पांच वर्षों में मेडिकल सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, PG की 29080 सीटें; MBBS की कितनी बढ़ीं
बीते 5 सालों में मेडिकल सीटों में रिकॉर्ड बढ़होतरी हुई है। PG की 29080 सीटें बढ़ीं हैं तो वहीं एमबीबीएस की सीटों में शानदार इजाफा हुआ है।

देश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। नेशनल मेडिकल कमीशन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच एमबीबीएस की 48,563 सीटें और पोस्टग्रेजुएट यानी PG की 29,080 सीटें बढ़ाई गई हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि अब ज्यादा छात्र भारत में ही मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे और डॉक्टरों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में लिखित जवाब के जरिए दी। उन्होंने बताया कि मेडिकल शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए कई नए नियम और मानक भी लागू किए गए हैं, ताकि सिर्फ सीटें ही न बढ़ें बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता भी बेहतर हो।
सरकार का लक्ष्य साफ है। देश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना, गांव और छोटे शहरों तक इलाज पहुंचाना और डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात को बेहतर बनाना।
डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात अभी भी चुनौती
भारत में फिलहाल डॉक्टर और आबादी का अनुपात लगभग 1:811 है, वह भी तब जब पंजीकृत डॉक्टरों की 80 प्रतिशत उपलब्धता मानकर यह गणना की जाती है। इसका मतलब है कि बढ़ती आबादी के मुकाबले डॉक्टरों की जरूरत अभी भी बहुत ज्यादा है। इसी कमी को दूर करने के लिए मेडिकल सीटों का विस्तार किया जा रहा है।
मेडिकल सीटें बढ़ाने के पीछे क्या है सोच
सरकार का मानना है कि जब देश में पर्याप्त मेडिकल सीटें होंगी तो छात्रों को विदेश जाने की मजबूरी कम होगी। अभी हजारों छात्र हर साल दूसरे देशों में मेडिकल पढ़ाई के लिए जाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है और कई बार गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठते हैं। नई नीति का मकसद है कि भारत के मेडिकल कॉलेज ही इतनी क्षमता वाले बनें कि यहां पढ़ाई, प्रशिक्षण और रिसर्च का मजबूत माहौल तैयार हो सके।
नए नियमों से बदलेगा मेडिकल शिक्षा का ढांचा
मेडिकल शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए आयोग ने कई महत्वपूर्ण नियम लागू किए हैं, जिनमें इसमें मिनिमम स्टैंडर्ड्स रिक्वायरमेंट्स (MSR), ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन्स 2023, मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन्स के स्टैंडर्ड्स का मेंटेनेंस 2023, और कॉम्पिटेंसी-बेस्ड मेडिकल एजुकेशन करिकुलम गाइडलाइंस 2024 शामिल हैं। इनका उद्देश्य है कि मेडिकल छात्र केवल किताबों तक सीमित न रहें बल्कि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण, मरीजों से जुड़ा अनुभव और आधुनिक स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाए।
केंद्र सरकार की नई योजना से और सीटें जुड़ेंगी
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2028-29 के बीच सरकारी कॉलेजों में 10,023 अतिरिक्त मेडिकल सीटों को मंजूरी दी है। इनमें लगभग 5,000 PG सीटें और 5,023 MBBS सीटें शामिल हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि Centrally Sponsored Scheme के Phase-III के तहत राज्य और केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों, स्वतंत्र PG संस्थानों और सरकारी अस्पतालों को अपग्रेड किया जाएगा। इसका मकसद मौजूदा संस्थानों को मजबूत बनाकर उनकी क्षमता बढ़ाना है।
साल दर साल कैसे बढ़ीं MBBS सीटें
पिछले छह वर्षों में MBBS सीटों में लगातार वृद्धि देखने को मिली।
2020-21 में 2,963 सीटें बढ़ीं।
2021-22 में 8,790 सीटें जुड़ीं।
2022-23 में 7,398 सीटें बढ़ीं।
2023-24 में 9,652 सीटें जोड़ी गईं।
2024-25 में 8,641 सीटें बढ़ीं।
2025-26 में 11,119 सीटों का इजाफा हुआ।
यह आंकड़े दिखाते हैं कि मेडिकल शिक्षा का विस्तार अब एक निरंतर प्रक्रिया बन चुका है, न कि एक बार की पहल।
PG सीटों में भी तेज वृद्धि
विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत को देखते हुए PG सीटों में भी बढ़ोतरी की गई।
2020-21 में 4,983 सीटें बढ़ीं।
2021-22 में 4,705 सीटें जुड़ीं।
2022-23 में 2,874 सीटें बढ़ीं।
2023-24 में 4,713 सीटें जोड़ी गईं।
2024-25 में 4,186 सीटें बढ़ीं।
2025-26 में 7,619 सीटों का बड़ा इजाफा हुआ।
PG सीटें बढ़ने का मतलब है कि अब ज्यादा विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होंगे, जिससे सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा देश में ही मजबूत होगी।
राज्यों की भूमिका भी हुई अहम
केवल केंद्र ही नहीं, राज्य सरकारें भी मेडिकल शिक्षा विस्तार में सक्रिय हो गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026-27 बजट में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए बड़ा प्रावधान किया है।
राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 9.12 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए मेडिकल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण क्षेत्र के लिए 37,956 करोड़ रुपये आवंटित किए, जो पिछले वर्ष से लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। राज्य में PPP मॉडल के तहत 16 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना भी बनाई गई है।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा
इस पूरे विस्तार का सबसे बड़ा फायदा मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को मिलेगा। अब सीटें ज्यादा होंगी, कॉलेजों की संख्या बढ़ेगी और सरकारी संस्थानों में पढ़ाई के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे प्रतियोगिता का दबाव थोड़ा संतुलित होगा और योग्य छात्रों को देश में ही अवसर मिल पाएगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर
जब ज्यादा डॉक्टर तैयार होंगे तो जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की तैनाती आसान होगी। अभी कई जगह डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को शहरों की ओर जाना पड़ता है। नई व्यवस्था से यह अंतर कम होने की उम्मीद है।
सरकार का फोकस अब केवल डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार करने पर भी है।




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