दोबारा NEET परीक्षा से पहले सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा, 30 दिन में परीक्षा कराना बना चुनौती; क्या प्लान कर रहा NTA
RE-NEET 2026 : दोबारा नीट परीक्षा कराने को लेकर NTA ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए हैं। 21 जून को होने वाली परीक्षा से पहले एजेंसी ‘ज़ीरो ट्रस्ट’ नीति पर काम कर रही है। जानिए पेपर लीक विवाद के बाद क्या बदल रहा है।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर मचा विवाद अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। 21 जून को होने वाली री-नीट यानी दोबारा नीट परीक्षा से पहले एजेंसी चौतरफा दबाव में है। पेपर लीक के आरोपों के बाद अब एनटीए हर कदम बेहद सतर्कता से उठा रही है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बार एजेंसी जीरो ट्रस्ट पॉलिसी पर काम कर रही है, यानी किसी भी स्तर पर किसी पर आंख बंद करके भरोसा नहीं किया जा रहा।
छह महीने की तैयारी वाला काम अब 30 दिन में
सूत्रों के मुताबिक, इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा को दोबारा आयोजित करने में आमतौर पर करीब छह महीने की तैयारी लगती है। परीक्षा केंद्र तय करने से लेकर प्रश्नपत्र छपाई, ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा और निगरानी तक हर प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। लेकिन इस बार एनटीए के पास मुश्किल से 30 दिन हैं।एजेंसी से जुड़े एक सूत्र ने कहा, “घड़ी लगातार चल रही है। अगर समय की कमी की वजह से कहीं भी चूक हुई तो यह बड़ा संकट बन सकता है।” यही वजह है कि इस बार हर चरण की बार-बार जांच की जा रही है।
‘जीरो ट्रस्ट’ नीति पर कैसे काम कर रही है NTA?
पेपर लीक विवाद के बाद एनटीए ने अपने पूरे सिस्टम की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने कई पुराने तरीकों को बदल दिया है और अब हर स्तर पर क्रॉस चेकिंग बढ़ाई गई है।बताया जा रहा है कि परीक्षा से जुड़ी हर प्रक्रिया का नियमित ऑडिट हो रहा है। अलग-अलग टीमों के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखी जा रही है। टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स की गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है। परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी दोबारा जांची जा रही है सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े सभी कदम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते क्योंकि ऐसा करने से पेपर लीक गिरोह सिस्टम की कमजोरियां समझ सकते हैं।
क्या अंदर के लोग भी जांच के घेरे में?
NTA से जुड़े सूत्रों ने माना कि सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों से है जो लंबे समय से सिस्टम का हिस्सा रहे हैं। एजेंसी को शक है कि कुछ अंदरूनी लोग भी गड़बड़ी में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, “जो लोग सालों से एजेंसी के साथ काम कर रहे हैं, वे भी गलत रास्ता चुन सकते हैं। अगर अंदर के लोग ही गलत करें तो स्थिति और मुश्किल हो जाती है।” यही कारण है कि अब सिर्फ बाहरी सुरक्षा नहीं, बल्कि अंदरूनी निगरानी भी बढ़ाई गई है।
पूरा पेपर नहीं, सिर्फ कुछ हिस्सा लीक हुआ था?
सूत्रों का दावा है कि पेपर लीक पूरे प्रश्नपत्र का नहीं था। उनके अनुसार अगर लीक प्रिंटिंग प्रेस, बैंक या परीक्षा केंद्र से हुआ होता तो पूरा पेपर बाहर आ जाता। लेकिन इस मामले में सिर्फ कुछ हिस्से ही बाहर पहुंचे थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच अभी जारी है।
CBI जांच पर क्या बोली एजेंसी?
पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। NTA का कहना है कि एजेंसी जांच को प्रभावित नहीं कर सकती और सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी। इस पूरे विवाद के बीच लाखों छात्र और अभिभावक अब 21 जून की परीक्षा को लेकर चिंतित हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें सिर्फ निष्पक्ष परीक्षा चाहिए ताकि मेहनत का सही परिणाम मिल सके।
21 जून NTA के लिए क्यों अहम है?
इस बार री-NEET सिर्फ एक परीक्षा नहीं रह गई है। यह NTA की विश्वसनीयता की परीक्षा भी बन चुकी है। अगर परीक्षा शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से हो जाती है तो एजेंसी कुछ हद तक भरोसा वापस हासिल कर सकती है। लेकिन किसी भी तरह की नई गड़बड़ी पूरे सिस्टम पर फिर सवाल खड़े कर सकती है। इसलिए NTA फिलहाल हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए है और एजेंसी के अंदर इसे सबसे कठिन ऑपरेशन माना जा रहा है।




साइन इन