वहां शांति थी, यहां सिर्फ ट्रैफिक और शोर; जर्मनी छोड़ भारत लौटे युवक की पोस्ट वायरल
जर्मनी से बेंगलुरु लौटे युवक ने सोशल मीडिया पर दोनों देशों की जिंदगी का फर्क बताया। ट्रैफिक, ऑफिस कल्चर, शोर और वर्क लाइफ बैलेंस को लेकर पोस्ट वायरल हो गया।

भारत में लाखों लोग विदेश जाकर बसने का सपना देखते हैं। बेहतर जिंदगी, कम काम का दबाव, साफ माहौल और संतुलित जीवन जैसी बातें लोगों को यूरोप और दूसरे देशों की तरफ खींचती हैं। लेकिन जो लोग कई साल विदेश में बिताने के बाद वापस भारत लौटते हैं, उनके लिए यहां की जिंदगी दोबारा अपनाना हमेशा आसान नहीं होता।
सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसा ही एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बेंगलुरु में रहने वाले एक युवक ने जर्मनी और भारत की जिंदगी के बीच का बड़ा फर्क बताया है। युवक का नाम तनुज बताया जा रहा है, जिसने करीब 6 साल जर्मनी में बिताए और फिर भारत लौट आया।
‘जर्मनी से बेंगलुरु आकर मेरी पूरी दिनचर्या बदल गई’
तनुज ने अपने पोस्ट में लिखा कि जर्मनी छोड़कर बेंगलुरु आने के बाद उसकी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उसने दोनों जगहों की दिनचर्या की तुलना करते हुए बताया कि भारत में सुबह की शुरुआत ही शोर से होती है। उसने लिखा कि बेंगलुरु में वह कार और ट्रकों के हॉर्न की आवाज से उठता है और सुबह की सैर भी किसी गेटेड सोसायटी के अंदर करनी पड़ती है। ऑफिस पहुंचने में ट्रैफिक की वजह से करीब डेढ़ घंटा लग जाता है।
ऑफिस में काम कम, मीटिंग ज्यादा
तनुज ने बताया कि बेंगलुरु के ऑफिस कल्चर में लगातार मीटिंग, बातचीत और ब्रेनस्टॉर्मिंग चलती रहती है। दिनभर लोगों के साथ लंच, चाय ब्रेक, गेम ब्रेक और बातचीत का सिलसिला चलता रहता है। उसके मुताबिक, घर लौटने के बाद भी रात 10 बजे तक ऑनलाइन मीटिंग जारी रहती है। यानी ऑफिस का काम घर तक पीछा नहीं छोड़ता।
‘जर्मनी में काम के बाद लैपटॉप नहीं खोलता था’
वहीं जर्मनी की जिंदगी को याद करते हुए तनुज ने बताया कि वहां सुबह पूरी शांति में होती थी। साफ हवा और प्रकृति के बीच दौड़ने का मौका मिलता था। ऑफिस जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल होता था और वहां लोग ज्यादा बातचीत की बजाय काम पर ध्यान देते थे।
उसने कहा कि जर्मनी में लंच अक्सर अकेले होता था, बिना बेवजह ब्रेक के लोग अपना काम करते थे और सबसे बड़ी बात, काम खत्म होने के बाद दोबारा लैपटॉप खोलने की जरूरत नहीं पड़ती थी। पोस्ट के आखिर में उसने लोगों से सवाल पूछा, “आप कौन सी जिंदगी चुनेंगे?”
परिवार और मौसम की वजह से लौटना पड़ा भारत
जब लोगों ने उससे पूछा कि आखिर उसने जर्मनी छोड़कर भारत वापसी क्यों की, तो तनुज ने जवाब दिया कि इसके पीछे दो बड़ी वजह थीं। पहली वजह परिवार था और दूसरी जर्मनी का उदास और ठंडा मौसम।उसने माना कि विदेश की जिंदगी में सुविधा और शांति तो थी, लेकिन परिवार से दूर रहना आसान नहीं था।
सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
तनुज का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और हजारों लोगों ने इस पर अपनी राय दी। कई लोगों ने कहा कि बेंगलुरु की जिंदगी बेहद थका देने वाली है, जबकि कुछ लोगों ने भारत की हलचल और लोगों के बीच रहने को ज्यादा बेहतर बताया।
एक यूजर ने लिखा कि जर्मनी में “डीप वर्क”, साफ हवा और समय पर काम खत्म होने वाली जिंदगी मिलती है, जबकि बेंगलुरु में ट्रैफिक, शोर और देर रात तक काम का दबाव है। लेकिन करियर और नेटवर्क बनाने के लिए अभी भी भारत बेहतर लगता है। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि भारत की जिंदगी में अफरा-तफरी जरूर है, लेकिन यहां लोगों के बीच अपनापन भी है। जबकि जर्मनी की जिंदगी कई बार मशीन जैसी महसूस होती है।




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