NEET UG: Who get MBBS seats left vacant after fraud detected Supreme Court delivers verdict NEET UG : फ्रॉड पकड़े जाने से खाली हुई MBBS सीटें किसे मिलेंगी, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, Career Hindi News - Hindustan
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NEET UG : फ्रॉड पकड़े जाने से खाली हुई MBBS सीटें किसे मिलेंगी, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

NEET UG MBBS Admission : शीर्ष अदालत ने कहा है कि अगर धोखाधड़ी के कारण कोई सीट खाली होती है, तो संबंधित अधिकारियों का यह फर्ज है कि वे उस सीट को मेरिट के आधार पर अगले पात्र उम्मीदवार को आवंटित करें।

Tue, 7 April 2026 12:11 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान
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NEET UG : फ्रॉड पकड़े जाने से खाली हुई MBBS सीटें किसे मिलेंगी, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

NEET UG MBBS Admission : किसी मेडिकल कॉलेज में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने से खाली हुई एमबीबीएस सीट किसे मिलेगी, इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अगर धोखाधड़ी के कारण कोई सीट खाली होती है, तो संबंधित अधिकारियों का यह फर्ज है कि वे उस सीट को मेरिट के आधार पर अगले पात्र उम्मीदवार को आवंटित करें। यह टिप्पणी करते हुए अदालत ने एक नीट यूजी उम्मीदवार के दाखिले को वैध ठहराया है। यह सीट तब खाली हुई थी जब यह पाया गया कि मूल रूप से चयनित उम्मीदवार ने फर्जी मार्कशीट दिखाकर दाखिला लिया था। यह आदेश जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा दिया गया।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने एनएमसी यानी नेशनल मेडिकल काउंसिल की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हिमाचल हाईकोर्ट ने पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकारी मेडिकल कॉलेज में खाली हुई सीट को प्रतिवादी को वापस देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाई। छात्र को मेरिट लिस्ट में अगला उम्मीदवार होने के बावजूद एडमिशन का फायदा नहीं मिल रहा था।

कोर्ट ने कहा कि खाली हुई सीट को मेरिट लिस्ट में अगले उम्मीदवार को देने से मना नहीं किया जा सकता। इससे कीमती मेडिकल कॉलेज सीट बर्बाद होगी। कोर्ट ने कहा, 'मेडिकल सीट सिर्फ किसी निजी उम्मीदवार का निजी फायदा नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के लिए कीमती संसाधन भी है, जिसे नियामक संस्थाएं जनता के भरोसे के तौर पर अपने पास रखती हैं। ऐसी स्थिति में, जब कोई सीट धोखाधड़ी के कारण खाली हो जाती है तो अधिकारियों का यह फर्ज बन जाता है कि वे मेरिट लिस्ट के अनुसार उस सीट को अगले योग्य उम्मीदवार को दें। प्रशासनिक सुस्ती के कारण किसी सीट को बर्बाद होने देना नीट यूजी (NEET UG) परीक्षा के मूल उद्देश्य को ही खत्म करना है। नीट का मकसद सरकारी मेडिकल संस्थानों में एडमिशन की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना था।'

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2022 का है मामला

मामला 2022 की नीट यूजी परीक्षा से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी ने 17 जनवरी, 2023 को एनएमसी को खाली सीटों के बारे में तुरंत जानकारी दे दी थी, लेकिन एनएमसी ने जून, 2023 में ही जवाब दिया और इस आधार पर अनुमति देने से मना कर दिया कि एडमिशन की आखिरी तारीख (29 दिसंबर, 2022) बीत चुकी थी। एनएमसी के इस फैसले से दुखी होकर उम्मीदवार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की, जिसने उसे राहत दी। इसके बाद एनएमसी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

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नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई, 2026 को

नीट यूजी परीक्षा 3 मई, 2026 को होगी। नीट परीक्षा के जरिए देश के एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस, बीएससी नर्सिंग, बीवीएससी एंड एएच कोर्सेज में दाखिला मिलता है। इस वर्ष से फिजियोथेरेपी कोर्स में भी नीट यूजी से ही दाखिला होंगे। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के ताजा आंकड़ों मुताबिक देश के 824 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 129603 हजार सीटें हैं। देश में सरकारी मेडिकल संस्थानों की संख्या 450 और एमबीबीएस सीटों की संख्या 63160, निजी मेडिकल संस्थानों की संख्या 374 और एमबीबीएस सीटों की संख्या 66443 है।

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