Azamgarh siblings aditya hriday ayushi upadhyay crack upsc together UPSC 2025: पिता हाईकोर्ट में वकील, मां टीचर; अब बेटा-बेटी बनेंगे अफसर, एक ही दिन दो खुशियां, Career Hindi News - Hindustan
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UPSC 2025: पिता हाईकोर्ट में वकील, मां टीचर; अब बेटा-बेटी बनेंगे अफसर, एक ही दिन दो खुशियां

होनहार भाई-बहन आदित्य हृदय उपाध्याय और आयुषी उपाध्याय ने एक साथ UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम पास किया है, जिसमें उन्हें154वीं और 361वीं रैंक मिली है, जिससे उनके परिवार को बहुत गर्व हुआ है।

Sat, 7 March 2026 08:28 AMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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UPSC 2025: पिता हाईकोर्ट में वकील, मां टीचर; अब बेटा-बेटी बनेंगे अफसर, एक ही दिन दो खुशियां

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को पास करना किसी भी युवा के लिए एक बहुत बड़े सपने के सच होने जैसा होता है। जब रिजल्ट की पीडीएफ (PDF) में किसी का नाम आता है, तो उस पूरे परिवार में जश्न का माहौल बन जाता है। लेकिन जरा सोचिए, उस घर का माहौल कैसा होगा जहां एक नहीं, बल्कि दो-दो बच्चों ने एक ही दिन देश की इस सबसे कठिन परीक्षा को पास कर लिया हो? जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है, बल्कि यह शानदार हकीकत है आदित्यहृदय उपाध्याय और उनकी सगी बहन आयुषी उपाध्याय की।

इस भाई-बहन की जोड़ी ने अपनी शानदार मेधा और अटूट मेहनत के दम पर एक साथ सिविल सेवा परीक्षा पास कर न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे जनपद का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है। जहां भाई आदित्यहृदय उपाध्याय ने 154वीं रैंक (AIR 154) हासिल कर अपनी धाक जमाई है, वहीं उनकी छोटी बहन आयुषी उपाध्याय ने भी 361वीं रैंक (AIR 361) के साथ कामयाबी का परचम लहराया है। आइए, पढ़ाई में हमेशा से अव्वल रहे इस 'गोल्ड मेडलिस्ट' भाई-बहन की इस बेहद खास और प्रेरणादायक सफलता की कहानी को करीब से जानते हैं।

घर से ही मिली थी पढ़ाई और अनुशासन की घुट्टी

कहते हैं कि बच्चे की पहली पाठशाला उसका घर होता है और माता-पिता उसके पहले गुरु होते हैं। आदित्य और आयुषी के मामले में यह बात पूरी तरह से सच साबित होती है। उनके घर में शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई और अनुशासन का एक बेहतरीन माहौल था। इनके पिता सूर्यप्रकाश उपाध्याय लखनऊ हाईकोर्ट (Lucknow High Court) में एक जाने-माने वकील हैं, जबकि मां प्रतिभा उपाध्याय एक इंटर कॉलेज में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।

कानून की बारीकियों को समझने वाले पिता और शिक्षा की अहमियत को जानने वाली मां के साये में पले-बढ़े इन दोनों बच्चों ने बचपन से ही बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करने की कला सीख ली थी। माता-पिता के इसी मार्गदर्शन और सपोर्ट ने आज इन दोनों को देश के सबसे बड़े प्रशासनिक ओहदों तक पहुंचा दिया है।

शुरू से ही 'गोल्ड मेडलिस्ट' रहे हैं आदित्य

154वीं रैंक हासिल करने वाले आदित्यहृदय उपाध्याय की शैक्षणिक यात्रा किसी भी आम छात्र के लिए एक बड़ी मिसाल है। वह शुरू से ही पढ़ाई में इतने होनहार थे कि उन्होंने अपनी बीटेक (B.Tech) की डिग्री देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक 'आईआईटी रुड़की' (IIT Roorkee) से हासिल की। सबसे खास बात यह है कि आदित्य वहां भी कोई आम छात्र नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर रुड़की में भी 'गोल्ड मेडल' (Gold Medal) अपने नाम किया था।

इंजीनियरिंग में महारत हासिल करने के बाद आदित्य ने सिविल सेवाओं की ओर रुख किया और अपनी उसी पुरानी लगन के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। उनकी यह रैंक बताती है कि अगर आपके बेसिक्स मजबूत हों और आपके इरादों में जान हो, तो सफलता झक मार कर आपके पीछे आती है।

बहन आयुषी भी नहीं हैं किसी से कम, CBSE में आ चुकी हैं पूरे देश में थर्ड

अगर आपको लग रहा है कि सिर्फ भाई ही पढ़ाई में अव्वल है, तो जरा बहन आयुषी उपाध्याय के रिकॉर्ड्स पर नजर डाल लीजिए। 361वीं रैंक हासिल करने वाली आयुषी की मेधा का डंका बचपन से ही बजता आ रहा है। उन्होंने सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा में पूरे देश में तीसरा स्थान (All India Rank 3) हासिल कर तहलका मचा दिया था।

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इसके बाद आयुषी ने वकालत की पढ़ाई चुनी और 'नेशनल लॉ कॉलेज' (National Law College) में दाखिला लिया। वहां भी उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की और ग्रेजुएशन की डिग्री में 'गोल्ड मेडल' हासिल किया। एक गोल्ड मेडलिस्ट भाई और एक गोल्ड मेडलिस्ट बहन की यह जोड़ी जब यूपीएससी के मैदान में उतरी, तो नतीजा शानदार होना ही था। सिविल सेवा परीक्षा में यह आयुषी का महज दूसरा प्रयास (Second Attempt) था, और इतनी कम उम्र में उन्होंने यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली।

एक-दूसरे का बने सहारा और लिख दी कामयाबी की इबारत

यूपीएससी का सफर बहुत लंबा, थकाऊ और मानसिक तौर पर तनावपूर्ण होता है। ऐसे में कई बार अच्छे-अच्छे मेधावी छात्र भी टूट जाते हैं। लेकिन आदित्य और आयुषी के पास एक-दूसरे का सबसे मजबूत सपोर्ट सिस्टम था। जब भाई निराश होता, तो बहन हौसला बढ़ाती, और जब बहन को किसी विषय में उलझन होती, तो भाई उसका मेंटर बन जाता। एक ही छत के नीचे बैठकर, एक ही लक्ष्य के लिए दिन-रात पसीना बहाते हुए इस जोड़ी ने दिखा दिया कि अगर घर में सकारात्मक ऊर्जा और एक-दूसरे का साथ हो, तो कोई भी पहाड़ खोदा जा सकता है।

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