उत्तराखंड में CBSE स्कूलों के नतीजों पर भारी स्टेट बोर्ड का रिजल्ट, बेटियों का रहा शानदार प्रदर्शन
उत्तराखंड बोर्ड के हाईस्कूल नतीजों ने सीबीएसई स्कूलों के नतीजों को पछाड़ा दिया है। इस बार बालिकाओं के शानदार प्रदर्शन ने इतिहास रच दिया है। सरकारी स्कूलों में जश्न का माहौल है।

उत्तराखंड के शैक्षिक इतिहास में शनिवार का दिन एक नई इबारत लिख गया। उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा के नतीजों ने सीबीएसई स्कूलों को भी पछाड़ दिया है। हाईस्कूल में उत्तराखंड बोर्ड का पास प्रतिशत सीबीएसई के मुकाबले बेहतर रहा है। यह उपलब्धि बालिकाओं के शानदार प्रदर्शन से हासिल हुई है। शनिवार को घोषित परीक्षा परिणामों में हाईस्कूल में बालकों का पास प्रतिशत पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा कम रहा, इसके बावजूद बोर्ड के कुल रिजल्ट में सुधार दर्ज किया गया।
बेटियों के हौसले की जीत
हाईस्कूल की परीक्षा में उत्तराखंड बोर्ड की सफलता की कहानी इस बार बेटियों ने लिखी है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बालिकाओं का प्रदर्शन इस कदर शानदार रहा कि उसने औसत पास प्रतिशत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। हालांकि, बालकों का पास प्रतिशत पिछले साल के मुकाबले मामूली रूप से गिरा है, लेकिन कुल परिणाम के ग्राफ में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
सीबीएसई बनाम उत्तराखंड बोर्ड में दिलचस्प रहा मुकाबला
अक्सर यह माना जाता था कि सीबीएसई स्कूलों के छात्र हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में ज्यादा अंक और बेहतर पास प्रतिशत हासिल करते हैं, लेकिन इस बार बाजी पलट गई। उत्तराखंड बोर्ड के स्कूलों ने न केवल सीबीएसई की बराबरी की, बल्कि उत्तीर्ण प्रतिशत के मामले में उन्हें पछाड़कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और सही दिशा मिले तो राज्य बोर्ड के बच्चे भी किसी से कम नहीं हैं। बोर्ड मुख्यालय से परिणाम जारी करते हुए अधिकारियों ने बताया कि इस बार हाईस्कूल में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों का प्रतिशत सीबीएसई के क्षेत्रीय आंकड़ों से बेहतर दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उत्तराखंड बोर्ड के अधिकांश छात्र ग्रामीण और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों से आते हैं, जहां सुविधाओं का अभाव होने के बावजूद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
छात्राओं की संख्या और वर्चस्व दोनों में इजाफा
परीक्षा परिणामों की घोषणा के दौरान प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए एक महत्वपूर्ण बात साझा की। उन्होंने बताया कि इस बार न केवल नतीजों में बेटियां आगे रहीं, बल्कि परीक्षा में बैठने वाली छात्राओं की संख्या भी छात्रों के मुकाबले अधिक थी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी के मुताबिक, "उत्तराखंड बोर्ड में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट, दोनों ही स्तरों पर छात्राओं की भागीदारी छात्रों से ज्यादा रही है। यह राज्य के बदलते सामाजिक और शैक्षिक ढांचे का सुखद संकेत है।"




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