UPSC CSE Result 2025: संभल के देव दुडेजा का कमाल, चाय बेचने वाले के बेटे ने UPSC में पाई 152वीं रैंक
UPSC CSE Result 2025: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक होनहार युवा देव दुडेजा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 152वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार का नाम रोशन किया है।

UPSC CSE Result 2025: सफलता किसी सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक होनहार युवा देव दुडेजा ने। देव ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 152वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो अभावों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
देव दुडेजा के पिता संभल में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते हैं। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद, देव ने कभी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत और लगन से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का रास्ता साफ कर लिया है।
चाय की दुकान से सिविल सेवा तक का सफर
देव का बचपन अभावों के बीच बीता है। उनके पिता की चाय की दुकान ही घर की आय का मुख्य स्रोत रही है। देव ने अपनी शुरुआती शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी की और हमेशा पढ़ाई में मेधावी रहे। यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के दौरान भी उनके सामने कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने अपने पिता के कठिन परिश्रम को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
सफलता का मंत्र और मेहनत
देव दुडेजा ने बताया कि यूपीएससी की परीक्षा पास करना उनका बचपन का सपना था। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान अनुशासन और धैर्य को सबसे ऊपर रखा। देव के अनुसार, परीक्षा के लिए सही रणनीति और नियमितता बहुत जरूरी है। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई और अपना पूरा ध्यान केवल पढ़ाई पर केंद्रित रखा।
उनकी इस सफलता पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनके पिता, जो वर्षों से दूसरों को चाय पिलाकर अपने बेटे का भविष्य संवार रहे थे, आज अपनी खुशी के आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। उनका कहना है कि देव की मेहनत ने आज उनके सिर को गर्व से ऊंचा कर दिया है।
जिले में हर्ष की लहर
देव की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही संभल में फैली, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने देव और उनके परिवार को सम्मानित किया। देव अब एक आईपीएस अधिकारी के रूप में देश की सेवा करने के लिए तैयार हैं।
देव दुडेजा की यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि इरादे मजबूत हों और संकल्प अडिग, तो दुनिया की कोई भी बाधा आपको अपनी मंजिल पाने से नहीं रोक सकती। एक चाय बेचने वाले के बेटे का आईपीएस अधिकारी बनना बदलते भारत की उस तस्वीर को दर्शाता है जहां प्रतिभा किसी भी वर्ग या आर्थिक स्थिति से निकलकर शीर्ष पर पहुंच सकती है।




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