NOU : नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी में स्नातक के 11 विषयों में दाखिला, UGC से मिली मान्यता
एनओयू को स्नातक चार वर्षीय पाठ्यक्रम के संचालन के लिए 11 विषयों में नामांकन की मान्यता मिली है। विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगामी शैक्षणिक सत्र से इन विषयों में विद्यार्थियों का नामांकन लेने की तैयारी शुरू कर दी है।

नालंदा खुला विश्वविद्यालय (एनओयू) को स्नातक चार वर्षीय पाठ्यक्रम के संचालन के लिए 11 विषयों में नामांकन की मान्यता मिली है। विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगामी शैक्षणिक सत्र से इन विषयों में विद्यार्थियों का नामांकन लेने की तैयारी शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली द्वारा नालंदा खुला विश्वविद्यालय को पहले चरण में पांच विषयों में स्नातक चार वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति मिली थी। इनमें इतिहास, अर्थशास्त्र, रसायन शास्त्र, जन्तु विज्ञान व वनस्पति विज्ञान शामिल थे। इन विषयों में नामांकन पिछले वर्ष से ही मान्य था।
इस वर्ष यूनिवर्सिटी को छह और विषयों में भी नामांकन की स्वीकृति मिली है। इनमें राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, गणित, भौतिकी तथा भूगोल जैसे विषय शामिल हैं। इन विषयों में कला एवं विज्ञान दोनों संकाय अंतर्गत विद्यार्थियों को स्नातक चार वर्षीय पाठ्यक्रम में नामांकन का अवसर मिलेगा। इस प्रकार अब कुल 11 विषयों में विश्वविद्यालय को नामांकन की मान्यता मिल चुकी है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि यूजीसी (डीईबी) द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर विवि में नामांकन की प्रक्रिया संचालित की जाएगी। नए शैक्षणिक सत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया जुलाई से शुरू होगी। इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय के पोर्टल खुलने के बाद संबंधित विषयों में ऑनलाइन आवेदन कर नामांकन ले सकेंगे। विवि के कुलपति प्रो. रविन्द्र कुमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए यह मान्यता महत्वपूर्ण है। इससे राज्य के उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा, जो नियमित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं या दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे बिहार सहित अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध होंगे। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि नामांकन प्रक्रिया विश्वविद्यालय के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाएगी और यूजीसी के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।
नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी बिहार राज्य की एकमात्र ऐसी यूनिवर्सिटी है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से शिक्षा प्रदान करना है। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 14 मार्च 1987 को बिहार सरकार द्वारा जारी एक अध्यादेश के माध्यम से की गई थी। बाद में, बिहार विधानमंडल द्वारा 'नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी अधिनियम, 1995' पारित किया गया, जिसने उस अध्यादेश का स्थान ले लिया; इसके परिणामस्वरूप, यह यूनिवर्सिटी स्वतः ही इस नए अधिनियम के अधिकार क्षेत्र और क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आ गई। इस यूनिवर्सिटी का नाम प्राचीन भारत की प्रसिद्ध नालंदा यूनिवर्सिटी के नाम पर रखा गया है। वर्तमान में, यह यूनिवर्सिटी नालंदा के बरगाँव स्थित अपने मुख्यालय से संचालित हो रही है। दूरस्थ शिक्षा पद्धति के माध्यम से शिक्षा प्रदान करने के लिए इस यूनिवर्सिटी को 'दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो' (DEB), 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग' (UGC), तथा भारत सरकार के 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय' (MHRD) द्वारा मान्यता प्रदान की गई है।




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