MBBS : AIIMS एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में थे टॉपरों की लिस्ट में शामिल, 10 साल बाद हटा नकल का कलंक, CBI के आरोप खारिज
करीब एक दशक पहले एम्स एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में एक छात्र अपने शानदार प्रदर्शन से टॉपरों की लिस्ट में शामिल हुआ। लेकिन परीक्षा में नकल के संदेह के आधार पर उस पर धोखाधड़ी का केस कर दिया गया। अब सीबीआई ने जो आरोप लगाए थे उसे अदालत ने खारिज कर दिया।

एम्स की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में नकल के आरोप में करीब एक दशक तक कानूनी जंग लड़ने वाले मेडिकल छात्र को अदालत से बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी विनोद कुमार ( बदला हुआ नाम ) को आईपीसी की धारा 420 के आरोपों से मुक्त कर उनके माथे से ‘नकल’ का कलंक मिटा दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल तकनीकी आंकड़े, ऑडिट लॉग और संदेह के आधार पर किसी छात्र पर धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। मामला करीब 10 बरस पहले का है। एक दशक पहले हुई कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा के बाद एम्स को मिली एक गुमनाम ई-मेल के बाद सामने आया था। ई-मेल के आधार पर एम्स के सब-डीन (परीक्षा) ने पुलिस से शिकायत कर मामला दर्ज कराया था। इसके बाद सीबीआई ने जो आरोप लगाए थे उसे अदालत ने खारिज कर दिया।
सीबीआई की दलील खारिज
अदालत ने सीबीआई की इस डिजिटल थ्योरी को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि परीक्षा केंद्र, सीट और कंप्यूटर आवंटन पूरी तरह रैंडम प्रक्रिया से होता है। ऐसे में यह साबित करना जरूरी था कि आरोपी को पहले से पता था कि वह किस अभ्यर्थी के बगल में बैठेगा और उसने इसी जानकारी के आधार पर धोखाधड़ी की योजना बनाई। अदालत ने कहा कि यदि ऐसी जानकारी थी, तो अधिकारी की जांच भी जरूरी थी।
ये लगाए गए थे आरोप
आरोप लगाया गया था कि विनोद कुमार ( बदला हुआ नाम ) ने परीक्षा के दौरान अपने बगल में बैठे एक अन्य उम्मीदवार दिलीप प्रसाद (बदला हुआ नाम) के उत्तर कॉपी किए और टॉपरों की लिस्ट में शामिल हो गए। बगल में बैठे उस उम्मीदवार की और भी शानदार रैंक आई थी। सीबीआई का पूरा मामला एक ऑडिट लॉग रिपोर्ट पर टिका था, जिसमें दावा किया गया था कि विनोद कुमार ने 167 प्रश्नों के वही विकल्प चुने जो दिलीप प्रसाद ने चुने थे और उन्होंने फिजिक्स जैसे जटिल विषयों के सवालों को महज कुछ ही मिनटों में हल कर दिया था।
2020 से पहले अलग होती थी एम्स एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा
आपको बता दें कि वर्ष 2020 से पहले एम्स एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा अलग से होती थी। नीट यूजी प्रवेश परीक्षा से एम्स में एमबीबीएस में दाखिला नहीं मिलता था। वर्ष 2020 से एम्स एमबीबीएस एंट्रेंस को नीट यूजी में मर्ज कर दिया गया। नीट यूजी प्रवेश परीक्षा 2016 से शुरू हुई थी। तब इसे सीबीएसई करा रही थी। 2019 से इसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) कराने लगा।




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