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MBBS Exam : 15 साल से एमबीबीएस में फेल हो रहे छात्र ने दो विषयों में फिर से दी बैक परीक्षा

MBBS Exam : यूपी में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस 2009 बैच का एक छात्र 15 साल बाद भी फाइनल ईयर में दो विषयों फेल हो गया था। फेल होने के बाद उसने फिर से दोनों विषयों का बैक पेपर दिया है।

Sat, 2 May 2026 01:23 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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MBBS Exam : 15 साल से एमबीबीएस में फेल हो रहे छात्र ने दो विषयों में फिर से दी बैक परीक्षा

MBBS Exam : यूपी में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस 2009 बैच का एक छात्र 15 साल बाद भी फाइनल ईयर में दो विषयों फेल हो गया था। फेल होने के बाद उसने फिर से दोनों विषयों का बैक पेपर दिया है। जिले के झंगहा क्षेत्र का छात्र 2009 में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था। वर्ष 2024 में फाइनल ईयर की परीक्षा दी थी। इसके अलावा दो और छात्रों का रिजल्ट अब तक जारी नहीं हो सका है। इसमें एक छात्र आगरा का है। दूसरा छात्र कुशीनगर का रहने वाला है, उसने 2010 बैच में प्रवेश लिया था।

कुछ माह पहले साल 2009 बैच का छात्र 15 साल बाद भी फाइनल ईयर में फेल हो गया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर गोरखपुर विश्वविद्यालय ने उसका रिजल्ट जारी किया था। जिसमें दो विषयों में बैक लगी थी। छात्र ने वकीलों से सलाह लेकर दोबारा परीक्षा की तैयारी कर बैक के पेपर दिए थे।

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झंगहा का रहने वाला यह छात्र ने 2009 में एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन लिया था। हर साल उसके कम से कम दो पेपर में बैक लग जाती। जैसे-तैसे पढ़ाई चलती रही। साल 2024 में उसने फाइनल ईयर की परीक्षा दी, लेकिन रिजल्ट जारी होने के बजाय डीडीयू ने रोक दिया। विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के नए नियमों को वजह बताया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्य परिषद की बैठक में मामले को रखा था। जिसके बाद कार्य परिषद ने एनएमसी को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे थे।

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दरअसल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की संबद्धता वर्ष 1972 से लेकर 2024 तक दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) से थी। एमबीबीएस छात्रों के अंक पत्र और प्रमाण पत्र विश्वविद्यालय से ही जारी होते थे। परीक्षा भी विश्वविद्यालय लेता था। वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक अमरेन्द्र सिंह ने तीन छात्रों के परिणाम को लेकर सवाल उठाया। अपने पत्र में उन्होंने बताया कि इस वर्ष परीक्षा देने वाले तीन छात्र क्रमशः 1998, 2009 और 2010 बैच में प्रवेश लिया है। इतने लंबे समय तक कोई कैसे एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकता है, जबकि यह कोर्स 4.5 वर्ष का है।

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एनएमसी के नियमों का उल्लंघन ( NMC MBBS maximum duration rules )

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के स्नातक चिकित्सा शिक्षा नियम (जीएमईआर) 2023 के अनुसार, एमबीबीएस के पहले वर्ष की परीक्षा के लिए अधिकतम चार प्रयास ही मिलते हैं। छात्र को चार साल के अंदर इसे पास करना होता है। पूरे कोर्स को 9 साल के अंदर पूरा करना अनिवार्य है, जिसमें इंटर्नशिप शामिल नहीं होती।

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