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परीक्षा टालिए मीलॉर्ड... राजस्थान SI परीक्षा 2025 पर संकट? सुप्रीम कोर्ट में याचिका

राजस्थान में 5 -6 अप्रैल को होने वाली RPSC SI भर्ती परीक्षा टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर अदालत जल्द ही अहम सुनवाई करेगी।

Thu, 2 April 2026 11:27 AMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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परीक्षा टालिए मीलॉर्ड... राजस्थान SI परीक्षा 2025 पर संकट? सुप्रीम कोर्ट में याचिका

राजस्थान में सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले हजारों युवाओं की धड़कनें एक बार फिर से तेज हो गई हैं। वजह है राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की तरफ से आयोजित होने वाली सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा। 5 और 6 अप्रैल 2026 को इस इम्तिहान का आयोजन होना तय है, लेकिन परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले ही यह पूरा मामला देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गया है। एक तरफ उम्मीदवार दिन रात एक करके अपनी तैयारियों में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ उनके जहन में यह खौफ सता रहा है कि कहीं ऐन मौके पर परीक्षा टल न जाए। आइए आपको तफसील से बताते हैं कि आखिर पूरा माजरा क्या है और क्यों इस परीक्षा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई नई याचिका

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान SI और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2025 को फौरन टालने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दायर की गई है। यह याचिका सूरजमल मीणा नाम के शख्स की ओर से दाखिल की गई है। इस याचिका में अदालत से गुजारिश की गई है कि 5 और 6 अप्रैल को होने वाले इस इम्तिहान को कम से कम चार हफ्तों के लिए टाल दिया जाए। खबर है कि सुप्रीम कोर्ट इस बेहद गंभीर मामले पर जल्द सुनवाई कर सकता है। अगर अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों को मान लिया, तो लाखों युवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ी खबर होगी।

2021 के फर्जीवाड़े से जुड़े हैं तार

अब सवाल उठता है कि आखिर नई परीक्षा को टालने की नौबत क्यों आ गई? इसके तार सीधे तौर पर साल 2021 में हुई SI भर्ती परीक्षा से जुड़े हैं। 2021 का वो इम्तिहान शुरुआत से ही विवादों के भंवर में फंसा हुआ है। उसमें हुए बड़े पैमाने के फर्जीवाड़े और पेपर लीक मामले ने पूरे सूबे में एक सियासी भूचाल ला दिया था। फिलहाल 2021 के पेपर लीक मामले का अंतिम फैसला राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है और वहां लगातार इसकी सुनवाई चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट में जो नई याचिका लगाई गई है, उसमें उम्मीदवारों का सीधा सा तर्क है कि जब तक 2021 के मामले का साफ सुथरा फैसला नहीं आ जाता, तब तक नई परीक्षा कराने का कोई तुक नहीं बनता। उनका कहना है कि अगर अदालत का फैसला आने से पहले ही नई परीक्षा हो गई, तो पूरी कानूनी प्रक्रिया महज एक रस्म अदायगी या औपचारिकता बनकर रह जाएगी। जिन उम्मीदवारों को 2021 की परीक्षा में हुए धोखे की वजह से नुकसान उठाना पड़ा था, उनके पास इस नई परीक्षा में शामिल होकर अपना भविष्य संवारने का मौका हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। परीक्षा हो जाने के बाद अदालत अगर कोई राहत देती भी है, तो वो उनके किसी काम की नहीं रहेगी।

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महज 4 हफ्ते की मोहलत से बच सकता है भविष्य?

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि अगर परीक्षा को महज चार हफ्ते के लिए आगे बढ़ा दिया जाए, तो इससे सरकार या RPSC को कोई भारी नुकसान नहीं होने वाला है। लेकिन ऐसा करने से उन मेहनती युवाओं का भविष्य जरूर बच सकता है, जो सालों से इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। याद दिला दें कि 9 जनवरी 2026 को दिए गए एक आदेश में खुद सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का जिक्र किया था कि नई परीक्षा से पहले पुराने मामले का फैसला आ जाना चाहिए।

दरअसल 13 से 15 सितंबर 2021 के बीच SI भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके तुरंत बाद ही इसमें बड़े स्तर पर धांधली और पेपर लीक होने की खबरें सामने आने लगीं। मामला इतना गरमाया कि इसकी जांच स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) को सौंप दी गई। जांच की आंच जब आगे बढ़ी, तो RPSC के बड़े बड़े नाम इसकी जद में आ गए। आयोग के सदस्य रामूराम राईका और बाबूलाल कटरा की गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी।

लंबी जद्दोजहद के बाद, 13 अगस्त 2024 को इस दागी परीक्षा को रद्द करवाने के लिए याचिका दायर की गई। लंबी सुनवाई चली और आखिरकार हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले की गंभीरता को समझते हुए 28 अगस्त 2025 को परीक्षा रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जिन उम्मीदवारों का चयन उस परीक्षा में हो चुका था, उन्होंने सिंगल बेंच के फैसले को हाईकोर्ट की डबल बेंच (खंडपीठ) में चुनौती दे दी। खंडपीठ ने फौरी तौर पर सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी।

इसके बाद, परीक्षा रद्द करवाने की मांग कर रहे उम्मीदवार इंसाफ की आस में सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचे। देश की सबसे बड़ी अदालत ने दखल देते हुए सिंगल बेंच के फैसले को फिर से बहाल कर दिया और हाईकोर्ट की खंडपीठ को कड़े निर्देश दिए कि वह 3 महीने के भीतर इस पूरे मामले पर अपना आखिरी फैसला सुनाए।

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