AC से परहेज, नोटबुक में बार बार लिखे 3 शब्द, टॉपर शुभम ने कैसे की थी JEE एडवांस्ड की तैयारी
बिहार के गया जी निवासी शुभम कुमार ने वर्ष 2026 में ऐसा ही कर दिखाया है। जेईई मेन के दोनों सत्रों में 100 पर्सेंटाइल हासिल करने के बाद उन्होंने जेईई एडवांस्ड में 360 में 330 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक (एआईआर)-1 हासिल की है।

देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन और एडवांस्ड में शीर्ष प्रदर्शन करना हर छात्र का सपना होता है, लेकिन बहुत कम छात्र ऐसे होते हैं जो दोनों परीक्षाओं में अपनी बादशाहत कायम रख पाते हैं। बिहार के गया जी निवासी शुभम कुमार ने वर्ष 2026 में ऐसा ही कर दिखाया है। जेईई मेन के दोनों सत्रों में 100 पर्सेंटाइल हासिल करने के बाद उन्होंने जेईई एडवांस्ड में 360 में 330 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक (एआईआर)-1 हासिल की है। जेईई एडवांस्ड की प्रक्रिया जब से शुरू हुई ऐसा प्रदर्शन करनेवाले वे इकलौते परीक्षार्थी हैं। वर्ष 2013 से जेईई एडवांस्ड हो रहा है। पहले संयुक्त आईआईटी प्रवेश परीक्षा होती थी। उस समय वर्ष 2008 में पटना के शितिकांश कश्यप ने ऑल इंडिया रैंक एक प्राप्त किया था। लेकिन वे जेईई मेन की एक ही परीक्षा के बाद संयुक्त आईआईटी परीक्षा के टॉपर बने थे।
शुभम की उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने इससे पहले जेईई मेन 2026 के दोनों सत्रों में 100 पर्सेंटाइल हासिल किया था। जनवरी में आयोजित पहले सत्र में देशभर के केवल 12 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल प्राप्त किए थे, जिनमें शुभम भी शामिल थे। अप्रैल में दूसरे सत्र में 26 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किया और शुभम ने एक बार फिर यह उपलब्धि दोहराई। वे बिहार से 100 पर्सेंटाइल प्राप्त करने वाले प्रमुख छात्रों में शामिल रहे। बिहार के टॉपर भी बने। हालांकि उसने दिल्ली जोन से परीक्षा दी। हाल के वर्षों पर नजर डालें तो 2021 में मृदुल अग्रवाल, 2022 में आरके शिशिर, 2023 में वाविलाला चिदविलास रेड्डी, 2024 में वेद लाहोटी और 2025 में राजित गुप्ता ने जेईई एडवांस्ड में एआईआर-1 हासिल किया था। वर्ष 2026 में यह उपलब्धि शुभम कुमार के नाम दर्ज हुई है। इनमें सभी ने दोनों परीक्षाओं में 100 पर्सेंटाइल हासिल नहीं किया था। शुभम ने सिर्फ राज्य का ही नाम रोशन नहीं किया है, बल्कि बिहारी प्रतिभा का लोहा भी मनवाया।
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मेन्स में थी 6th रैंक
शुभम ने जेईई मेन्स में 6वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन उन्होंने एडवांस्ड में अपनी कड़ी मेहनत के दम पर सबको पीछे छोड़ते हुए ऑल इंडिया पहली रैंक पर कब्जा जमा लिया।
अपनी सफलता से खुश होकर उन्होंने इसका श्रेय अपनी लगन से की गई तैयारियों को दिया। कुमार ने पीटीआई को बताया, “मैं पिछले दो सालों से JEE Advanced की तैयारी कर रहा था, और मुझे उम्मीद थी कि मेरी कड़ी मेहनत मुझे एक अच्छी रैंक दिलाने में मदद करेगी। अब जब मैंने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर ली है, तो मुझे बहुत खुशी हो रही है।' शुभम ने कहा कि IIT में पढ़ने और कंप्यूटर साइंस में करियर बनाने की उनकी इच्छा काफी समय से थी, और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने अपनी बहन को भी इसका श्रेय दिया, जो IIT पटना की छात्रा है, और जिसने उन्हें सही मार्गदर्शन दिया।
कैसे की जेईई एडवांस्ड की तैयारी
शुभम ने रोज एक अनुशासित दिनचर्या का भी पालन किया, जो निरंतरता, आत्मविश्वास से भरी थी। उसमें कुछ अनोखी आदतें भी थीं। इनमें से एक आदत थी 'मैनिफेस्टेशन रिचुअल' (इच्छा को साकार करने का अभ्यास) और दूसरा एयर कंडीशनिंग (AC) पर निर्भर न रहने का फैसला।
'मैनिफेस्टेशन' की आदत
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार शुभम की एक 'मैनिफेस्टेशन' की आदत थी, जिसका उन्होंने अपनी पूरी तैयारी के दौरान पालन किया। वह नियमित रूप से अपनी नोटबुक पर "JEE Advanced Topper" शब्द लिखते थे। यह अभ्यास महज एक प्रेरक पैक्टिस से कहीं बढ़कर था। रिपोर्ट के मुताबिक शुभम का मानना है कि विज़ुअलाइजेशन (कल्पना करना) और आत्मविश्वास छात्रों को एकाग्र रहने में मदद करते हैं, और तैयारी की लंबी और अक्सर कठिन प्रक्रिया के दौरान उन्हें भटकने से रोकते हैं। उनके लिए उन शब्दों को बार-बार देखने से उनका लक्ष्य और मजबूत होता था और मुश्किलों या आत्मविश्वास की कमी के दौर में भी उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने में मदद मिलती थी।
उनकी रोजाना की दिनचर्या कैसी थी?
