ISC result 2026 aarushi kapoor lucknow success rare disease iih जिस बीमारी में सिकुड़ने लगता है इंसानी दिमाग, उसे मात देकर लखनऊ की आरुषि ने ISC बोर्ड 12वीं में लाए 91.5% नंबर, Career Hindi News - Hindustan
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जिस बीमारी में सिकुड़ने लगता है इंसानी दिमाग, उसे मात देकर लखनऊ की आरुषि ने ISC बोर्ड 12वीं में लाए 91.5% नंबर

लखनऊ की आरुषि कपूर ने इडियोपैथिक इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर और दर्दनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझते हुए भी आईएससी 12वीं की परीक्षा में 91.5% अंक हासिल किया है।

Fri, 1 May 2026 03:21 PMHimanshu Tiwari हिन्दुस्तान टाइम्स, राजीव मलिक, लखनऊ
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जिस बीमारी में सिकुड़ने लगता है इंसानी दिमाग, उसे मात देकर लखनऊ की आरुषि ने ISC बोर्ड 12वीं में लाए 91.5% नंबर

कहते हैं कि अगर इंसान ठान ले, तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है लखनऊ की रहने वाली आरुषि कपूर की है। 12वीं (ISC) की इस छात्रा ने साबित कर दिया है कि इरादों में जान हो, तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी आपके सपनों के आगे घुटने टेक देती है। इडियोपैथिक इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन (IIH) जैसी एक दुर्लभ और बेहद दर्दनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझने के बावजूद, आरुषि ने बोर्ड परीक्षाओं में 91.5% नंबर हासिल करके हर किसी को हैरान कर दिया है। आइए जानते हैं आरुषि की सफलता की कहानी के बारे में...

आरुषि लखनऊ के मशहूर सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल की छात्रा हैं। जिस उम्र में बच्चे सिर्फ अपनी पढ़ाई, करियर और दोस्तों के साथ बिजी रहते हैं, उस उम्र में आरुषि एक ऐसी बीमारी से लड़ रही थीं जिसके बारे में सुनना ही रूह कंपा देता है। इडियोपैथिक इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन एक ऐसी अजीब और दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल दिक्कत है, जिसमें दिमाग की नसों से सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) रिसने लगता है। इस फ्लूइड के लीक होने की वजह से दिमाग पर इतना खतरनाक दबाव पड़ता है कि उसका आकार ही सिकुड़ने लगता है। आप खुद सोचिए, एक तरफ बोर्ड एग्जाम्स का स्ट्रेस और दूसरी तरफ इस कदर जानलेवा बीमारी।

सिर में रहता था भयानक दर्द

इस बीमारी का असर सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता। आरुषि बताती हैं कि इसकी वजह से अक्सर उन्हें सिर में भयानक दर्द का सामना करना पड़ता है। सबसे डरावना पल तो वो होता है जब आंखों में भारी सूजन आ जाती है और कुछ वक्त के लिए आंखों की रोशनी तक चली जाती है। ऐसे हालात में जहां एक आम इंसान अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से हार मान ले, वहां इस बच्ची ने किताबें नहीं छोड़ीं।

परेशानी ने पढ़ने में डाली बहुत सी मुश्किलें

अपनी इस बीमारी को लेकर आरुषि ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, "मुझे ब्रेन स्टेंटिंग नाम की एक बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा। यह सर्जरी इसलिए की गई ताकि दिमाग के सिकुड़ते आकार को रोका जा सके।" अब अपने स्कूल में दोस्तों और टीचर्स के साथ इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाते हुए आरुषि के चेहरे पर जो मुस्कान है, उसके पीछे अनगिनत रातों का दर्द और आंसू छिपे हैं। वो बताती हैं, "इस बीमारी के साथ पढ़ाई करना और लगातार बैठकर परीक्षा देना बिल्कुल भी आसान नहीं था। जब CSF लिक्विड दिमाग पर दबाव डालता है तो आंखों की रोशनी अचानक से गायब हो जाती है। ऐसे में पढ़ना तो दूर, कुछ भी देख पाना मुमकिन नहीं होता।"

प्री-बोर्ड एग्जाम के वक्त अस्पतालों के लगते थे चक्कर

आरुषि के लिए 12वीं का यह सफर बिल्कुल भी सीधा नहीं था। जब अक्टूबर और नवंबर के महीने में स्कूल के बाकी बच्चे अपने प्री-बोर्ड एग्जाम्स की तैयारियों में दिन-रात एक कर रहे थे, उस वक्त आरुषि अस्पतालों के चक्कर काट रही थीं। अपने इलाज के लिए उन्हें लखनऊ से लेकर चेन्नई और गुड़गांव तक के कई बड़े अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ी। यही वजह थी कि वो अपने प्री-बोर्ड एग्जाम्स में भी नहीं बैठ पाई थीं। लगातार अस्पतालों के बिस्तर पर वक्त बिताना, भारी-भरकम दवाइयां खाना और सर्जरी के दर्द को सहना, किसी भी स्टूडेंट का फोकस बिगाड़ने के लिए काफी है। लेकिन इन सब के बावजूद, आरुषि का लक्ष्य एकदम साफ था।

माता-पिता की तरह सीए बनना चाहती हैं आरुषि

उनके सपनों की बात करें तो आरुषि के माता-पिता, रुचि कपूर और आशीष कपूर दोनों ही पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं। आरुषि भी अपने मम्मी-पापा के नक्शेकदम पर चलना चाहती हैं और आगे चलकर एक कामयाब सीए बनना उनका सबसे बड़ा सपना है। माता-पिता ने भी अपनी बेटी के इस मुश्किल सफर में उसका पूरा साथ दिया और हर कदम पर उसकी ढाल बनकर खड़े रहे।

प्रिंसिपल ने तरीफ करते नहीं थक रहीं

स्कूल की प्रिंसिपल प्रोमिनी चोपड़ा अपनी इस होनहार और बहादुर छात्रा की तारीफ करते नहीं थकतीं। आरुषि की मेहनत और हिम्मत की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा, "एक ऐसे बच्चे के लिए बोर्ड की परीक्षा में बैठना और इतने अच्छे नंबर लाना बहुत बड़ी बात है, जो इतने ज्यादा दर्द और तकलीफ से गुज़र रहा हो। इसके लिए सच में बहुत ज्यादा हिम्मत चाहिए होती है।" उन्होंने आगे कहा, "हमें इस बात का बहुत गर्व है कि हमारे स्कूल में ऐसे बहादुर बच्चे पढ़ते हैं। आरुषि जैसे बच्चे उन सभी लोगों के लिए एक जीती-जागती मिसाल हैं जो छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं। उसने दिखाया है कि ज़िंदगी की कड़वी और मुश्किल सच्चाइयों का सामना कैसे पूरी बहादुरी के साथ किया जाता है।"

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