MBBS Exam : एमबीबीएस परीक्षा की कॉपियों में मिली गड़बड़ियों से चीटिंग का शक गहराया, जांच के लिए टीम गठित
एमबीबीएस की परीक्षा में कथित हेरफेर, पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ के आरोपों ने आईजीआईएमएस पटना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के प्रकाश में आने के करीब एक महीने बाद अब जाकर जांच समिति गठित की गई है

एमबीबीएस की परीक्षा में कथित हेरफेर, पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ के आरोपों ने आईजीआईएमएस पटना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के प्रकाश में आने के करीब एक महीने बाद अब जाकर जांच समिति गठित की गई है, जबकि निदेशक के मेल पर 13 मार्च को ही ई-मेल से परीक्षा में धांधली और पैसा लेकर पेपर लीक कराने का आरोप लगा था। इससे पहले प्रारंभिक जांच की जा चुकी है। प्रशासनिक भवन में प्रभारी निदेशक सह डीन (अकादमिक) डॉ. ओम कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। प्रभारी निदेशक डॉ. ओम कुमार ने बताया कि एमबीबीएस और पीजी की अंतिम वर्ष की परीक्षा को लेकर जो आरोप लगे हैं उसकी जांच के लिए पीएसएम के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार की अध्यक्षता में जांच समिति बनी है। इसमें सदस्य के तौर पर डॉ. ज्ञान भाष्कर और डॉ. अश्विनी शामिल हैं। तीनों वरीय फैकेल्टी हैं। अगले सात कार्य दिवस में जांच समिति मामले की जांच करेगी ।
रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। प्राचार्य डॉ. रंजीत गुहा ने संस्थान के निदेशक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. गुहा ने कहा है कि एमबीबीएस छात्रों का यह मामला सीधे मुझसे जुड़ा है। बावजूद इसके प्राचार्य को ही बैठक से बाहर रखा गया। 13 मार्च से अब तक परीक्षा में धांधली के लगे आरोपों को लेकर चार बैठकें हो चुकी हैं। एक भी बैठक में प्राचार्य को नहीं बुलाया गया और ना ही कोई सूचना दी गई। आंतरिक समिति की बैठक में भी नहीं बुलाया गया। जांच समिति बनाए जाने की एक कॉपी प्राचार्य को दी जाती है वह भी नहीं दी गई।
कुछ छात्रों की कॉपी में आगे-पीछे के हस्ताक्षर समान
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आने का दावा किया जा रहा है कि परीक्षा की कॉपी में तीन जगह हस्ताक्षर किया जाता है। कुछ छात्रों की कॉपी में आगे और पीछे का हस्ताक्षर एक समान है और बीच वाले पन्ने पर किए गए हस्ताक्षर अलग हैं। ऐसे ही कई संदेहास्पद संकेत मिलने के दावे किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक ऐसी घटना दो साल पहले भी हुई थी जिसके बाद कोडिंग की व्यवस्था की गई थी। छात्र नेशनल मेडिकल काउंसिल को भी शिकायत कर चुके हैं।




साइन इन