शुभम ने एक संतुलित रूटीन अपनाया। बीते दिनों हुई पिछली बातचीत में उन्होंने कहा था कि "कोई भी दिन में 18 घंटे पढ़ाई नहीं कर सकता।" पढ़ाई के अवास्तविक लक्ष्य तय करने के बजाय, उन्होंने अपनी क्लासरूम कोचिंग के अलावा रोजाना छह से आठ घंटे की 'सेल्फ़-स्टडी' (खुद से पढ़ाई) पर ध्यान केंद्रित किया।
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रिवीजन
उनकी पूरी तैयारी के दौरान एक नियम ऐसा था जिस पर कोई समझौता नहीं होता था। क्लास में जो कुछ भी पढ़ाया जाता था, उसे उसी दिन दोहराना जरूरी था। नियमित रिवीजन के साथ-साथ, वह लगातार अभ्यास के प्रश्न हल करते थे, अपनी गलतियों का विश्लेषण करते थे, और उन विषयों पर ज़्यादा ध्यान देते थे जिनमें उन्हें कम आत्मविश्वास महसूस होता था। पूरी नींद
उनके शेड्यूल में पूरी नींद को भी प्राथमिकता दी गई थी। शुभम आम तौर पर रात 10:30 बजे के आस-पास सोने जाते थे और सुबह 6:30 बजे उठ जाते थे। समय के साथ, उनका सोने-जागने का चक्र इतना नियमित हो गया कि उन्हें सुबह उठने के लिए अलार्म घड़ी की जरूरत ही नहीं पड़ती थी।
हल्का नाश्ता
उनकी सुबह आम तौर पर भारी-भरकम खाने के बजाय अंकुरित मूंग और फलों जैसे हल्के नाश्ते से शुरू होती थी।
सोशल मीडिया से दूरी
ध्यान केंद्रित रखने के लिए, उन्होंने जान-बूझकर ध्यान भटकाने वाली चीजों को कम कर दिया था। तैयारी के दौरान उन्होंने अपने रूटीन से सोशल मीडिया और फिल्मों को काफी हद तक दूर रखा, जिससे वे अपने पढ़ाई के लक्ष्यों पर पूरी तरह ध्यान दे पाए।
तैयारी
रिपोर्ट्स में एक और आदत का जिक्र किया गया है, जिससे पता चलता है कि वे परीक्षा के दिन की व्यावहारिक तैयारियों पर भी कितना ध्यान देते थे।
AC से परहेज
पढ़ाई करते समय शुभम AC (एयर कंडीशनिंग) का इस्तेमाल नहीं करते थे। इसकी वजह? वे यह पक्का करना चाहते थे कि परीक्षा के दौरान आस-पास के माहौल का उनकी परफॉार्मेंस पर कोई बुरा असर न पड़े। AC की ठंडक पर निर्भर न रहकर उनका मकसद यह था कि परीक्षा के दिन तापमान या जगह कैसी भी हो, वे हर हाल में खुद को उसके हिसाब से ढाल सकें।
तैयारी का शेड्यूल काफी मुश्किल होने के बावजूद, उनकी जिंदगी में सिर्फ पढ़ाई ही सब कुछ नहीं थी।
खेल-कूद
उन्होंने खेल-कूद के लिए भी समय निकाला और यह पक्का किया कि तैयारी के इस बेहद व्यस्त दौर में भी शारीरिक कसरत उनके रूटीन का हिस्सा बनी रहे।




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