Class 12 Topper : ISC Topper success story UP Lucknow girl defies vision hearing loss makes a mark in ISC exam लड़की जो देख सुन नहीं सकती, बोलने में भी दिक्कत, स्कूल टॉपर बनी, आए 98.75 प्रतिशत अंक, Career Hindi News - Hindustan
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लड़की जो देख सुन नहीं सकती, बोलने में भी दिक्कत, स्कूल टॉपर बनी, आए 98.75 प्रतिशत अंक

दिव्यांग लड़की आईएससी 12 वीं की परीक्षा में 98.75 प्रतिशत अंक लाकर कॉलेज टॉपर बन जाए तो सिर्फ खुशियों के आंसू निकलते हैं।

Sat, 2 May 2026 02:17 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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लड़की जो देख सुन नहीं सकती, बोलने में भी दिक्कत, स्कूल टॉपर बनी, आए 98.75 प्रतिशत अंक

एक लड़की जो देख नहीं सकती, सुन नहीं सकती, सही से बोल नहीं सकती उस लड़की और उसके माता पिता की मनोदशा क्या होगी ये अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इसके साथ ही बेटी के पिता को ब्लड कैंसर हो तो लगता है कि दुनिया में सबसे बड़ी नइंसाफी इसी परिवार के साथ हुई है लेकिन जब इसी परिवार की वही दिव्यांग लड़की आईएससी 12 वीं की परीक्षा में 98.75 प्रतिशत अंक लाकर कॉलेज टॉपर बन जाए तो सिर्फ खुशियों के आंसू निकलते हैं। ये कहानी क्राइस्ट चर्च कॉलेज में 12 वीं की छात्रा साराह मुईन और उसके पिता मुईन अहमद, माता जूली अहमद, शिक्षक सलमान काजी के के जज्बे को दर्शाती है।

हुसैनगंज में रहने वाले मुईन अहमद और जूली अहमद की बेटी सारा मुईन को सारकोडाइसिस होने पता चला। एक साल की उम्र में आंखों की रोशनी गई, कक्षा तीन में आते-आते उसे सुनाई देना बंद हो गया और कुछ समय बाद बोलने में भी दिक्कत होने लगी। क्राइस्ट चर्च कॉलेज में साल 2014 में विशेष छात्रों के लिए एक विंग शुरू हुई और कक्षा एक में साराह को प्रवेश मिला। दो साल की पढाई के बाद ही साराह की प्रतिभा को देखते हुए सामान्य छात्रों के साथ शिफ्ट कर दिया गया।

कक्षा 3 में सारा ने ओवर ऑल सेक्शन में टॉप किया। पिता मुईन अहमद ने बताया कि इसके बाद से साराह सिर्फ पढ़ना चाहती थी और 10 वीं में 95 फीसदी अंक आए और 12 वीं में 98.75 फीसदी अंक लाकर सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

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जिस बीमारी में सिकुड़ने लगता है इंसानी दिमाग, उसे मात देकर लखनऊ की आरुषि ने ISC बोर्ड 12वीं में लाए 91.5% नंबर

12वीं (ISC) की छात्रा आरुषि कपूर ने साबित कर दिया है कि इरादों में जान हो, तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी आपके सपनों के आगे घुटने टेक देती है। इडियोपैथिक इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन (IIH) जैसी एक दुर्लभ और बेहद दर्दनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझने के बावजूद, आरुषि ने बोर्ड परीक्षाओं में 91.5% नंबर हासिल करके हर किसी को हैरान कर दिया है। आरुषि लखनऊ के मशहूर सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल की छात्रा हैं। जिस उम्र में बच्चे सिर्फ अपनी पढ़ाई, करियर और दोस्तों के साथ बिजी रहते हैं, उस उम्र में आरुषि एक ऐसी बीमारी से लड़ रही थीं जिसके बारे में सुनना ही रूह कंपा देता है। इडियोपैथिक इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन एक ऐसी अजीब और दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल दिक्कत है, जिसमें दिमाग की नसों से सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) रिसने लगता है। इस फ्लूइड के लीक होने की वजह से दिमाग पर इतना खतरनाक दबाव पड़ता है कि उसका आकार ही सिकुड़ने लगता है। आप खुद सोचिए, एक तरफ बोर्ड एग्जाम्स का स्ट्रेस और दूसरी तरफ इस कदर जानलेवा बीमारी। इस बीमारी का असर सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता। आरुषि बताती हैं कि इसकी वजह से अक्सर उन्हें सिर में भयानक दर्द का सामना करना पड़ता है। सबसे डरावना पल तो वो होता है जब आंखों में भारी सूजन आ जाती है और कुछ वक्त के लिए आंखों की रोशनी तक चली जाती है। ऐसे हालात में जहां एक आम इंसान अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से हार मान ले, वहां इस बच्ची ने किताबें नहीं छोड़ीं।

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