CUET UG 2026: 15 लाख छात्र मैदान में, DU-JNU में सीट के लिए होगी बड़ी टक्कर; इन कॉलेज पर पहली नजर
CUET UG 2026 की परीक्षा 11 से 31 मई के बीच होगी। 15 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे ऐसे में DU और JNU में एडमिशन के लिए मुकाबला और तेज होने वाला है।

CUET UG 2026 : देशभर के लाखों छात्रों के लिए CUET अब सिर्फ एक एग्जाम नहीं बल्कि अच्छे कॉलेज में दाखिले का सबसे बड़ा दरवाजा बन चुका है। साल 2026 में यह दरवाजा और भी ज्यादा भीड़भाड़ वाला होने वाला है क्योंकि इस बार 15 लाख से ज्यादा छात्र इसमें शामिल हो रहे हैं। ऐसे में दिल्ली यूनिवर्सिटी और JNU जैसे बड़े नामों में सीट पाने की दौड़ पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल होने वाली है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के मुताबिक CUET UG 2026 की परीक्षा 11 मई से 31 मई के बीच कंप्यूटर आधारित मोड में कराई जाएगी। परीक्षा कई शिफ्ट में होगी ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को मौका मिल सके। परीक्षा से पहले मई के पहले हफ्ते में सिटी इंटिमेशन स्लिप और एडमिट कार्ड जारी कर दिए जाएंगे। रिजल्ट जुलाई में आने की उम्मीद है, जिसके बाद एडमिशन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
JNU में एडमिशन का नया सिस्टम
जवाहरलाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) ने अपने 2026-27 के ई-प्रॉस्पेक्टस में साफ कर दिया है कि अब कई कोर्स में एडमिशन का आधार CUET UG ही होगा। बीए (ऑनर्स) फॉरेन लैंग्वेज, बीएससी आयुर्वेद बायोलॉजी और सर्टिफिकेट कोर्स के लिए CUET स्कोर जरूरी रहेगा। वहीं बीटेक में दाखिला जेईई मेन के जरिए होगा। पोस्टग्रेजुएट और टेक्निकल कोर्स के लिए अलग-अलग एंट्रेंस जैसे CUET PG, GAT-B और CCMT काउंसलिंग लागू होगी। इंटरनेशनल छात्रों के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 30 अप्रैल तय की गई है। CUET रिजल्ट आने के बाद सभी छात्रों को अलग से एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी का दबदबा कायम
वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी एक बार फिर देश के टॉप कॉलेजों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। NIRF 2025 रैंकिंग में इसके कॉलेजों ने टॉप 10 में 6 जगह और टॉप 5 में सभी स्थान हासिल किए हैं। सबसे आगे हिंदू कॉलेज है, जिसके बाद मिरांडा हाउस, हंसराज कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज और सेंट स्टीफन कॉलेज जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यही वजह है कि CUET देने वाले ज्यादातर छात्र DU को अपनी पहली पसंद मानते हैं।
एडमिशन में क्या रहेगा सबसे अहम
इस साल 15 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन के चलते मुकाबला काफी कड़ा रहने वाला है। CUET के जरिए अब देशभर के सेंट्रल, स्टेट और प्राइवेट यूनिवर्सिटी में एक ही प्लेटफॉर्म से एडमिशन मिलता है, जिससे सिस्टम ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन सीटों की सीमित संख्या और ज्यादा आवेदकों के कारण कटऑफ ऊंची जा सकती है। हर कोर्स में सीटों की संख्या और छात्रों की पसंद के हिसाब से मेरिट तय होगी।




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