्ट में अपने IIT के उस क्लासमेट और दोस्त को याद किया जिसने विदेश में करियर बनाने की बजाय देश सेवा की रहा चुनी। राजू नारायण स्वामी आईआईटी मद्रास के एक बेहद टैलेंटेड स्टूडेंट थे। इंजीनियरिंग के बाद वे यूपीएससी क्रैक कर आईएएस अफसर बने। वेम्बु स्वामी के करियर और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रही एक पोस्ट का जवाब दे रहे थे।
अपने पोस्ट में वेम्बु ने स्वामी की पढ़ाई में बेहतरीन काबिलियत और भारत में ही रुकने के उनके फैसले को याद किया, जब उनके आईआईटी के ज्यादातर दूसरे क्लासमेट विदेश चले गए थे। स्वामी और श्रीधर वेम्बु दोनों ने ही आईआईटी मद्रास से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की थी। वेम्बु ने याद करते हुए कहा, 'राजू नारायण स्वामी IIT मद्रास में मेरे क्लासमेट थे। आईआईटी एंट्रेंस जेईई ( IIT JEE ) 1985 में उनकी रैंक भी बहुत अच्छी थी - मुझे याद है कि उनकी ऑल इंडिया रैंक ( AIR) 10 थी। वह केरल के एक छोटे से शहर से आए थे, जबकि ज्यादातर टॉप रैंक लाने वाले बड़े शहरों से होते थे, इसलिए उनकी पहचान सबसे अलग ही दिखती थी।'
जोहो फाउंडर ने आगे कहा, 'हमारे अधिकतर क्लासमेट, जिनमें मैं भी शामिल हूं, विदेश चले गए थे। लेकिन उन्होंने भारत में ही रुकने का फैसला किया।'
कौन हैं राजू नारायण स्वामी?
राजू नारायण स्वामी केरल कैडर के एक धाकड़ आईएएस ऑफिसर हैं। राजू नारायण स्वामी ने 1991 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में टॉप किया था। 1968 में तिरुवनंतपुरम के उल्लूर में एक मिडिल-क्लास परिवार में जन्मे स्वामी ने 1989 में आईआईटी मद्रास से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। उन्होंने अपनी क्लास में भी टॉप किया था। शानदार टैलेंट और बेहतरीन काबिलियत के चलते उन्हें वर्ल्ड की नंबर 1 यूनिवर्सिटी मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) अमेरिका में फुल स्कॉलरशिप मिल रही थी। लेकिन उन्होंने वहां जाने का ऑफर ठुकरा दिया था। उन्होंने भारत में ही रुकने और UPSC परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया।
'जो संस्थान जनता के टैक्स के पैसों से चलते हैं, वहां से पढ़ा'
एक्स पर वायरल हुए जिस पोस्ट का वेम्बु ने जवाब दिया था, उसमें स्वामी के इस फैसले की वजह उनके देश के लोगों की सेवा करने की उनकी दिली इच्छा को बताया गया था। पोस्ट में लिखा था, 'उनके पास IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस की डिग्री थी। MIT ने उन्हें स्कॉलरशिप देने की पेशकश की थी। लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। उनका मानना था कि वह भारत के गरीब लोगों ने अपने टैक्स के पैसों से उनकी आईआईटी की पढ़ाई का खर्च उठाया था, आईआईटी संस्थान देश की जनता के टैक्स के पैसों से चलते हैं, इसलिए उनका उन लोगों के प्रति कुछ फर्ज बनता है, जिसे उन्हें चुकाना है।' स्वामी ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा में टॉप किया और 1991 में केरल कैडर में शामिल हो गए।
भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम
राजू नारायण स्वामी के करियर में कई बार उनका ट्रांसफर हुआ है। कहा जाता है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार के सामने आंख मूंदने से साफ इनकार कर दियाी था। आईआईटी कानपुर की वेबसाइट पर एक पोस्ट में लिखा है: “डॉ. राजू नारायण स्वामी एक IAS अधिकारी हैं, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं। अवैध जमीन सौदों, रियल-एस्टेट कारोबारियों और राजनीतिक नौकरशाहों के खिलाफ उनकी लगातार लड़ाई उनके जिद्दी स्वभाव की वजह से है , जैसा कि वे खुद कहते हैं, जब हालात 'गलत' हो जाते हैं।
उन्होंने अवैध भूमि सौदों, भ्रष्ट रियल-एस्टेट कारोबारियों और राजनीतिक नौकरशाहों के खिलाफ एक निरंतर और अथक लड़ाई लड़ी है। जब भी कोई स्थिति या कार्य 'अनुचित' हो जाता है, तो वे अपने सख्त रुख के लिए अपने 'ज़िद्दी' स्वभाव को जिम्मेदार मानते हैं।
34 सालों में 32 तबादले
पोस्ट के अनुसार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस नीति के लिए 34 सालों तक चले अपने करियर में स्वामी का 32 बार तबादला हुआ। एक समय तो उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर यह सवाल भी उठाया था कि जब उन्हें कोई सार्थक जिम्मेदारी ही नहीं सौंपी गई है, तो फिर उन्हें वेतन क्यों दिया जा रहा है।
जनता का अपार समर्थन
हालांकि उनका करियर राजनीतिक विवादों से भरा रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी इसी बेखौफ लड़ाई ने उन्हें आम जनता के बीच एक हीरो बना दिया है और उन्हें लोगों का भारी समर्थन मिला है।




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