CBSE आज कक्षा 9 से 11 के लिए जारी करेगा नया सिलेबस, रटने की छुट्टी; किन बातों पर होगा जोर
सीबीएसई आज कक्षा 9 से 11 के छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम जारी करेगा। दोपहर तीन बजे यूट्यूब वेबिनार द्वारा स्किल और प्रैक्टिकल लर्निंग आधारित नए सिलेबस की घोषणा होगी।

नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 का आगाज हो चुका है और स्कूलों के गलियारे एक बार फिर छात्रों की रौनक से गुलजार हैं। लेकिन इस शुरुआती उत्साह के बीच एक अजीब सी खामोशी और उलझन भी बनी हुई थी कि आखिर इस साल पढ़ना क्या है? खासकर कक्षा 9 और 11 के छात्रों और उनके अभिभावकों और शिक्षकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत होने वाले बड़े बदलावों को लेकर हर कोई उत्साहित तो था, लेकिन स्पष्ट सिलेबस न होने की वजह से पढ़ाई की रफ्तार रुकी हुई थी। अब यह असमंजस हमेशा के लिए खत्म होने जा रहा है। 2 अप्रैल यानी आज केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक नए युग की शुरुआत करते हुए कक्षा 9 से 11 तक का बहुप्रतीक्षित नया करिकुलम जारी करने जा रहा है।
दोपहर 3 बजे होगा अहम वेबिनार
सीबीएसई इस नए पाठ्यक्रम को बेहद पारदर्शी और इंटरैक्टिव तरीके से लॉन्च कर रहा है। आज दोपहर 3 बजे सीबीएसई के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर एक अहम लाइव वेबिनार का आयोजन किया जाएगा। बोर्ड ने देश भर के स्कूलों, शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों से इस वेबिनार में जुड़ने की अपील की है। इस कार्यक्रम के जरिए अधिकारी नए सिलेबस की बारीकियों, इसके पीछे की सोच और इसे क्लासरूम में किस तरह से लागू किया जाएगा, इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
रटने की पुरानी आदत को कहा जाएगा अलविदा
सालों से हमारी शिक्षा व्यवस्था पर यह सवाल उठते रहे हैं कि हम बच्चों को सिर्फ परीक्षा में नंबर लाने वाली मशीन बना रहे हैं। लेकिन सीबीएसई का यह कदम इस पुरानी और उबाऊ धारणा को पूरी तरह तोड़ने जा रहा है। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) के नए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) और नई शिक्षा नीति के कड़े दिशा निर्देशों के अनुरूप तैयार किए गए इस सिलेबस में भारी बदलाव किए गए हैं।
अब बच्चों को पन्ने भर भर कर रटने की जरूरत नहीं होगी। पूरा फोकस कॉन्सेप्ट को गहराई से समझने, केस स्टडी आधारित सवालों और स्किल बेस्ड एजुकेशन पर शिफ्ट कर दिया गया है। विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को इस तरह से गढ़ा गया है कि क्लासरूम में सीखी गई बातें बच्चों के असल जीवन और भविष्य के करियर में सीधे काम आ सकें।
कक्षा 9 और 11 के लिए क्यों है यह इतना खास?
कक्षा 9 को बोर्ड परीक्षाओं की नींव माना जाता है, जबकि कक्षा 11 भविष्य के करियर (चाहे वह मेडिकल हो, इंजीनियरिंग, आर्ट्स या कॉमर्स) की पहली सीढ़ी होती है। इन दोनों अहम पड़ावों पर सिलेबस का सही और आधुनिक होना बेहद जरूरी था। इस नए ढांचे में पारंपरिक विषयों के बीच की दीवारें गिराई जा रही हैं। किताबी ज्ञान के साथ साथ कोडिंग, फाइनेंशियल लिटरेसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वोकेशनल ट्रेनिंग जैसे आधुनिक विषयों को मुख्यधारा में लाया जा रहा है।
स्कूलों और शिक्षकों के लिए नई चुनौती
यह बदलाव सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है। सीबीएसई ने साफ कर दिया है कि स्कूलों को भी अपनी 'टीचिंग मेथडोलॉजी' यानी पढ़ाने के तरीके में आमूलचूल बदलाव करने होंगे। ब्लैकबोर्ड और चॉक से आगे बढ़कर अब 'एक्टिव लर्निंग', 'प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग' और 'क्लासरूम डिस्कशन' को प्रमुखता देनी होगी। शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र सिर्फ सुनें नहीं, बल्कि सवाल पूछें, विश्लेषण करें और समस्याओं का तार्किक समाधान निकालें।
मूल्यांकन के तरीके में भी होगा बड़ा फेरबदल
बच्चों के मूल्यांकन यानी परीक्षा लेने के तरीके में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब साल के अंत में होने वाली तीन घंटे की परीक्षा के आधार पर ही छात्र की काबिलीयत तय नहीं होगी। नए करिकुलम के तहत फॉर्मेटिव असेसमेंट, क्लासरूम एक्टिविटी, प्रोजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल नॉलेज को रिजल्ट में काफी ज्यादा वेटेज दिया जाएगा। पिछले कुछ दिनों से बाजार में किताबों की कमी और सिलेबस को लेकर जो अफवाहों का बाजार गर्म था, वह आज की घोषणा के बाद शांत हो जाएगा।




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