UPSC 2025: गूगल की नौकरी, कैलिफोर्निया से तैयारी; लखनऊ के पीयूष ने UPSC में लहराया परचम
कैलिफोर्निया में गूगल की नौकरी के साथ साथ हर दिन सिर्फ 2 3 घंटे पढ़ाई कर लखनऊ के पीयूष कपूर ने यूपीएससी परीक्षा में 402वीं रैंक हासिल की है, पढ़ें उनकी प्रेरणादायक कहानी।

सफलता की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सीधे दिल में उतर जाती हैं और सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि अगर इंसान ठान ले, तो दुनिया की कोई भी सरहद या वक्त का फासला उसे रोक नहीं सकता। ये कहानी है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले 32 साल के नौजवान पीयूष कपूर की। एक ऐसा लड़का, जिसने सात समंदर पार अमेरिका के कैलिफोर्निया में बैठकर ना सिर्फ दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी 'गूगल' (Google) में दिन रात काम किया, बल्कि अपनी नींद कुर्बान कर देश की सबसे कठिन परीक्षा 'यूपीएससी' (UPSC) को भी फतेह कर लिया।
पीयूष ने हाल ही में घोषित हुए सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में 402वीं रैंक हासिल कर एक शानदार मिसाल कायम की है। उनकी इस कामयाबी ने साबित कर दिया है कि अगर आपके इरादे लोहे जैसे मजबूत हों, तो 10,000 मील की दूरी भी आपके सपनों के आड़े नहीं आ सकती। पीयूष का ये सफर कतई आसान नहीं था। वो पिछले कई सालों से दो अलग अलग महाद्वीपों की जिंदगी एक साथ जी रहे थे। दिन के उजाले में वो माउंटेन व्यू, कैलिफोर्निया के गूगल ऑफिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर कोडिंग में उलझे रहते थे, और रात होते ही वो भारत की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा की किताबों और करंट अफेयर्स में डूब जाते थे।
परिवार बना सबसे बड़ा सहारा
विदेश में अकेले रहकर पढ़ाई करना, वो भी तब जब आपको पहले की कोशिशों में नाकामी मिल चुकी हो, किसी भी इंसान को अंदर से तोड़ सकता है। पीयूष के लिए भी ये सफर अकेलेपन और निराशा से भरा था। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में उनका परिवार उनके लिए एक मजबूत चट्टान की तरह खड़ा रहा। ये पीयूष का यूपीएससी में पांचवां प्रयास था, और आखिरकार उनकी अथक मेहनत रंग लाई। उनके पिता अरुण कपूर, जो एक रिटायर्ड बैंकर हैं, अपने बेटे की इस शानदार कामयाबी पर बेहद खुश हैं। वो फख्र से कहते हैं, "मुझे पीयूष की इस उपलब्धि पर बहुत गर्व है। हमने तमाम मुश्किलों और बाधाओं को उसकी ताकत में बदल दिया और अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहे। भले ही ये उसका पांचवां अटेंप्ट था, लेकिन उसने कभी भी पिछली नाकामियों को खुद पर हावी नहीं होने दिया।"
आईआईटी से लेकर गूगल तक का सफर
पीयूष की पढ़ाई लिखाई की बात करें तो वो हमेशा से एक होनहार और कुशाग्र छात्र रहे हैं। उन्होंने आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उनका चयन गूगल जैसी दिग्गज टेक कंपनी में हो गया। गूगल में रहते हुए उन्होंने जीमेल (Gmail) को स्पैम और फिशिंग जैसे बड़े साइबर खतरों से बचाने वाले सुरक्षा मैकेनिज्म को तैयार करने में अपना अहम योगदान दिया। गूगल में एक लीडरशिप रोल निभाते हुए और इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालते हुए यूपीएससी जैसे विशाल समंदर को पार करना अपने आप में एक बहुत बड़ा टास्क है।
