MBBS Fees : एमबीबीएस की फीस 4.5 साल की ली जाएगी या 5.5 साल की, सरकार ने स्पष्ट किया नियम
एनएमसी ने उन मेडिकल कॉलेजों को फटकार लगाई है जो एमबीबीएस छात्रों से साढ़े चार वर्ष की बजाय पांच या साढ़े पांच वर्ष की फीस वसूल रहे हैं। आयोग ने कहा कि तय शैक्षणिक समय के लिए ही शुल्क लें।

देश में मेडिकल शिक्षा की निगरानी रखने वाली संस्था नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने उन मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को फटकार लगाई है जो एमबीबीएस छात्रों से साढ़े चार वर्ष की बजाय पांच या साढ़े पांच वर्ष की फीस वसूल रहे हैं। एनएमसी ने साफ कहा है कि छात्रों से उन महीनों की फीस वसूलना नियमों के खिलाफ हैं जिनमें उन्हें पढ़ाया ही नहीं गया है। मेडिकल संस्थानों को किसी भी तरह की पाबंदी से बचने के लिए इस गलत व्यवस्था को तुरंत वापस लेना होगा। आपको बता दें कि केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाला एनएमसी देश में मेडिकल शिक्षा, मेडिकल संस्थानों, पेशे और पेशेवरों की निगरानी करता है।
एनएमसी ने मंगलवार को जारी नोटिस में स्पष्ट किया कि चिकित्सा शिक्षा की शैक्षणिक अवधि केवल साढ़े चार साल (54 महीने) है, जिसके बाद एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप होती है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे केवल तय शैक्षणिक समय के लिए ही शुल्क लें। एनएमसी ने इस आदेश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है ताकि छात्रों का आर्थिक शोषण रोका जा सके।
इंटर्नशिप शुल्क पर रोक
आयोग ने पाया है कि कुछ संस्थान पूरे 5 या 5½ वर्षों की फीस ले रहे हैं, जिसमें इंटर्नशिप की अवधि भी शामिल है। एनएमसी के अनुसार इंटर्नशिप से संबंधित शुल्क वसूलना या स्टाइपेंड न देना नियमों के विरुद्ध है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 'अभिषेक यादव बनाम भारत संघ' मामले में इंटर्नशिप से संबंधित शुल्क लगाने और स्टाइपेंड न देने जैसे मुद्दों को गंभीरता से लिया था। शीर्ष अदालत का कहना था कि फीस संरचना उचित, पारदर्शी, गैर-शोषणकारी और असल में दी जा रही शैक्षणिक सुविधाओं के अनुरूप होनी चाहिए।
जिस अवधि में कोई पढ़ाई नहीं हुई, उसकी फीस क्यों
नोटिस में एनएमसी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि MBBS के लिए फीस केवल 4.5 वर्ष की निर्धारित शैक्षणिक अवधि के लिए ही लिया जाना चाहिए। कुछ कॉलेज 5 या 5.5 वर्षों के लिए फीस ले रहे थे, जिसे एनएमसी ने कोर्स की संरचना के खिलाफ माना है। 5 या 5½ साल की फीस लेना एमबीबीएस कार्यक्रम के शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप नहीं है क्योंकि यह उन अवधियों के लिए शुल्क वसूलने जैसा है जिनमें कोई पढ़ाई नहीं कराई जाती है।
नेक्स्ट का वायरल नोटिफिकेशन फर्जी : एनएमसी
नेशनल मेडिकल कमिशन ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस नोटिस को पूरी तरफ फर्जी करार दिया जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि एमबीबीएस 2022 बैच के लिए नेक्स्ट ( NExT) परीक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है। मंगलवार को नेशनल मेडिकल कमिशन ने इस वायरल नोटिस का खंडन करते हए कहा कि यह सूचना पूरी तरह से फेक है और इसे बनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने सभी विद्यार्थियों और संस्थानों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट www.nmc.org.in पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें।




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