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NEET UG 2026 पेपर लीक का पूरा खेल आया सामने, Telegram से बिके सवाल, 700 छात्रों तक पहुंचा पेपर

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI जांच तेज हो गई है। अब तक 7 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच में गुरुग्राम के डॉक्टर, टेलीग्राम चैट और लाखों रुपये के सौदों का खुलासा हुआ है।

Fri, 15 May 2026 10:53 AMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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NEET UG 2026 पेपर लीक का पूरा खेल आया सामने, Telegram से बिके सवाल, 700 छात्रों तक पहुंचा पेपर

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 का लीक कांड चर्चा में है। जिस परीक्षा के लिए करीब 23 लाख छात्रों ने दिन-रात मेहनत की, उसी परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब इस मामले की जांच कर रही CBI एक-एक परत खोल रही है और हर खुलासे के साथ मामला और बड़ा होता जा रहा है।

CBI जांच में अब तक 7 गिरफ्तारियां

CBI ने इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। बुधवार से देशभर में 14 जगहों पर छापेमारी की गई। गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 7 दिन की हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसी को शक है कि महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से पकड़ा गया धनंजय लोखंडे इस पूरे रैकेट का बड़ा खिलाड़ी हो सकता है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर पेपर परीक्षा से पहले किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसमें कौन-कौन अधिकारी शामिल थे।

गुरुग्राम का डॉक्टर कैसे बना लीक नेटवर्क का हिस्सा

CBI जांच में सामने आया है कि गुरुग्राम का एक डॉक्टर इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा था। आरोप है कि उसने करीब 30 लाख रुपये लेकर NEET का पेपर अलग-अलग राज्यों के करीब 700 छात्रों तक पहुंचाया। इनमें राजस्थान के सीकर जैसे कोचिंग हब भी शामिल थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक यही वह कड़ी थी, जहां से पेपर बड़े स्तर पर फैलना शुरू हुआ। यही वजह है कि अब एजेंसियां डॉक्टर के संपर्कों और उसके डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाल रही हैं।

अप्रैल से शुरू हुई थी पेपर लीक की साजिश

CBI के मुताबिक इस साजिश की शुरुआत अप्रैल 2026 में हो गई थी। जांच में सामने आया कि नासिक के शुभम नाम के युवक ने यश यादव को बताया था कि मंगलीलाल नाम का व्यक्ति अपने छोटे बेटे के लिए लीक पेपर खरीदना चाहता है। इसके बदले 10 से 12 लाख रुपये देने की बात हुई थी। इसके बाद व्हाट्सऐप पर बातचीत शुरू हुई और पेपर अरेंज करने का दावा किया गया। परीक्षा से तीन दिन पहले छात्रों के 10वीं और 12वीं के दस्तावेज, रोल नंबर और सिक्योरिटी के तौर पर चेक मांगे गए।

टेलीग्राम पर भेजे गए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर

जांच में पता चला कि यश यादव को टेलीग्राम के जरिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के PDF भेजे गए थे। दावा किया गया था कि इनमें 500 से 600 सवाल ऐसे होंगे जिनसे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पक्का हो सकता है। CBI ने मोबाइल फोन जब्त किए हैं जिनमें चैट, PDF और कई डिजिटल सबूत मिले हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि बरामद फाइलों में वही सवाल थे जो असली परीक्षा में पूछे गए।

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10 लाख की डील और छात्रों तक पहुंचा पेपर

CBI के मुताबिक मंगलीलाल खटीक को यह पेपर 29 अप्रैल को टेलीग्राम के जरिए मिला। जांच में खुलासा हुआ कि करीब 150 सवाल मैच होने पर 10 लाख रुपये देने की डील हुई थी। इसके बाद मंगलीलाल ने पेपर की प्रिंट कॉपी अपने बेटे अमन बिवाल, रिश्तेदारों और दूसरे छात्रों तक पहुंचाई। इतना ही नहीं, उसने अपने बेटे के दोस्तों और एक शिक्षक सत्यनारायण को भी पेपर और उत्तर शीट पैसे लेकर दी।

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सीकर कोचिंग कनेक्शन भी आया सामने

पूछताछ में विकास बिवाल ने बताया कि सीकर में NEET कोचिंग के दौरान उसकी मुलाकात यश यादव से हुई थी। वहीं पहली बार लीक पेपर का ऑफर मिला। विकास ने जांच एजेंसी को बताया कि उससे और छात्रों को जोड़ने के लिए कहा गया था। बदले में फ्री में पेपर देने का लालच दिया गया। इसके बाद कई छात्रों की जानकारी व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के जरिए साझा की गई।

मोबाइल चैट और डिलीट डेटा से मिल रहे बड़े सुराग

CBI को यश यादव के फोन से कई आपत्तिजनक चैट मिली हैं। इनमें मंगलीलाल और विकास बिवाल के साथ बातचीत शामिल है। एक iPhone से कुछ चैट डिलीट मिली हैं, जिसे अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि डिलीट डेटा से कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या इस पूरे मामले में NTA या किसी सरकारी विभाग के अधिकारी भी शामिल थे।

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NTA अधिकारियों की भूमिका पर भी जांच

CBI ने साफ कहा है कि जांच अब “बड़ी साजिश” की दिशा में बढ़ रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर परीक्षा से पहले पेपर बाहर कैसे आया और इसमें सिस्टम के अंदर बैठे कौन लोग शामिल थे। यही वजह है कि अब जांच सिर्फ छात्रों और दलालों तक सीमित नहीं है, बल्कि NTA और दूसरे विभागों के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ चुकी है।

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