12 घंटे की पढ़ाई नहीं, ये था पीयूष का मंत्र
इस मुश्किल काम के लिए पीयूष ने एक बेहद प्रैक्टिकल और यथार्थवादी रणनीति अपनाई। अपनी तैयारी के तरीके को लेकर पीयूष कहते हैं, "मेरा मंत्र बहुत सीधा सा था 'इंटेंसिटी (Intensity) से ज्यादा कंसिस्टेंसी (Consistency) पर ध्यान देना।' मैं उन लोगों में से बिल्कुल नहीं था जो एक दिन में 12 12 घंटे लगातार पढ़ाई करने का दावा करते हैं, क्योंकि वो लंबे समय तक संभव नहीं है। इसके बजाय, मैंने हर दिन 2 से 3 घंटे की गहरी और पूरी तरह से फोकस वाली पढ़ाई पर जोर दिया।" दिन भर की थकान मिटाने और खुद को मानसिक रूप से फिट रखने के लिए पीयूष अपना खाली वक्त जिम में बिताना पसंद करते थे।
टाइम जोन का मिला अनोखा फायदा
सबसे दिलचस्प बात ये रही कि अमेरिका और भारत के बीच का 13 घंटे का टाइम गैप (समय का अंतर) पीयूष के लिए कोई रुकावट बनने के बजाय एक वरदान साबित हुआ। पीयूष बताते हैं, "जब भारत में हर सुबह अखबार, करंट अफेयर्स के नए अपडेट्स और कोचिंग का स्टडी मटेरियल पब्लिश होता था, तब कैलिफोर्निया में शाम हो रही होती थी। इससे मुझे ये गजब का फायदा हुआ कि मैं बिना अपने काम को डिस्टर्ब किए, लगभग रियल टाइम में भारत की ताजा जानकारी हासिल कर लेता था। जब तक मेरी अमेरिकी जॉब की सुबह होती और काम शुरू होता, तब तक मैं अपनी फोकस्ड पढ़ाई पूरी कर चुका होता था।" पीयूष ने इस परीक्षा में गणित (Mathematics) को अपने वैकल्पिक विषय (Optional Subject) के रूप में चुना था।
'प्रोडक्ट बनाने से लेकर देश बनाने तक'
जब पीयूष से ये पूछा गया कि इतनी शानदार और हाई पेइंग टेक जॉब छोड़कर वो भारतीय प्रशासनिक सेवा में क्यों आना चाहते हैं, तो उनका जवाब दिल जीतने वाला था। उन्होंने बताया कि उनके अंदर अपने देश के करीब रहकर काम करने की एक गहरी इच्छा पैदा हो रही थी। वो पूरी शिद्दत से कहते हैं, "मैं सिर्फ प्रोडक्ट बनाने (Building Products) तक सीमित नहीं रहना चाहता था, बल्कि मैं देश बनाने (Building the Nation) की दिशा में काम करना चाहता था।" पीयूष का मानना है कि वो टेक्नोलॉजी या तकनीक से दूर नहीं जा रहे हैं, बल्कि वो इसके असर को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से निकालकर उन सरकारी और प्रशासनिक सिस्टम तक ले जाना चाहते हैं जो आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाते हैं।
पीयूष ने यूपीएससी के इतने बड़े और डरावने सिलेबस को एक 'सिस्टम डिजाइन प्रॉब्लम' की तरह देखा और उसी हिसाब से उसे छोटे छोटे हिस्सों में बांटकर हल किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए पूरी तरह से डिजिटल नोट मेकिंग टूल्स और ऑनलाइन रिसोर्सेज पर भरोसा किया। सफलता के इस सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचने के बाद भी पीयूष अपनी जड़ों से गहरे जुड़े हुए हैं। अमेरिका में रहते हुए वो अपने शहर लखनऊ के लजीज कबाब और नवाबी खानपान को बहुत मिस करते हैं और अब जल्द से जल्द अपने घर, अपने वतन वापस लौटना चाहते हैं।




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