RRB ALP Recruitment 2026: रेलवे लोको पायलट भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव, अब एप्टीट्यूड टेस्ट तय करेगा आपकी मेरिट
RRB ALP Recruitment 2026: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने असिस्टेंट लोको पायलट भर्ती की चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव कर दिया है। फाइनल मेरिट लिस्ट सीबीटी-2 पार्ट-ए और सीबीएटी, कंप्यूटर बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट के अंकों को 50:50 के अनुपात में जोड़कर बनेगी।

RRB ALP Recruitment 2026: भारतीय रेलवे में लोको पायलट (ALP) बनने की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने असिस्टेंट लोको पायलट भर्ती की चयन प्रक्रिया और फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार करने के फॉर्मूले में ऐतिहासिक बदलाव कर दिया है। अब केवल किताबी ज्ञान या तकनीकी विषयों में माहिर होना आपको इंजन तक नहीं पहुंचाएगा, बल्कि आपकी मानसिक सतर्कता और निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही मायने रखेगी।
क्या है नया 50:50 का मेरिट फॉर्मूला?
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार करते समय CBT-2 (पार्ट-ए) और CBAT (कंप्यूटर बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट) दोनों के अंकों को बराबर महत्व दिया जाएगा।
नया नियम: अब मेरिट में CBT-2 के 50% अंक और CBAT के 50% अंकों को जोड़ा जाएगा।
पुराना नियम: इससे पहले तकनीकी परीक्षा यानी CBT-2 को 70% वेटेज मिलता था, जबकि एप्टीट्यूड टेस्ट (CBAT) का हिस्सा केवल 30% होता था।
रेलवे बोर्ड ने सभी RRB जोन को निर्देश दिया है कि आगामी भर्तियों से इसी नए फॉर्मूले को लागू किया जाए।
क्यों महसूस हुई बदलाव की जरूरत?
अक्सर यह देखा गया है कि जो छात्र थ्योरी और तकनीकी परीक्षाओं (CBT-2) में बहुत अच्छे अंक लाते थे, वे 70% वेटेज के कारण सीधे मेरिट में आ जाते थे। अगर उनका एप्टीट्यूड टेस्ट (CBAT) का स्कोर कम भी रहता था, तो भारी वेटेज की वजह से वे संभल जाते थे।
रेलवे बोर्ड का मानना है कि लोको पायलट की नौकरी सिर्फ तकनीकी ज्ञान के भरोसे नहीं की जा सकती। ट्रेन चलाते समय सतर्कता, तेज निर्णय लेने की क्षमता, दिशा ज्ञान और याददाश्त (मेमोरी) सबसे अहम होती है। सीबीएटी (CBAT) इन्हीं मनोवैज्ञानिक गुणों की जांच करता है। सुरक्षा के मद्देनजर रेलवे अब चाहता है कि ड्राइवर तकनीकी रूप से जितने सक्षम हों, मानसिक रूप से भी उतने ही चौकन्ने रहें।
उम्मीदवारों पर क्या होगा असर?
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो केवल लिखित परीक्षा रटने में यकीन रखते हैं। अब एप्टीट्यूड टेस्ट में कम नंबर आने पर आप सीधे मेरिट से बाहर हो सकते हैं। इसे अब 'हल्के' में लेना भारी पड़ सकता है। अब उन छात्रों को भी फायदा होगा जिनकी तर्कशक्ति और मनोवैज्ञानिक क्षमताएं बेहतरीन हैं, भले ही उनका तकनीकी स्कोर औसत हो। अब छात्रों को किताबों के साथ-साथ साइको टेस्ट (Psycho Test) और एप्टीट्यूड प्रैक्टिस पर भी बराबर समय खर्च करना होगा। अब सीबीएटी का स्कोर भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। एप्टीट्यूड टेस्ट में कमजोर अभ्यर्थियों को नुकसान हो सकता है।




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