'बेटी ने NEET पास की पर MBBS के लिए ईरान गई' डॉक्टरी करने ईरान क्यों जाते हैं भारतीय छात्र, क्या होती है फीस
MBBS From Iran : ईरान में मेडिकल एजुकेशन हासिल करने वाले छात्रों में ज्यादातर जम्मू-कश्मीर से हैं। ईरान की सस्ती एमबीबीएस की पढ़ाई भारतीय छात्रों को अपनी तरफ खींचती है।

मेरी बेटी ने NEET परीक्षा पास कर ली थी लेकिन भारत में एमबीबीएस (MBBS) की फीस बहुत महंगी है, इसलिए मजबूरन उसे डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए ईरान जाना पड़ा। जब हमने उसे वहां भेजा था, तो हमने कभी ऐसे हालात के बारे में सोचा भी नहीं था। वहां की लड़कियां ब्लास्ट और मिसाइल की आवाजों की वजह से रात में सो नहीं पातीं। आज सुबह मेरी बेटी ने मुझे बताया कि पास में हुए एक धमाके के बाद उसके हॉस्टल की छत से प्लास्टर गिर गया। ये दुख है दिल्ली के कुंवर शकील अहमद का जिनकी बेटी मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच ईरान के तेहरान में फंसी हुई है। कुंवर शकील अहमद हर पल अपनी बेटी की हिफाजत की दुआ कर रहे हैं। उनकी बेटी की ही तरह ईरान में सैकड़ों भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। भारत सरकार उनकी वतन वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 1200 स्टूडेंट्स अभी ईरान में फंसे हुए हैं।
क्यों हर साल MBBS करने विदेश जाते हैं भारतीय छात्र
अब सवाल है कि हर साल इतने अधिक संख्या भारतीय छात्र विदेश क्यों जाते हैं। वे ईरान को क्यों चुनते हैं? भारत में हर साल करीब 25 लाख स्टूडेंट्स मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट देते हैं जिसमें से करीब 13 लाख पास हो पाते हैं। लेकिन नीट क्वालिफाई करने वाले इन 13 लाख स्टूडेंट्स के लिए देश में एमबीबीएस की सिर्फ 1.28 लाख सीटें ही हैं। यह स्थिति हर साल देखने को मिलती है। नीट पास विद्यार्थियों में से अच्छी रैंक पाने वालों को ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सस्ती एमबीबीएस की सीट मिल पाएगी। देश में एमबीबीएस की बेहद कम सीटें और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की भारी भरकम फीस के चलते डॉक्टर बनने का ख्वाब संजोए हजारों स्टूडेंट्स विदेश से एमबीबीएस करने की ऑप्शन चुनते हैं। बहुत से तो ऐसे होते हैं जिन्हें देश में ही प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस सीट मिल रही होती है लेकिन उसकी भारी भरकम फीस के चलते उन्हें ईरान, बांग्लादेश, यूक्रेन, रूस जैसे देशों का रुख करना पड़ता है। ये ऐसे देश हैं जहां एमबीबीएस का खर्च भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से काफी सस्ता पड़ता है। भारत की तुलना में इन देशों में कम नीट मार्क्स से दाखिला लेना संभव है।
ईरान क्यों चुना जाता है
ईरान में मेडिकल एजुकेशन हासिल करने वाले छात्रों में ज्यादातर जम्मू-कश्मीर से हैं। ईरान की सस्ती एमबीबीएस की पढ़ाई भारतीय छात्रों को अपनी तरफ खींचती है। भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में MBBS करने में 75 लाख से सवा करोड़ रुपये तक खर्च हो जाते हैं। इसके उलट ईरान में पूरे एमबीबीएस कोर्स की फीस 15 लाख से 25 लाख है। इसके अलावा रहने-खाने का खर्च 10 हजार से 12 हजार से होता है।
ईरान की कई यूनिवर्सिटी ग्रेजुएशन स्तर पर 4 वर्षीय डॉक्टर ऑफ मेडिसन कोर्स संचालित करती हैं, जिसे एमबीबीएस के समकक्ष माना जाता है। इस कोर्स की फीस की बात करें इसकी फीस 6 लाख रुपये प्रतिवर्ष है। ईरान में कई सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटीज 100 साल से भी पुरानी हैं। साथ ही वहां के अस्पताल बड़े टीचिंग-हॉस्पिटल्स होते हैं। जिनका भारतीय छात्रों को फायदा मिलता है। भारत के नेशनल मेडिकल कमीशन और डब्ल्यूएचओ ईरानी मेडिकल यूनिवर्सिटीज को मान्यता देते हैं। मरीजों की संख्या भी अधिक है, जिससे अच्छी क्लिनिकल प्रैक्टिस हो जाती है।
इसके अलावा ईरान की मेडिकल यूनिवर्सिटीज में NEET के स्कोर के आधार पर दाखिला ले लिया जाता है। इस वजह से उन्हें कई तरह के एंट्रेंस एग्जाम नहीं देने होते हैं। यहां के दाखिले में तामझाम कम है। इससे भारतीयों को आसानी से दाखिला मिल जाता है।
ईरान की किन यूनिवर्सिटीज में पढ़ते हैं भारतीय?
शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, हमादान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, गोलेस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और केरमान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज जैसे संस्थान ईरान में MBBS के लिए काफी पॉपुलर हैं।
धार्मिक अध्ययन के लिए भी ईरान जाते हैं छात्र
मेडिकल के अलावा भी कुछ भारतीय छात्र धार्मिक अध्ययन के लिए भी ईरान जाते हैं जिसमें शिया समुदाय के छात्र मुख्य हैं। ये छात्र कुम और मशहद जैसे शहरों का रुख करते हैं। राजधानी तेहरान से 150 किमी दूर कुम शहर शिया धार्मिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है।
चेतावनी के बाद भारतीय छात्र अभी ईरान में क्यों
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के ईरान कोऑर्डिनेटर और दक्षिण-पश्चिमी ईरान में केरमान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में MBBS के तीसरे सेमेस्टर के स्टूडेंट 22 साल के फैज़ान नबी ने कहा कि तेहरान में भारतीय एम्बेसी ने 23 फरवरी को एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें लोगों से जाने के लिए कहा गया था, जिसके बाद लगभग आधे भारतीय स्टूडेंट घर लौट आए थे। हालांकि, काफी संख्या में लोगों ने यहीं रहना चुना क्योंकि उन्हें 5 मार्च को ईरान के स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित दो एग्जाम देने थे - एक कॉम्प्रिहेंसिव जनरल साइंस टेस्ट और दूसरा MBBS करिकुलम के तहत इंटर्नशिप एलिजिबिलिटी से जुड़ा।
नबी ने कहा, 'कई लोगों को लगा कि वे एग्जाम पूरे करके चले जाएंगे। उन्हें अचानक इतनी परेशानी बढ़ने की उम्मीद नहीं थी।' अभी ईरान में मौजूद ज्यादातर भारतीय नागरिक अलग-अलग राज्यों की यूनिवर्सिटी में मेडिकल स्टूडेंट हैं, जिनमें से ज्यादातर जम्मू कश्मीर के हैं, साथ ही केरल, यूपी और दूसरे राज्यों के स्टूडेंट भी हैं।




साइन इन