विदेश से मोटी फीस देकर MBBS किया और यूपी में EWS कोटे से डॉक्टर की नौकरी पा ली
यूपी में सीएमओ की ओर से 400 एमबीबीएस डॉक्टरों की भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ था। इंटरव्यू में शामिल हुए कुछ युवाओं ने भारत और विदेशों के निजी मेडिकल कॉलेजों से 50 लाख से एक-डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर एमबीबीएस डिग्री हासिल की।

यूपी में सीएमओ के अधीन खुले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर संविदा एमबीबीएस डॉक्टरों की भर्ती के लिए साक्षात्कार हुआ। इन डॉक्टरों में से कई युवाओं ने विदेश और भारत के निजी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। विदेश और निजी मेडिकल कॉलेज में महंगी पढ़ाई कर एमबीबीएस करने वाले इन डॉक्टरों ने ईडब्ल्यूएस कोटे का सर्टिफिकेट लगाकर सेंटरों पर नियुक्ति पा ली है। इस मामले की शिकायत सूरज कश्यप ने शासन, प्रशासन से की है। आरोप लगाया है कि इन अभ्यर्थियों ने फर्जी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट लगाया है। सीएमओ की ओर से जारी विज्ञापन में 400 एमबीबीएस डॉक्टर साक्षात्कार में शामिल हुए। साक्षात्कार में शामिल हुए कुछ युवाओं ने भारत और विदेशों के निजी मेडिकल कॉलेजों से 50 लाख से एक-डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर डिग्री हासिल की।
विदेश व निजी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले कई युवा डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग के साक्षात्कार के दौरान खुद को ईडब्ल्यूएस कोटे का पात्र बताते हुए नौकरी के लिए प्रमाण पत्र भी लगाया है। इससे उनका चयन ईडब्ल्यूएस कोटे में स्वास्थ्य विभाग ने कर लिया है। इनको सेंटरों पर तैनाती भी दे दी गई है। इस मामले में सूरज कश्यप ने ईडब्ल्यूएस के फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी पाने की शिकायत की है।
आठ लाख आमदनी वाला परिवार ईडब्ल्यूएस का पात्र
नियम है कि ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र उन्हीं लोगों का बनता है, जिनके परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपए तक होती है। इसी आधार पर उस परिवार का ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट जिला प्रशासन जारी करता है। फिर वह ईडब्ल्यूएस कोटे के पात्र माने जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी का आरक्षण ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र से मिलता है। यह 2019 में 103 वें संशोधन के तहत लागू किया गया था।




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