बिहार के विश्वविद्यालयों में अब AI की होगी क्लास, कब से शुरू होंगे हाईटेक कोर्स
बिहार के विश्वविद्यालयों में जुलाई से AI और साइबर सुरक्षा जैसे रोजगारपरक कोर्स शुरू होंगे। नाइलिट के साथ करार के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज की।

बिहार की उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। अब सूबे के छात्र केवल पारंपरिक विषयों की किताबी दुनिया तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी भविष्य की तकनीक में महारत हासिल करेंगे। राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों में जुलाई सत्र से एआई और अन्य स्किल-बेस्ड कोर्सेज शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह कदम राज्य के युवाओं के लिए न केवल आधुनिक शिक्षा के द्वार खोलेगा, बल्कि उनके लिए रोजगार की नई राहें भी प्रशस्त करेगा।
चुनाव से पहले हुआ था बड़ा करार
इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षा विभाग ने दूरदर्शिता दिखाते हुए विधानसभा चुनाव से पहले ही राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट - NIELIT) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया था। इस करार के तहत नाइलिट के विशेषज्ञ सीधे विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों को ट्रेनिंग देंगे। विभाग फिलहाल इसके लिए 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) तैयार कर रहा है, ताकि कोर्सेज का संचालन सुचारू रूप से किया जा सके।
सामान्य पढ़ाई के साथ बन सकेंगे 'टेक एक्सपर्ट'
इस पहल की सबसे खास बात इसकी लचीली व्यवस्था है। चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) के तहत स्नातक की सामान्य पढ़ाई कर रहे छात्र भी इन तकनीकी कोर्सेज को चुन सकेंगे। यानी अब इतिहास या भूगोल पढ़ने वाला छात्र भी साथ में एआई या साइबर सुरक्षा की बारीकियां सीख सकेगा। नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और विश्वविद्यालयों के पोर्टल के माध्यम से छात्र अपनी पसंद के कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।
कोर्स की रूपरेखा और रोजगार के अवसर
नाइलिट ने इन कोर्सेज को उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। कोर्सेज की अवधि 90 घंटे से लेकर 540 घंटे तक रखी गई है। पाठ्यक्रम में केवल एआई ही नहीं, बल्कि कई अन्य आधुनिक विषय भी शामिल हैं:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- साइबर सुरक्षा (Cyber Security)
- थ्री-डी प्रिंटिंग (3D Printing)
- डेटा एनालिटिक्स
कोर्स पूरा होने के बाद छात्रों को सर्टिफिकेट तो मिलेगा ही, साथ ही नाइलिट के नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न नामी कंपनियों में प्लेसमेंट के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे। इससे बिहार के छात्रों का पलायन रुकेगा और उन्हें अपने ही राज्य में बेहतर करियर बनाने का मौका मिलेगा।
संसाधनों की जुगत और नोडल अधिकारियों की तैनाती
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द अपने यहां आवश्यक संसाधनों (जैसे कंप्यूटर लैब और हाई-स्पीड इंटरनेट) की व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही, बेहतर समन्वय के लिए हर विश्वविद्यालय में एक 'नोडल अधिकारी' नियुक्त करने को कहा गया है, जो नाइलिट के विशेषज्ञों और छात्रों के बीच एक सेतु का काम करेंगे। बिहार के विश्वविद्यालयों में होने वाला यह बदलाव शिक्षा जगत के लिए एक बड़ा 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि जुलाई से शुरू होने वाले इन कोर्सेज का लाभ उठाकर बिहार के युवा वैश्विक तकनीक की दौड़ में कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।




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